राजनीति

CM रघुवर की बड़ी उपलब्धि झारखण्ड की पहचान गाली-गलौज से करा दी – हेमन्त सोरेन

नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन रघुवर सरकार के क्रियाकलापों से बहुत दुखी है। वे राज्य में पूरी तरह फेल हो गई सिस्टम के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास को जिम्मेदार ठहराते है। वे कहते है कि इस सरकार के पास न तो विजन हैं और न कार्य करने की क्षमता, ऐसे में पूरे राज्य की छवि पर एक गहरा दाग मुख्यमंत्री रघुवर दास ने लगा दी है। दुर्भाग्य इस बात की है कि आज यह राज्य पूरे देश में गाली-गलौज वाले राज्य के रुप में जाना जाने लगा है, जिसके लिए अगर कोई दोषी हैं तो यहां की रघुवर सरकार है। पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन से राज्य की वर्तमान हालात पर बात किया www.vidrohi24.com ने। प्रस्तुत हैं, उसके मुख्य अंश।

विद्रोही 24.कॉम – जब सदन में मुख्यमंत्री स्वयं विपक्षी दलों के नेताओँ के साथ गाली गलौज पर उतर आये, तब ऐसे में राज्य की क्या स्थिति होगी, विपक्ष की भूमिका क्या होगी?  किस ओर जा रहा हैं झारखण्ड?

हेमन्त सोरेनसदन में जिस प्रकार से मुख्यमंत्री रघुवर दास ने विपक्षी नेताओं को गाली से संबोधित किया, उसी से पता चल गया है कि हमारे राज्य की पहचान, इन्होंने कैसी बनायी है? आज पूरे देश में ज्यादातर लोगों के पास स्मार्टफोन है, और लोग सीएम के सदन में दिये गये बयान को देख रहे हैं, सुन रहे हैं, इसी से समझ लीजिये कि इन्होंने राज्य की क्या पहचान बनायी है? आज हमारे राज्य की पहचान गाली-गलौज से है। किसको नहीं पता कि यहां सीएम रघुवर दास के पास, इन्हीं के कार्यकर्ता या राज्य के किसान-मजदूर अपनी समस्याओं को लेकर जाते हैं, तब सीएम रघुवर दास का व्यवहार इनके प्रति ठीक नहीं होता।

विद्रोही 24. कॉम – मुख्यमंत्री रघुवर दास से आपने सदन में कहा था कि आप उनसे इस गाली-गलौज के मुद्दे पर माफी मांगने को नहीं कहेंगे, आखिर ऐसा क्यों?

हेमन्त सोरेन – क्योंकि मैं मुख्यमंत्री रघुवर दास के स्वभाव को जानता हूं। बहुत सारे लोग हैं, जिनसे भूलवश बहुत सारी गलतियां हो जाती हैं, ये मानव स्वभाव है, पर जो लोग क्षमा की महत्ता को समझते हैं, वे तुरंत माफी मांग लेते हैं, पर इन्हें क्षमा की महत्ता और अपनी गलतियों का ऐहसास हो तब न। इन्हें तो अपनी गलतियों का एहसास नहीं होता, ये अपने स्वभाव और हठधर्मिता से सदन को भी प्रभावित करते है, जैसा पिछले दिन सदन में देखने को मिला। इनसे आप माफी की उम्मीद कर ही नहीं सकते।

विद्रोही 24.कॉम – मोमेंटम झारखण्ड और झारखण्ड माइनिंग शो राज्य सरकार ने करवायें, इसका फायदा झारखण्ड को मिला?

हेमन्त सोरेन – जरा पूछिये सरकार से, कि उन्होंने कितने रुपये का निवेश कराया झारखण्ड में इसके माध्यम से और कैसे जनता की आंखों में धूल झोंका? राज्य सरकार तो व्यापारियों की तरह आचरण कर रही है। सरकार का काम व्यापारियों की तरह आचरण करना नहीं। हमारे शासन काल का ही प्रभाव था कि 2015 में झारखण्ड, व्यापार सुगमता सूचकांक में तीसरे स्थान पर पहुंच गया और इसका श्रेय लेने की झूठी कोशिश सीएम रघुवर दास ने की, जबकि सच्चाई यह है कि इनके आते ही तीसरे स्थान पर रहनेवाला झारखण्ड पहले तो सातवे स्थान और अब 12 वें स्थान पर धड़ाम से आकर गिर गया।

विद्रोही 24. कॉम – राज्य सरकार कहती है कि राज्य में विकास बहुत तेजी से हुआ है,  आप इससे सहमत है?

हेमन्त सोरेन – राज्य में रोजगार नहीं, लोग पलायन कर रहे है। किसान आत्महत्या कर रहे है। लोग भूख से मर रहे है, लोगों को वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल रहा, छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही, लोगों को अनाज नहीं मिल रहा, लोगों से जमीने छीनी जा रही है, अगर ये विकास हैं, तो यह विकास रघुवर सरकार को मुबारक।

विद्रोही 24. कॉम – रघुवर सरकार का कहना है कि उन्होंने सिस्टम को सुधारने पर विशेष ध्यान दिया, जिसके कारण लोगों को परेशानी नहीं उठानी पड़ रही हैं।

हेमन्त सोरेन – सच्चाई यह है कि सरकार के हाथों से प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह निकल चुकी है, पूरे राज्य में सिस्टम फेल है। जब मुख्यमंत्री को राजधानी रांची की ट्रैफिक संभालने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ जाये, जब सीएम को नगर निगम में बैठक करनी पड़ जाये, तो समझने की कोशिश करिये यहां सिस्टम फेल नहीं, डिरेल्ड हो चुका है।

विद्रोही 24. कॉम – इसके कारण क्या है?

हेमन्त सोरेन – विजन का अभाव, कॉपी पेस्ट सिस्टम की शुरुआत, बोली पर लगाम नहीं, ये बहुत सारे कारण है।

विद्रोही 24. कॉम – कौन दोषी है, इसके लिए, क्योंकि इसमें कुछ तो केन्द्र से भी संबंधित है, कुछ दिन पहले सीएम ने कहा था कि रघुकुल रीति सदा चलि आई, क्या सचमुच इस श्रीरामचरितमानस की चौपाई का अर्थ यहां दिखाई दे रहा है?

हेमन्त सोरेन – पीएम हो या सीएम, सभी एक ही थाली के चट्टे-बट्टे है। कौन क्या बोलता है? कहां बोलता है? समझ ही नहीं आता। आज ही अखबारों में पढ़ने को मिला, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कह दिया कि वे रांची को टोक्यो की सिस्टर सिटी बनायेंगे, हद हो गई, सचमुच हमारा मुख्यमंत्री अलबेला मुख्यमंत्री हैं,  केवल ये लोग बोलता है, काम-धाम कुछ नहीं, जरा पूछिये इस सरकार से कि मेट्रो रेल, मोनो रेल का क्या हुआ? हर गांव में बिजली देने की योजना का क्या हुआ? यानी पूरे राज्य को मजाक बना दिया है इन्होंने।

विद्रोही 24. कॉम – जब सरकार कुछ काम नहीं कर रही, तब आप क्या कर रहे हैं?

हेमन्त सोरेन – हमने कार्यक्रम प्रारंभ किया है, झारखण्ड के एक-एक गांव को जगा रहे हैं। अपना कार्यक्रम हमने चलाया है – चलो गांव की ओर, खोले सरकार की पोल। तीन-चार महीने से गांव- गांव जा रहे है और अपने कार्यकर्ताओं को संगठित कर रहे हैं, तथा उन्हें बता रहे हैं कि हमें करना क्या है?  इस कार्यक्रम में, मैं खुद भाग ले रहा हूं। अब तक आधे से अधिक गांवों तक पहुंचा हूं, सभी लोकसभा और 81 विधानसभाओं में पार्टी की राजनीतिक कद बढ़ानी है।

विद्रोही 24. कॉम – क्या आप आनेवाले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में गठबंधन करेंगे?

हेमन्त सोरेन – हमें अपनी राजनीति, अपनी बदौलत करनी है। झारखण्ड को झामुमो ने बनाया तो उसे सुसज्जित करने की जिम्मेदारी भी हमारी है, इसके लिए हम हर विधानसभा सीट पर अपनी स्थिति मजबूत करने की ठानी है, गठबंधन होगा या नहीं होगा तो ये तो भविष्य की बात है, फिलहाल हम अपना होमवर्क कर रहे हैं।

विद्रोही 24. कॉम – क्या आपको लगता है कि राज्य में जो चैनल या अखबार चल रहे हैं, वे अपने पत्रकारिता धर्म का निर्वहण कर रहे हैं?

हेमन्त सोरेन – अखबार हो या चैनल, सबका हश्र सामने है। कई पत्रकार आते हैं, इंटरव्यू लेते है, पर वह इंटरव्यू छपता ही नहीं हैं, आश्चर्य हमें यहीं लगता है कि ऐसा क्यों? मेरे लिये यहीं बड़ा सवाल है, कारण नहीं जानता। फिर भी हमने जानने की कोशिश की, तो पता चला कि इसका मुख्य कारण पूर्णतः व्यवसायीकरण हैं और जब व्यवसायीकरण होगा तो विपक्ष को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी, जो यहां दीख रहा है, ये अखबारों और चैनलों में जो टर्नओवर का मामला है, ये पत्रकारिता को अपने आगोश में ले चुका है, जिसके कारण समस्याएं है।

विद्रोही 24. कॉम – आपके नेता सायमन मरांडी ने वहीं किया है, जो कांग्रेस के लिए गुजरात में मणिशंकर अय्यर ने किया  है, इससे झामुमो को नुकसान नहीं होगा?

हेमन्त सोरेन – कोई नुकसान नहीं होने जा रहा। जनता भाजपा के इस हरकत को खूब जानती है। जहां ये घटना घटी, वहां के लोग भी जानते है कि इस घटना को क्यों और कैसे सुनियोजित ढंग से फैलाया गया? कमाल की घटना हैं, जब  2014 में सायमन मरांडी भाजपा में थे, और यहीं कार्यक्रम उन्होंने उस पार्टी में रहकर कराया, पीएम नरेन्द्र मोदी का फोटो पंपलेट में छापकर बंटवाया तो ठीक था और झामुमो में रहकर उन्होंने ऐसा किया तो गलत हो गया। दरअसल भाजपा ने एक षड्यंत्रकारी विभाग बनाया है, जिसमें कई लोगों को पैसा देकर रखा गया है, जिनका काम है इन सारी षड्यंत्रकारी चीजों को बढ़ावा देना, ये उन्हीं के दिमाग की उपज है। हम आपको बता दे कि

उस वक्त ये अखबार में भी छपी थी, पर इस बार चूंकि अब सायमन मरांडी झामुमो में हैं, तो उन्हें बदनाम कर दो, झामुमो को बदनाम कर दो। भाजपा जान लें कि झामुमो के पास उसके हर गलत कार्यों का जवाब है, पर भाजपा जो हरकत अपनाती है, वह झामुमो नहीं कर सकता, क्योंकि हमारे लिए राज्य सर्वोपरि हैं, यहां की जनता सर्वोपरि हैं। हम मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा के लोगों को बता देना चाहते है कि झामुमो ग्राउंड की पार्टी हैं, हम जमीन पर हैं, और जमीन पर रहकर हवा में बातें नहीं करते।