वे जीते नहीं, आप हारे, क्योंकि आप जहां एक होकर लड़े, वहां झंडा गाड़ा और जहां बिखड़े, साफ हो गये

ऐसा नहीं कि 2019 में मोदी लहर थी, अंडर करंट था, और मोदी ने भारी सफलता अर्जित कर ली, अगर ऐसा था तो केरल, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना आदि राज्यों में मोदी ने क्यों नहीं बाजी मार ली? आपके बगल में ही पड़ोस के राज्य ओड़िशा में नवीन पटनायक ने दुबारा सत्ता कैसे हासिल कर लिया? कल तक एनडीए में रहनेवाले चंद्रबाबू नायडू जब एनडीए छोड़कर अलग हुए,

ऐसा नहीं कि 2019 में मोदी लहर थी, अंडर करंट था, और मोदी ने भारी सफलता अर्जित कर ली, अगर ऐसा था तो केरल, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना आदि राज्यों में मोदी ने क्यों नहीं बाजी मार ली? आपके बगल में ही पड़ोस के राज्य ओड़िशा में नवीन पटनायक ने दुबारा सत्ता कैसे हासिल कर लिया? कल तक एनडीए में रहनेवाले चंद्रबाबू नायडू जब एनडीए छोड़कर अलग हुए, फिर भी आंध्र प्रदेश की जनता ने उन्हें क्यों नहीं स्वीकारा और उन्हें दंडित क्यों किया?  

जरा इन विषयों पर ध्यान दीजिये, चिन्तन करिये, सब पता चल जायेगा, अभी पांच-छः महीने बाद फिर झारखण्ड मे विधानसभा चुनाव हैं, और आप इस लोकसभा के हार से अपने होशो-हवाश खो देंगे तो भाजपा को क्या हैं? वह फिर सत्ता हासिल कर लेगी और आप झाल बजाते रह जायेंगे।

भाजपा के जीतने के कारण सिर्फ तीन है। भाजपा गठबंधन में टीम भावना का होना, सत्ता के बल पर साम-दाम-दंड-भेद के सहारे भारत की सारी मीडिया (अखबार/चैनल/पोर्टल/पत्र-पत्रिकाओं) को अपनी स्तुति करा देने पर मजबूर कर देना (ये अलग बात है कि इस मोदी भक्ति के युग में भी कई पत्रकारों ने खुद को बिकने से इनकार किया) तथा चुनाव आयोग को पूरी तरह से अपनी मुट्ठी में कर लेना। ठीक उसी प्रकार आपके हारने के भी कई कारण है।

आपने महागठबंधन तो बना लिया, आपने बैठकें भी खूब की, पर जमीनी स्तर पर एक दूसरे के पैंट उतारने में ज्यादा लगे रहे, एक दूसरे को नंगा करने में ज्यादा दिमाग लगाया, जबकि आपने अपने दुश्मन को नहीं देखा कि वह कितनी चालाकी से आपकी घेराबंदी कर रहा हैं, आपको तोड़ रहा हैं, आपकी सारी गलतियों पर उसने नजर रखकर, विभिन्न प्रकार से आपको बर्बाद करने के लिए हर प्रकार के हथकंडे (वह भी निचले स्तर तक का) अपना रहा है।

अब जरा खुद बताइये, जहां की जनता अपने सांसदों के खिलाफ सड़कों पर उतर रही हैं, पलामू चतरा याद हैं न। जहां की जनता मुख्यमंत्री तक का विरोध करती है, कांके की घटना याद है न। अचानक क्या हो गया कि यहां की जनता उसे 12 सीटें थमा दी, क्या अचानक जनता को संजीवनी दे गई, कि उसके सारे कष्ट हर लिये गये। नहीं, ये सारी जनता वर्तमान केन्द्र व राज्य सरकार की चालाकी की शिकार हो गई, और ये चालाकी की शिकार केवल जनता ही नहीं होती, वे सभी होते हैं, जो अभावों में जीने को मजबूर होते हैं।

भला, क्या राज्य की जनता वो घटना भूल गई,  जिसमें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक पीड़ित बाप को भरी सभा में जलील कर दिया था, उस बाप को जिसकी बेटी के साथ रेप किया गया, उसे जिंदा जला दिया गया था, इससे बड़ी हृदय विदारक घटना किसी जनता के लिए और क्या हो सकती है? जरा दिमाग पर जोर डालियेगा। अरे, आपने धूर्तों को धूर्तइ से जवाब ही नहीं दिया।

जबकि संस्कृत साहित्य में एक उक्ति है – शठे शाठयम् समाचरेत्। वो आपको हर प्रकार से नंगा कर रहा था और आप उसको उसी की भाषा में जवाब नहीं दे रहे थे। यहां मेरा कहना कि जैसे वो गाली आपको दे रहा था, आप भी उसको गाली दे, ये नहीं है। मेरा कहना हे कि राज्य के हालात को खराब करने में केन्द्र व राज्य का महत्वपूर्ण योगदान है, पर आपने उनके इस चरित्र को जनता के सामने ठीक से नहीं रखा।

कमाल है, आपने यहां के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ को धूल चटा दिया, आपने हेमलाल मुर्मू जैसे नेता को धूल चटा दिया और बाकी जगहों पर पिद्दियों से हार गये, कारण क्या था, मैं फिर कह रहा हूं कि चिन्तन करिये। क्या ये सही नहीं कि चतरा में महागठबंधन से दो लोग आपस में ही एक दूसरे से भीड़ रहे थे, एक राजद और दूसरे कांग्रेस के उम्मीदवार।

क्या ये सही नहीं कि कोडरमा में राजद के नेताओं ने झाविमो के कद्दावर नेता बाबू लाल मरांडी को हराने में मुख्य भूमिका निभा दी। क्या ये सही नहीं है कि गोड्डा में झाविमो के प्रदीप यादव को हराने में कांग्रेस नेता फुरकान अंसारी का विशेष योगदान रहा, ऐसे हमारे पास कई प्रमाण है, जिससे साफ पता लगता है कि महागठबंधन के नेता भाजपा को कम और अपने ही महागठबंधन के प्रत्याशी को हराने में ज्यादा दिमाग लगा रहे थे।

यहीं नहीं, एक ओर भाजपा अपने सारे प्रत्याशियों को दिमाग लगाकर खड़ा कर रही थी, वो ऐसे लोगों को उम्मीदवार बना रही थी, जो भाजपा के पक्ष में आजीवन रहे तथा आनेवाले समय में अपनी कमजोरी के कारण भाजपा के खिलाफ मुंह नही खोल सकें, उसने बड़ी तेजी से उम्मीदवारों की घोषणा कर दी और आपको उम्मीदवार देने में कई जगहों पर पसीने छूट गये। कमाल है, आपको मौका मिला था, पीएम मोदी और अमित शाह के विजयी घोड़े को रोकने का, पर आप तो आपस में ही लड़ने का रिकार्ड बना रहे थे।

याद रखिये, जो जीतते हैं, उनसे कारण नहीं पूछा जाता, जो हारते हैं, उनसे कारण पूछे जाते हैं, आप हारे नहीं हैं, आप खुद के द्वारा हराये गये हैं, आज से ही प्रण करिये, कि हम भाजपा को धुआं छुड़ायेंगे, देखिये भाजपा का कैसे पसीना छूटता है, वो वर्षों सत्ता में रही, उसने झारखण्ड का कबाड़ा बना दिया, और आप कबाड़ होता झारखण्ड को आराम से टुकुर-टुकुर देख रहे हैं, वो व्यक्ति आपको मूर्ख बनाकर हाथी उड़वा दिया, भारी भरकम हाथी जो ठीक से दौड़ भी नहीं सकता, और आप अपने ही राज्य में मूर्ख बन रहे हैं।

आपके झारखण्ड में बाहर से आये लोग सांसद बन रहे हैं, लोकसभा में भी और राज्यसभा में भी, यहां तो मुख्यमंत्री भी बन जा रहे हैं, और झारखण्ड की किस्मत देखिये यहां के लोग भाजपा नेताओं के चरणोदक पीने में ज्यादा दिमाग लगा रहे हैं और गुलाम बनने में खुद को गौरव महसूस कर रहे हैं, ऐसे में जब तक आप खुद को नहीं पहचानेंगे, अपने गौरवपूर्ण इतिहास पर गर्व करना महसूस नहीं करेंगे, आप झोला ढोते रह जायेंगे, क्योंकि ऐसे भी यहां के सत्ताधीश-मठाधीश और आपके ही इस मिट्टी से जन्मे नेता ने झारखण्ड की बैंड बजाने की एक तरह से कसमें खा ली हैं।

मैं तो कहूंगा कि अभी भी वक्त है, जागिये, स्वामी विवेकानन्द की वह प्रेरणादायी पंक्ति को शिरोधार्य करिये। उठिये, जगिये और जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो, चैन से मत बैठिये। सामने राज्य का मुख्यमंत्री रघुवर दास हैं, जिसने झारखण्ड को बर्बाद करके रख दिया है, आप उसे सत्ता से हटाइये, जनता के अनुकूल इस राज्य में अपना शासन स्थापित कीजिये, यहां के आइएएस और आइपीएस जो भाजपा के कार्यकर्ता के रुप में कार्य कर रहे हैं, उनका एक लिस्ट बनाइये, उन पर विशेष ध्यान दीजिये, और जब सत्ता आये तो उन्हें बढ़िया से बताइये कि एक कार्यकर्ता की क्या भूमिका होती है? अरे देश आपका, राज्य आपका, कब तक सोते रहेंगे, जगिये आप शासन करने के लिए पैदा लिये हो, आपका गौरवपूर्ण इतिहास हैं, लड़ो, संघर्ष करो, विजय पाओ।

याद रखना, आप उस दिन नहीं हारते, जब आपको कोई हरा देता हैं, आप उस दिन हार जाते हो, जिस दिन आप मन से स्वीकार कर लेते हैं, कि आप हार गये। राज्य की जनता, आज भी आपके साथ है, हां चुनाव आयोग आपका साथ नहीं दे सकता, यह ध्रुव सत्य है, क्योंकि मैंने देखा ही नहीं, महसूस किया है, क्योंकि अब वहां कोई टीएन शेषण या केजे राव नहीं बैठा है, हां यहां की मीडिया आपको मदद नहीं करेगी, क्योंकि उसके लिए रुपये ही भगवान है, इसलिए मैं समझ सकता हूं कि आपके पास  कितनी कठिनाइयां हैं, पर ये कठिनाइयां भी आपके लिए उस वक्त मार्ग प्रशस्त करने लगेगी, जब आप निश्चय कर लोगे कि हमें अपने झारखण्ड को, अपने अनुरुप बनाना है।

Krishna Bihari Mishra

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भाई, ये तो मानना ही पड़ेगा कि भारत का मतदाता अब परिपक्व हो गया हैं, पिछले दो बार से वो जिसे भी सत्ता दे रहा हैं, उसे छप्पड़ फाड़कर थमा दे रहा हैं, ताकि आप ये बोल नहीं सके, कि हमें कुछ करने का मौका इसलिए नहीं मिला, क्योंकि हमारे पास बहुमत नहीं था। आपको दो-दो बार स्पष्ट बहुमत थमाया, अब आप के पास झूठ बोलने का कोई स्कोप ही नहीं है।

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