अगर इसी तरह कांग्रेस में जूतम-पैजार होता रहा, तो समझ लीजिये कांग्रेस झारखण्ड से गायब

एक ओर राज्य में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियां एक बार फिर राज्य में सत्तारुढ़ होने के लिए अपने कार्यकर्ताओं के हौसले बढ़ा रही हैं, समर्थकों की संख्या बढ़ा रही हैं, दूसरे दलों के ताकतवर नेताओं को प्रलोभन देकर अपने पार्टी में मिला रही हैं, सदस्यता अभियान चला रही हैं, और जरा कांग्रेस में देखिये, इनके कार्यकर्ता एक दूसरे को नंगा करने पर तूले हैं,

एक ओर राज्य में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियां एक बार फिर राज्य में सत्तारुढ़ होने के लिए अपने कार्यकर्ताओं के हौसले बढ़ा रही हैं, समर्थकों की संख्या बढ़ा रही हैं, दूसरे दलों के ताकतवर नेताओं को प्रलोभन देकर अपने पार्टी में मिला रही हैं, सदस्यता अभियान चला रही हैं, और जरा कांग्रेस में देखिये, इनके कार्यकर्ता एक दूसरे को नंगा करने पर तूले हैं, शायद उन्हें लगता है कि इस प्रकार की सड़क पर मारधाड़ करके ही कांग्रेस को झारखण्ड में मजबूत बनाया जा सकता है।

जरा देखिये, आज कांग्रेस भवन में क्या हुआ? कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय और प्रदेश अध्यक्ष डा. अजय कुमार के समर्थक आपस में भिड़ गये, खूब जूतमपैजार किया, एक दूसरे से भिड़ने लगे, स्थिति हाथ से निकलता देख पुलिसकर्मियों ने लाठी भांज दी, तब जाकर मामला शांत हुआ। 

ज्ञातव्य है कि कुछ दिन पहले भी इसी प्रकार की हरकत देखने को मिली थी, पर मामला उतना नहीं बढ़ा, जितना आज बढ़ता हुआ दिखा। दोनों ओर के समर्थक एक दूसरे को देखने पर आमदा थे। सुबोधकांत सहाय के समर्थकों का कहना है कि उन्हें किस आधार पर पार्टी से निकाला गया, पार्टी जब भी किसी को निकालती हैं, तो उससे कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी क्यों नहीं किया गया।

राजनीतिक पंडितों की मानें तो कांग्रेस में जितना जनाधार सुबोधकांत सहाय का है, उतना जनाधार डा. अजय कुमार का नहीं है, वे भले ही राष्ट्रीय नेताओं के द्वारा मिल रही हरी झंडी से यहां अपने काम को गति दे दें, पर सच्चाई यह है कि उनके पास इतनी भी ताकत नहीं कि एक नुक्कड़ सभा कर अपनी सभा में, अपनी बदौलत भीड़ भी इकट्ठी कर लें, चुनाव में विधानसभा की सीटें जीतना दूसरी बात है।

अगर यहीं स्थिति रहीं तो कांग्रेस समझ लीजिये झारखण्ड से गायब। इसलिए जरुरत है, कांग्रेस के नेताओं को चाहिए, कि समय के महत्व को समझे और आपसी समझदारी से काम लें, क्योंकि वर्तमान में कांग्रेस, झारखण्ड में उस मजबूत स्थिति में नहीं कि अकेले विपक्ष के लायक भी सीटें प्राप्त कर सकें, कांग्रेस बिना किसी के सहयोग के एक भी सीट यहां जीत नहीं सकती। 

लेकिन उसके लिए भी जरुरी है कि कांग्रेस में कम से कम जूतम पैजार हो, आज के कांग्रेस भवन में कांग्रेसियों के बीच  हुई जूतमपैजार ने कांग्रेस में एक प्रकार की ऐसी कील ठोक दी है, कि उसका जख्म बहुत महीनों तक सालता रहेगा, और ये जख्म अधिक गहरा गया तो प्रदेश से कांग्रेस साफ ही समझिये।

Krishna Bihari Mishra

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इन दिनों झारखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष डा. अजय कुमार आपे से बाहर हैं, उनके निशाने पर वे सारे कांग्रेस के नेता है, जो उन्हें पसन्द नहीं कर रहे, उन्होंने खुद से इनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, आम तौर पर जो बातें पार्टी के अंदर होनी चाहिए, डा. अजय कुमार ने उसे खुद ही पार्टी के बाहर लाकर, पार्टी के अंदर हो रहे उठा-पटक को सामने लाकर रख दिया। उन्होंने एक चैनल से बातचीत में खुलकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

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