हेमन्त ने रघुवर को चेताया, ऐसा महाभारत होगा, जैसा पहले कभी नहीं हुआ

प्रशासनिक अराजकता, अनियंत्रित कानून व्यवस्था, महंगे आयोजनों की भव्यता, राजनीतिक निर्लज्जता, विकास शून्यता, अंधी अडानी निष्ठा, बेटियों एवं महिलाओं की असुरक्षा, गरीबों एवं किसानों की उपेक्षा, निर्दोष मूलवासियों एवं आदिवासियों की पुलिस द्वारा हत्या तथा गाली-गलौज को संसदीय भाषा का दर्जा रघुवर दास के तीन वर्षों में अराजक शासन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं।

प्रशासनिक अराजकता, अनियंत्रित कानून व्यवस्था, महंगे आयोजनों की भव्यता, राजनीतिक निर्लज्जता, विकास शून्यता, अंधी अडानी निष्ठा, बेटियों एवं महिलाओं की असुरक्षा, गरीबों एवं किसानों की उपेक्षा, निर्दोष मूलवासियों एवं आदिवासियों की पुलिस द्वारा हत्या तथा गाली-गलौज को संसदीय भाषा का दर्जा रघुवर दास के तीन वर्षों में अराजक शासन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं। इन बड़ी उपलब्धियों के लिए यानी विज्ञापन में हीरो और धरातल पर जीरो, पोस्टर ब्वॉय मुख्यमंत्री रघुवर दास को वे हृदय से बधाई देते हैं।

हेमन्त सोरेन ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अपराधी बेखौफ, दिन-दहाड़े हत्या, लूट एवं बलात्कार की घटना को अंजाम देता रहा और पुलिस फर्जी मुठभेड़ में निर्दोषों की हत्या करती रही। बकोरिया मे 12 निर्दोषों एवं ढोलकट्टा में मोतीलाल बास्के की नक्सली के नाम पर हत्या इसके चंद उदाहरण है। पुलिस अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासियों, मूलवासियों, अल्पसंख्यकों एवं दलितों की लाशें गिराती रही, किसान आत्महत्या करता रहा, विकास के नाम पर लूट चलती रही, वहीं दूसरी ओर निवेश के नाम पर झारखण्ड के बहुराष्ट्रीय मुख्यमंत्री विदेशों की सैर करते रहे, लास वेगास में आनन्द लेते रहे, तथा सरकार अपने शासन के पखवाड़े, महीने और सालगिरह मनाने में मस्त रही।

उन्होंने कहा कि मोमेंटम झारखण्ड अरबों रुपये के घोटाले की एक शर्मनाक दास्तान है। दो दिन में अतिथियों ने एक करोड़ 76 लाख के खाने खा गये, करोड़ों के चॉकलेट व उपहार बांट दिये गये। 2 लाख के बैलून उड़ा दिये गये। बिना यात्रियों के चार्टड विमान उड़ा दिये गये। तीन करोड़ रुपये सिर्फ प्रेस रिलीज बनाने के लिए चुनिन्दा व्यक्ति को दे दिया गया। 40 करोड़ रुपये टीवी एवं अखबारों को सिर्फ मुख्यमंत्री का चेहरा दिखाने के लिए दे दिया गया और इधर किसान आत्महत्या करता रहा, गरीब भूख से मरता रहा, इसी अवधि में टाटा पॉवर एवं रिलायन्स पावर जैसी कंपनियां कारोबार छोड़कर जाने की तैयारी में हैं। अभी कुछ ही दिन पहले अखबारों में हैदराबाद की जियोमैक्स कंपनी के चेयरमैन के हवाले से खबर छपी थी कि उनके साथ हो रही मार-पीट, नहीं मिल रही सुरक्षा, दादागिरी होगी तो कैसे करेंगे निवेश, सुरक्षा का भरोसा दिया, अब हमला हो रहा, यह राज्य के कानून व्यवस्था की बदतर हो चली स्थिति का एक नमूना मात्र है।

हेमन्त सोरेन ने कहा कि सरकार में ही शामिल मंत्री बोलते हैं कि राज्य में मंत्री और नौकरशाह विकास का कंबल ओढ़कर भ्रष्टाचार का घी पी रहे हैं। वे मंत्री है, इसलिए संयमित भाषा बोल रहे हैं। मोमेंटम झारखण्ड के नाम पर हुई फिजुलखर्ची तथा खान-विभाग का कारनामा कहता है कि अब तो ये कंबल फेंककर बीच सड़क पर भ्रष्टाचार का घी पी रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने सरकार के दो साल पूरे होने पर ही कहा था, इस सरकार का जन्म राजनीतिक भ्रष्टाचार की कोख से हुआ है। आज सरकार के तीन साल पूरे हो गये, पर सरकार अभी तक पूर्ण मंत्रिपरिषद नहीं बना पाई, क्या यह संविधान की अवमानना नहीं है?

हेमन्त सोरेन ने खान विभाग में हो रही गड़बड़ियों और राजस्व में हो रही कमी का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि इन्हीं की सरकार केन्द्र में चल रही है, जहां का नीति आयोग शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जो शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि जो सरकार व्यापार सुगमता सूचकांक की बात कह रहीं है, उसी व्यापार सुगमता सूचकांक में आज झारखण्ड तीन से लूढ़क कर 12वें स्थान पर चला आया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरे शासनतंत्र को व्यापारिक प्रतिष्ठान में बदल दिया है। सरकार अब शराब बेच रही है, शॉपिंग मॉल बनाती है, जमीनों की खरीद-बिक्री की दलाली करती है, कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन करती है। मूलवासी एवं आदिवासी के जमीनों पर कब्जा करने के लिए कानून में संशोधन करती है। विरोध करने पर उन पर जूल्म ढाती हैं, उन पर केस करती हैं, और जेल में डाल देती हैं। ये बातें तो आदिवासियों और किसानों की करते हैं पर काम अडानी का करते हैं।

उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर बिजली के खंभों पर सीएम रघुवर दास का फोटो लगा बैनर दिखाई पड़ता है, पर बिजली नहीं मिलती और न ही गंदी नालियों के बदबूओं से मुक्ति। उन्होंने कहा कि तीन सालों में इस सरकार ने मोमेंटम झारखण्ड घोटाला, जमीन घोटाला, खनन घोटाला, प्रधानमंत्री आवास योजना घोटाला तथा सबसे शर्मनाक टेंट घोटाला किया हैं। उन्होंने कहा कि यहां किसी कानून व नियम का पालन नहीं हो रहा, मुख्यमंत्री जमीदारों एवं महाजनों की तरह बर्ताव कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि झामुमो, मुख्यमंत्री को बताना चाहता है कि सिर्फ पांच गांव के लिए महाभारत हुआ था, लेकिन मुख्यमंत्री ने झारखण्ड के जल, जंगल, जमीन और झारखण्डियों को ही नीलाम कर दिया है। झारखण्ड के इतिहास में सहनशीलता, झारखण्डियों का संस्कार है, लेकिन संघर्ष हमारी विरासत है। अभी उनकी पार्टी इस लूटतंत्र का शांतिपूर्वक विरोध कर रहा है, लेकिन यदि आदिवासियों एवं मूलवासियों की जमीन एवं अधिकार हड़पने की साजिश मुख्यमंत्री ने जारी रखी तो हमारे तरकश के तीर सोये नहीं रहेंगे, ऐसा महाभारत होगा, जैसा पहले कभी नहीं होगा।

हेमन्त सोरेन ने कहा कि दुर्भाग्य है कि झारखण्ड में मंत्री नौकरशाह हो गये हैं और नौकरशाह सियासी पॉलिटिशियन हो गये हैं। राज्य में आयोजित बजट पूर्व संगोष्ठियों में सांसदों एवं विधायकों को अपनी बात रखने की इजाजत नहीं होती है, इन मंचों से नौकरशाह जनता से संवाद करते हैं, और ये सब मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होता है। क्या यहीं लोकतंत्र है? उन्होंने कहा कि नौकरशाह हेलिकॉप्टर में लदकर जाते हैं और मंत्री, सांसद, विधायक को सड़क मार्ग से जाने के लिए कहा जाता हैं। राज्य के वरीय पुलिस पदाधिकारी राज्य सभा चुनाव में सत्तारुढ़ दल के लिए वोट की व्यवस्था करते हैं। राज्यसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने अनुराग गुप्ता और मुख्यमंत्री के सलाहकार अजय कुमार को राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए तथा विधायकों को धमकाने के लिए दोषी पाया हैं। चुनाव आयोग ने इनके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा, स्मार पत्र भी भेजा, लेकिन आज तक इनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई?

उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले सरकार ने अगले तीन वर्ष का विजन डाक्यूमेंट जारी किया, जब सरकार ने विजन डाक्यूमेंट बना ही लिया और उसी आधार पर अपना बजट भी बनायेगी, तो फिर ये बजट पूर्व संगोष्ठी के ड्रामे का क्या मतलब? हेमन्त सोरेन ने कहा कि सरायकेला में आयोजित संगोष्ठी में एक आम नागरिक ने कहा कि जनसंवाद के नाम पर, राज्य के आला अधिकारियों के नाम पर पैसों की उगाही की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने आदेश दिया, उसका माइक छीनो और बैठाओ। जब आप जनता की बात ही नहीं सुनना चाहते हैं तो ऐसी संगोष्ठी करते ही क्यों हैं? इसलिए झामुमो इस सरकार को सरकार नहीं, सर्कस कहती हैं।

Krishna Bihari Mishra

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