दुमका नगर परिषद चुनाव में जनता बदलाव के मूड में, भाजपा को हो सकता है नुकसान

दुमका नगर परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की अमिता रक्षित और निर्दलीय श्वेता झा के बीच अब सीधी टक्कर स्पष्ट रुप से दिखाई पड़ रही है। इस सीधी टक्कर में फिलहाल श्वेता झा का पलड़ा भारी दिख रहा हैं। ऐसे भी इस बार लगता है कि दुमका नगर परिषद के अध्यक्ष पद के लिए हो रहे चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में किस्मत आजमा रही श्वेता झा को दुमका की जनता निराश करने के मूड में नहीं हैं।

दुमका नगर परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की अमिता रक्षित और निर्दलीय श्वेता झा के बीच अब सीधी टक्कर स्पष्ट रुप से दिखाई पड़ रही है। इस सीधी टक्कर में फिलहाल श्वेता झा का पलड़ा भारी दिख रहा हैं। ऐसे भी इस बार लगता है कि दुमका नगर परिषद के अध्यक्ष पद के लिए हो रहे चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में किस्मत आजमा रही श्वेता झा को दुमका की जनता निराश करने के मूड में नहीं हैं।

श्वेता झा को झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और झारखण्ड विकास मोर्चा ने पूर्व में ही समर्थन दे रखा है, जबकि कुछ दिन पहले राष्ट्रीय जनता दल और बहुजन समाज पार्टी द्वारा भी समर्थन दे दिये जाने से श्वेता झा की स्थिति मजबूत होती चली जा रही है। अगर स्थानीय नागरिकों की माने, तो वे भी इस बार बदलाव की मूड में हैं, जिसका प्रभाव श्वेता झा के पक्ष में जाना सुनिश्चित हो गया है।

चूंकि पिछले दस वर्षों से अध्यक्ष पद पर काबिज अमिता रक्षित पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगते रहे हैं, जिस कारण इस बार उन्हें भाजपा से टिकट मिलने के बावजूद भी दिक्कतें आ रही हैं, हालांकि उनके भी चाहने वालों की संख्या कम नहीं हैं, कांग्रेस ने अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार दिया है, पर वो मजबूत स्थिति में नहीं, कि वह टक्कर में भी आ सके।

एक अन्य उम्मीदवार ममता साह भी मैदान में है, जो चुनाव को प्रभावित कर रही हैं, यानी अगर कोई हारेगा या जीतेगा तो उसमें ममता साह की भूमिका अहम मानी जायेगी, यानी हार और जीत कराने में ममता साह की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी, हालांकि ममता साह को अपनी ओर मिलाने का भाजपा खूब प्रयास कर रही हैं, पर उसे सफलता नहीं मिल पा रही, इधर कांग्रेस छोड़कर सभी विपक्षी दलों का मिल रहा साथ, श्वेता झा को प्रतिदिन मजबूती प्रदान कर रहा है।

इधर भाजपा के 50 प्रतिशत कार्यकर्ता भी अमिता रक्षित के भाजपा उम्मीदवार घोषित कर दिये जाने से नाराज चल रहे हैं, जिसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ रहा है और ये भाजपा कार्यकर्ता भले ही खुलकर सामने नहीं आ रहे हो, पर अंदर ही अंदर उनका विरोध भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। ऐसे में भाजपा के लिए यहां एक ही गीत हैं – बहुत कठिन है डगर पनघट की…

Krishna Bihari Mishra

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