IPRD के उप-निदेशक अजय ने झांसा देकर पंकज जैन से काम कराया और दो महीने की सैलरी भी नहीं दी

कभी आइपीआरडी में कंटेट राइटर और उसके बाद मुख्य सचिव के पीआरओ के पद पर कार्यरत पंकज जैन इन दिनों काफी दुखी हैं, दुख का कारण आइपीआरडी द्वारा काम लेना और उनके पारिश्रमिक का भुगतान नहीं करना है। पंकज जैन ने 6 मई को 10 बजकर 09 मिनट पूर्वाह्न, अपने सोशल साइट फेसबुक पर जब यह लिखा “मेरी 2 महीने की सैलरी सूचना जनसम्पर्क विभाग ने नहीं दी, फिर में भाजपा को वोट क्यों दूं?”

कभी आइपीआरडी में कंटेट राइटर और उसके बाद मुख्य सचिव के पीआरओ के पद पर योगदान दे चुके पंकज जैन इन दिनों काफी दुखी हैं, दुख का कारण आइपीआरडी द्वारा काम लेना और उनके पारिश्रमिक का भुगतान नहीं करना है। पंकज जैन ने 6 मई को 10 बजकर 09 मिनट पूर्वाह्न, अपने सोशल साइट फेसबुक पर जब यह लिखा कि  “मेरी 2 महीने की सैलरी सूचना जनसम्पर्क विभाग ने नहीं दी, फिर में भाजपा को वोट क्यों दूं?” तब जाकर रहस्योद्घाटन हुआ कि झारखण्ड के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में कार्यरत अधिकारियों में कुछ अधिकारी बेरोजगार युवकों का शोषण भी करते हैं, तथा उनसे काम करवा लेने के बाद उनकी सैलरी तक नहीं देते।

आश्चर्य इस बात की है, कि जब सोशल साइट पर ये मामला पंकज जैन ने उठाया, तब भी किसी सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अधिकारी ने पंकज जैन से मिलकर, उनकी मदद करने की कोई पहल नहीं की, जबकि आज का जमाना सोशल साइट का जमाना है।ज्ञातव्य है कि पंकज जैन पेशे से पत्रकार है, जब विद्रोही24.कॉम ने उनसे यह सवाल पूछा कि आपको आइपीआरडी ने आपसे काम लिया और दो महीने की सैलरी तक नहीं दी, ऐसे में भाजपा से इतनी नाराजगी क्यों? उसे वोट न देने का फैसला क्यों किया? उनका कहना था कि राज्य से लेकर केन्द्र तक भाजपा की डबल इंजन की सरकार हैं, नौकरी देनेवालों की ढिंढोरा पीटनेवाली की सरकार है, ऐसे में ये संकल्प लेना जरुरी था।

उन्होंने विद्रोही24.कॉम को बताया कि सितम्बर 2017 से लेकर दिसम्बर 2017 तक आइपीआरडी में कार्यरत डिप्टी डायरेक्टर अजय नाथ झा, उन्हें झांसे में रखकर मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के यहां पीआरओ का काम करवाता रहा और जब भी सैलरी देने की बात आई, वो यहीं कहता कि चिन्ता मत करो, वो सैलरी दिलवा देगा, अंत में जैसे-तैसे करके दो महीने की सैलरी उसने दिलवाई पर शेष दो महीने की सैलरी आज तक नहीं मिली।

पंकज जैन ने यह भी कहा कि वह अपनी सैलरी को लेकर तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक राम लखन गुप्ता तक से बातचीत की, पर किसी ने उनके सैलरी दिलवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई, और ये डिप्टी डायरेक्टर अजय नाथ झा बिना पैसे दिये उनसे काम लेता रहा, जब उन्हें यह विश्वास हो गया कि उन्हें सैलरी अब नहीं मिलेगा तो उन्होंने आइपीआरडी की नौकरी छोड़ दी, साथ ही संकल्प लिया कि वो आगे भाजपा को वोट ही नहीं देंगे।

पंकज जैन ने यह भी कहा कि बार-बार सैलरी मांगने पर डिप्टी डायरेक्टर अजय नाथ झा यहीं कहता कि चिन्ता मत करो, वह मैडम यानी राजबाला वर्मा और सीएम रघुवर दास आदि से कहकर उनके पैसे दिलवा देगा, उसने यह भी कहा कि डेलीवेजेज के आधार पर भी 915 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से किसी को भी वेतन देने का आइपीआरडी को अधिकार हैं, उसके आधार पर भी उसका पैसा मिल जायेगा, चिन्ता मत करो, पर अब तो दो साल होने को आये, कब मिलेगा?

इधर विद्रोही24.कॉम ने इस संबंध में आइपीआरडी के डिप्टी डायरेक्टर अजय नाथ झा से बातचीत करनी चाही तो उस अधिकारी ने बार-बार फोन काट दिया, और बात करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई, अब सवाल उठता है कि निजी कंपनियों और कारखानों में काम करा लेने के बाद पैसे नहीं देने की परिपाटी तो थी, ये क्या अब सरकारी कार्यालयों में भी ये सब देखने को मिलेगा, तो फिर ऐसे में तो लोगों का सरकार पर से ही विश्वास उठ जायेगा। अब सवाल तो सरकार से हैं कि आखिर बताये कि पंकज जैन को उसके बकाये की दो महीने की राशि कब मिलेगी?

Krishna Bihari Mishra

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