अपराध

अपहृत जवानों का अब तक नहीं मिला सुराग, खूंटी में तनाव, लाठी चार्ज, एक की मौत

आज अहले सुबह पत्थलगड़ी समर्थकों द्वारा अपहृत तीन जवानों को मुक्त कराने के लिए पुलिस ने खूंटी के गांवों में विशेष अभियान प्रारंभ किया। जिसका ग्रामीणों ने अपने ढंग से जोरदार विरोध किया, अपने पारंपरिक हथियारों से लैस और ईट पत्थरों से ग्रामीणों ने तलाशी अभियान में निकले पुलिस बल पर हमला किया, जिसके कारण पुलिस को लाठी चार्ज करनी पड़ी, जिसमें एक ग्रामीण की मौत हो गई। उक्त मृत ग्रामीण के बारे में अभी कुछ भी पता नहीं चल सका है।

इस दौरान तलाशी अभियान का विरोध कर रहे गांव के करीब दो सौ से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, उनके हाथों को पीछे से बांधकर, उन्हें कैंप जेल लाया गया, फिर सायं समय, उनमें से कुछ को छोड़कर सभी को छोड़ दिया गया।

इसी दौरान कई पत्रकारों ने ग्रामीणों से सवाल दागने शुरु कर दिये, ये सवाल बता रहे थे कि ये पत्रकार के सवाल नहीं, बल्कि पुलिस या सरकार द्वारा दागे जा रहे सवाल हैं, जिसे कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता, हालांकि पुलिस द्वारा पिटाई खाये तथा दोनों ओर से दहशत में रह रहे इन ग्रामीणों ने अपनी क्षमता के अनुसार जवाब दिये। मीडियाकर्मियों द्वारा अगर इस प्रकार की पत्रकारिता होती रही, तो आनेवाले समय में इन इलाकों में इस प्रकार के सवाल, पत्रकारों के लिए भी ये खतरे की घंटी के संकेत है।

दुसरी ओर, सांसद कड़िया मुंडा कल की घटना से आहत हैं, वे साफ कहते हैं कि पत्थलगड़ी में लगे लोग पुलिस प्रशासन को ध्वस्त कर, अपना साम्राज्य स्थापित करना चाहते हैं, जिसे किसी भी प्रकार से सही नहीं ठहराया जा सकता। उधर कल रात भर न तो ग्रामीण सोए और न ही पुलिस के जवान सो सकें, दोनों पक्षों से बातचीत का दौर भी चलता रहा, लेकिन जब मामला हल होता नहीं दिखा तो अहले सुबह पुलिस ने अपनी ओर से कार्रवाई प्रारम्भ कर दी।

इधर अपहृत तीनों पुलिसकर्मियों लातेहार के महुआडाड़ निवासी सुबोध कुजूर, विनोद केरकेट्टा और सुयोन सुरीन को मुक्त कराने के लिए वरीय पुलिस अधिकारियों का दल जोर-शोर से लग चुका है, हर प्रकार के प्रयास तेज कर दिये गये हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों को कानून का सम्मान करना ही होगा, और वे कानून का राज स्थापित करके रहेंगे।

पुलिस पदाधिकारियों का दल कह रहा है कि पत्थलगड़ी समर्थकों को अपहृत जवानों को छोड़ देना चाहिए और दुष्कर्मियों के आरोपियों को पुलिस के हवाले कर देना चाहिए, नहीं तो पुलिस किसी भी हालात में दुष्कर्मियों और इस कांड में संलिप्त लोगों को छोड़ने नहीं जा रही हैं, क्योंकि उनका अंतिम लक्ष्य यहां कानून का राज स्थापित करना हो गया है।

हालांकि अब तक अपहृत जवानों का कोई सुराग पुलिस पदाधिकारियों को नहीं लगा है, खूंटी की जो स्थिति हैं वह सामान्य नहीं, एक ओर नक्सल प्रभावित इलाका, दूसरी ओर पत्थलगड़ी के प्रति ग्रामीणों का आकर्षण, पुलिस के प्रति लोगों की नाराजगी, माहौल को और संशय में ला खड़ा कर रहा है, हालांकि वरीय पुलिस पदाधिकारी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं, पर उन्हें सफलता कब मिलेगी? ये सवाल भी अब गंभीर होता जा रहा है, क्योंकि यहां वो लोकोक्ति सिद्ध होने जा रही हैं, “आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास”, यानी आये थे दुष्कर्मियों को गिरफ्तार करने के लिए, और लग गये अपने अपहृत जवानों को ढूंढने में। सचमुच स्थिति बहुत गंभीर हैं।