आखिर कितने पारा टीचरों के मौत के बाद अपने CM रघुवर दास की नींद टूटेगी?

आज सारठ प्रखण्ड के ग्राम बलवा के पारा शिक्षक राजेन्द्र यादव की मौत इलाज के दौरान पटना में हो गई। राजेन्द्र यादव पिछले कई दिनों से गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, आज उनकी जीवन लीला ही समाप्त हो गई। अकेले राजेन्द्र यादव ही नहीं बल्कि अब तक दर्जनों पारा शिक्षकों की मौत हो गई, एक पारा शिक्षक लापता है, पर उसे ढूंढने का जिम्मा भी राज्य सरकार और उसकी पुलिस नहीं उठा रही,

आज सारठ प्रखण्ड के ग्राम बलवा के पारा शिक्षक राजेन्द्र यादव की मौत इलाज के दौरान पटना में हो गई। राजेन्द्र यादव पिछले कई दिनों से गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, आज उनकी जीवन लीला ही समाप्त हो गई। अकेले राजेन्द्र यादव ही नहीं बल्कि अब तक दर्जनों पारा शिक्षकों की मौत हो गई, एक पारा शिक्षक लापता है, पर उसे ढूंढने का जिम्मा भी राज्य सरकार और उसकी पुलिस नहीं उठा रही, शायद उसे लगता है कि अच्छा हुआ, रघुवर सरकार से टकरायेगा तो यहीं न होगा, किसने कहा था, सरकार से टकराने को, अब सरकार से टकराया तो लो जीवन और मौत में से किसी एक को चुनो, हम तुम्हें जीने नहीं देंगे और मौत के सिवा दुसरा तुम्हारे पास विकल्प नहीं।

अगर सरकार ऐसी हठधर्मी है, अगर सरकार ऐसी क्रूर है, जो अपने ही राज्य में कार्यरत पारा शिक्षकों के जीवन से खेल रही है, तो उसे सरकार कभी नहीं कहा जा सकता, उसे हत्यारी सरकार ही कहा जायेगा। पन्द्रह नवम्बर को जिस प्रकार से मुख्यमंत्री रघुवर दास को खुश करने के लिए पारा टीचरों और पत्रकारों पर स्थानीय पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाई। शुक्र है, एक दो पत्रकारों को ही गंभीर चोटें आई और वे अपने घर पर व्यक्तिगत इलाज करवा रहे है, क्योंकि वे जानते है कि रघुवर सरकार में न तो सरकार और उनके तंत्र उसकी मदद करेंगे और न ही सरकार की जी-हुजूरी में लगा, वो चैनल जिसमें वह काम कर रहा है।

इधर पूरे राज्य में स्थिति भयावह है, पारा शिक्षकों के हड़ताल से पूरी तरह शिक्षा व्यवस्था चौपट है, बच्चे शिक्षा से वंचित है, पारा टीचर एक-एक कर मर रहे हैं, पर सरकार को उससे कोई मतलब नहीं, क्योंकि इन विद्यालयों में मुख्यमंत्री, मंत्री, आइएएस या आइपीएस का बच्चा नहीं पढ़ता, पढ़ता तो सामान्य व्यक्ति अथवा दरिद्र का बच्चा है, जो बीपीएल का शिकार है।

पारा टीचरों की इस दुर्दशा को लेकर सदन में भी विपक्ष ने आवाजें उठाई पर देश में रघुवर दास तो अकेले मुख्यमंत्री है, जो क्रूरता का एक रिकार्ड बनाने में लगे है, स्थिति अगर ऐसी रही तो आनेवाले समय में पीएम नरेन्द्र मोदी भी झारखण्ड की सभी लोकसभा सीट से अपना बोरिया-बिस्तर बांधने को तैयार रहे।

याद रखिये, रघुवर दास, दुनिया में आप अकेले शासक नहीं, जो क्रूरता की सारी सीमाएं लांघ रहे हैं, आप जैसे अनेक शासक हुए, जिन्होंने क्रूरता की सीमाएं लांघी और आज वे कहां हैं, किस स्थिति में हैं, कितने लोग उन्हें जानते हैं, शायद आपको पता नहीं, और अगर जानते भी हैं तो आप उसे नजरंदाज करने की कोशिश कर रहे हैं, जो आपके लिए और आपकी पार्टी की सेहत के लिए ठीक तो नहीं ही कहा जा सकता।

Krishna Bihari Mishra

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