अरे नफरत फैलानेवालों ‘जी बिहार-झारखण्ड’ आखिर बिहार के बारे में केजरीवाल ने क्या गलत कहा?

सबसे पहला सवाल ‘जी बिहार-झारखण्ड’ वालों से क्या अरविन्द केजरीवाल देश के सभी राज्यों का अकेला मुख्यमंत्री है? क्या उसने सभी देश के सभी राज्यों के नागरिकों के स्वास्थ्य ठेका ले रखा है? क्या देश के सभी राज्यों के नागरिकों ने उसे मुख्यमंत्री बनाया है? और जब ऐसा नहीं हैं तो फिर अरविन्द केजरीवाल ने गलत क्या कहा?

सबसे पहला सवाल ‘जी बिहार-झारखण्ड’ वालों से क्या अरविन्द केजरीवाल देश के सभी राज्यों का अकेला मुख्यमंत्री है? क्या उसने सभी देश के सभी राज्यों के नागरिकों के स्वास्थ्य ठेका ले रखा है? क्या देश के सभी राज्यों के नागरिकों ने उसे मुख्यमंत्री बनाया है? और जब ऐसा नहीं हैं तो फिर अरविन्द केजरीवाल ने गलत क्या कहा?

आखिर देश के अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री जिन्होंने लंबे समय तक अपने राज्यों में मुख्यमंत्री बने रहे, उन्होंने अपने राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए क्या किया? क्या वे यह सोच रहे थे कि जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल होंगे तब उनके यहां के नागरिक दिल्ली जाकर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेंगे? अगर इस तरह की घटिया सोच किसी राज्य के मुख्यमंत्री की हैं तो  इसे आप क्या कहेंगे, देश सेवा, राज्य सेवा या बेशर्मी।

अरविन्द केजरीवाल को तो इस बात की दाद देनी चाहिए कि उसने ऐसी स्वास्थ्य सुविधा अपने दिल्ली के नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई कि अब उसका लाभ दूसरे राज्यों के नागरिक भी ले रहे हैं, ऐसे भी अरविन्द केजरीवाल का बयान आप देंखे तो उस बयान से कही यह नहीं लग रहा कि वे बिहार के नागरिकों को नीचा देख रहे हैं या नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्होंने तो खुशी जाहिर की, उनके राज्य में अब दूसरे राज्यों के लोग आकर स्वास्थ्य सेवा का लाभ ले रहे हैं, यानी अब अपनी शुद्ध भावनाओं को प्रकट करना भी गुनाह हो गया, हाय रे बेशर्म जी-बिहार झारखण्ड के लोगों।

उन्होंने तो अपने बयान में यह कहा कि “बिहार के लोग 500 रुपये का टिकट कटाकर दिल्ली आते हैं और पांच लाख का इलाज फ्री में कराकर चले जाते हैं, उन्हें यह जानकर खुशी भी होती है कि उनके यहां लोग बाहर से आकर इलाज करा रहे हैं, पर दिल्ली की भी एक क्षमता हैं, पूरे देश का इलाज दिल्ली में कैसे होगा? आज पूरे देश में जैसी दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हैं, वैसी सुविधा कहीं नहीं हैं।” बात तो सही है।

अरे भाई, मुख्यमंत्री तो बिहार में भी हैं, अपने को सुशासन बाबू कहलाना पसन्द करते हैं। अरे भाई मुख्यमंत्री तो हमारे झारखण्ड में भी है, जो हाथी उड़ाता है, पर  इन दोनों राज्यों के नागरिकों को क्या वैसी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं, जो दिल्ली के नागरिकों को मिल रही हैं, आखिर इनका कोई कर्तव्य अपने नागरिकों के लिए हैं या नहीं।

आज भी देखिये, जिनके पास थोड़ा सा भी पैसा हैं, वह आंख के लिए शंकर नेत्रालय चेन्नई तथा अन्य इलाजों के लिए क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर भागता है आखिर पटना या रांची का रुख क्यों नही करता। हाल ही में बंगाल ने भी झारखण्ड के नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधा देने से इनकार किया था, उसके मूल में भी था कि बंगाल में भी कम से कम इन दोनों राज्यो से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा तो उपलब्ध है ही।

आजकल फैशन हो गया। ज्यादातर पत्रकार, जिनको पत्रकारिता का सही ज्ञान नहीं हैं, वे सिर्फ गलत खबरों को प्रमुखता देकर, किसी को भी जलील करने की प्रवृत्ति को ही पत्रकारिता समझ समाचार परोस देते हैं, जबकि होना यह चाहिए कि कोई मुख्यमंत्री कहना क्या चाहता हैं, उन बातों को जनता के समक्ष रखे,पर देख रहा हूं जी, बिहार-झारखण्ड ने बिहार के नागरिकों के दिलों में अरविन्द केजरीवाल के प्रति नफरत बोने का काम किया, जिसकी जितनी निन्दा की जाय कम हैं, आखिर बेशर्मी की भी कोई हद होती है।

ऐसे भी सारा देश जान रहा है, कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो काम अरविन्द केजरीवाल ने किया, वो किसी मुख्यमंत्री ने किया और आनेवाले समय में भले ही दिल्ली की लोकसभा की सातों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की हो, दिल्ली विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक सीट आम आदमी पार्टी ही जीतेगी और मुख्यमंत्री फिर अरविन्द केजरीवाल ही होंगे, चाहे जी बिहार-झारखण्ड भाजपा की गोदी में बैठकर, कितना भी रसगुल्ला क्यों न खा लें?

Krishna Bihari Mishra

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