राज्य में अवैध हथियार रखने का गोरखधंधा, SIT गठित कर जांच की मांग, सरकार ने लिया संज्ञान, अधिकारियों को दिये निर्देश

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भाई एक ही घर में पहले नौ-नौ हथियार, और अब छह-छह लाइसेंसी हथियार रखकर भाजपा विधायक कौन सा परमानन्द प्राप्त करते हैं? आखिर यही आनन्द सामान्य व्यक्तियों को क्यों नहीं मिल जाता?  आखिर ऐसा करने में कौन/क्यों अधिकारी या सरकार ऐसे लोगों की मदद करती है, हमें आज तक समझ नहीं आया।

ज्यादा दिनों की बात नहीं है, अगस्त 2020 महीने में धनबाद के सुप्रसिद्ध अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट सोमनाथ चटर्जी ने सूचना के अधिकार के तहत कुछ सूचनाएं मांगी, उससे पता चला कि बाघमारा के भाजपा विधायक ढुलू महतो के पास तीन हथियार, उनकी पत्नी सावित्री देवी (जिनका पता, अनन्तपुर, चुटिया थाना, रांची दिखलाया गया है) के पास भी तीन हथियार और इनके भाई शत्रुघ्न महतो के पास भी तीन हथियार है। आश्चर्य यह भी है कि ढुलू महतो और उनके भाई शत्रुघ्न महतो का पता एक ही है – स्व. पुना महतो, सा. चिटाई, थाना- बरोरा, जिला – धनबाद।

जब भारत सरकार के “भारत का राजपत्र” दिनांक 13 दिसम्बर 2019 का पृष्ठ संख्या 2 में यह प्रकाशित हुआ कि जिनके पास तीन हथियार है, वे अब दो ही हथियार अपने पास रख सकते हैं और बाकी के एक हथियार नजदीक के थाने में वह भी एक साल के अंदर जमा करा दें। तब जाकर इन तीनों महात्माओं ने अपने-अपने तीन हथियारों में से एक-एक हथियार जमा कराने की कोशिश शुरु कर दी, फिर भी इनके पास दो-दो हथियार करके, एक ही घर में छह हथियार मौजूद है।

सवाल उठता है कि आखिर इतने हथियारों की इन्हें जरुरत क्यों हैं? इससे करते क्या है? इसका जवाब स्थानीय प्रशासन को देना ही चाहिए। यही नहीं सोमनाथ चटर्जी ने एसएसपी धनबाद को पत्र लिखकर इस बात का आरोप लगाया था कि ढुलू महतो के भाई शत्रुघ्न महतो व उनके अन्य समर्थकों ने अवैध रुप से जालसाजी व कपटपूर्वक जम्मू-कश्मीर से जाली व फर्जी शस्त्र अनुज्ञप्ति हासिल किया है।

जम्मू-कश्मीर का फर्जी लाइसेंस दिलाने में उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के एक हथियार तस्कर का बहुत बड़ा हाथ है। इसी जाली लाइसेंस के आधार पर देवघर और बंगाल के इच्छापुर की शस्त्र दुकान से हथियारों की खरीद हुई है। आश्चर्य इस बात की भी है कि धनबाद एसएसपी ने इस पूरे मामले की जांच कराने की बात कही थी, पर सच्चाई क्या है? ढाक के तीन पात।

सवाल तो यह भी है कि आखिर इतनी उदारता रघुवर सरकार के बाद, हेमन्त सरकार में भी किसके कहने पर उन्हें उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे भी ढुलू महतो की पत्नी सावित्री देवी बीसीसीएल धनबाद में फोर्थ ग्रेड कर्मचारी है, उन्हें अगर हथियार की जरुरत भी हैं तो फिर रांची के चुटिया थाना के अनन्तपुर मुहल्ले की शरण क्यों लेनी पड़ी, इसका मतलब क्या है? सच्चाई तो यही है कि इस राज्य में शासन ठीक उसी ढर्रे पर चल रहा है जैसे गोस्वामी तुलसीदास की एक खुबसूरत पंक्ति- “समरथ के नहि दोष गोसाईं।”

इधर धनबाद के ही सुप्रसिद्ध समाजसेवी विजय झा ने हथियार रखने की इस गोरखधंधे को देखते हुए, राज्य सरकार के गृह सचिव राजीव अरुण एक्का को पत्र लिखकर इस संबंध में पूरे राज्य में चल रहे गड़बड़ियों को पटाक्षेप करने के लिए एसआइटी की गठन करने की मांग कर डाली, पर इनके कहने पर एसआइटी का गठन तो अब तक नहीं हुआ, लेकिन राजीव अरुण एक्का ने आगे की कार्रवाई करने का आदेश जारी कर दिया, लेकिन उस पत्र में धनबाद के उक्त सज्जन व्यक्ति ने लिखा क्या था, यह जानना जरुरी है, जिसे हम यहां अक्षरशः आपके समक्ष रख रहे हैं…

“भारत सरकार के द्वारा दिसम्बर 2019 में एक निर्देश जारी किया गया है कि दो से अधिक आग्नेयास्त्र यदि किन्हीं के पास है तो उन हथियारों को Surrender किये जाने का आदेश दिया गया है। जिन लोगों ने अपने सही नाम और पते के आधार पर अनुज्ञप्ति लिया है, ऐसे लोगों के नाम  हर जिले की सूची में हैं, किन्तु कुछ लोगों ने यदि गलत पता के आधार पर अनुज्ञप्ति लिया है और जो व्यक्ति दिये गये पते पर स्थायी निवासी नहीं है।

ऐसे लोग हथियारों को जमा करने से बचने का प्रयास करेंगे। कुछ लोग ने जो एक ही छत के नीचे रहते है, अलग-अलग पते पर दर्जनों हथियार आवंटित करा लिया है, जबकि लाइसेंस में दिये गये पते पर उनका निवास नहीं है। कुछ ऐसे लोगों ने भी लाइसेंस ले रखा है, जिन पर 40 मुकदमें दर्ज है, न्यायालय से सजायाफ्ता भी हैं और संगठित अपराध के जनक है। (यहां मैं स्पष्ट कर दूं कि नये जो रिपोर्ट हैं, उस रिपोर्ट में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ 41 मामले दर्ज है, जिसमें दस तो खुद आर्म्स एक्ट से संबंधित है।)

अतः श्रीमान से निवेदन है कि राज्यस्तरीय एक स्पेशल टीम गठित करके पूरे राज्य में इसकी जांच कराई जाए, जिससे लाइसेंसी हथियार के नाम पर राज्यस्तरीय अनियमितता उजागर हो सकें और कानून सम्मत कार्रवाई की जा सकें। ज्ञात रहें कि कुछ माह पूर्व धनबाद स्थित लोयाबाद में दो गुट के झड़प में एक गुट के द्वारा एके 47 का प्रदर्शन किया गया था, जिसकी चर्चा यहां के सभी अखबारों में हुई थी। लाइसेंसी हथियार की आड़ में कोयलांचल (धनबाद) में कुछ लोग अवैध हथियार भी रखते हैं, यह सर्वविदित है, जिसका उपयोग रंगदारी, भयादोहन और कोयले के व्यापार में वर्चस्व स्थापित करने के लिए किया जाता है।

कुछ लोग लाइसेंसी हथियार खरीदने के बाद प्रावधान के अनुसार अपने स्थानीय थाना या जिला में इसकी जानकारी नहीं देते हैं, जिसके कारण प्रशासन के पास भी हथियार की अद्यतन स्थिति नहीं रहती है। अतः एक एसआइटी गठित करके गलत तरीके से प्राप्त किये गये सभी लाइसेंस रद्द किये जायें और नियम कानून उल्लंघन करने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाये, जिससे कि भविष्य में गलत तरीका अपनाकर कोई भी लाइसेंस प्राप्त नहीं कर सकें।” इस पत्र को विजय झा ने 06 नवम्बर 2020 को राज्य के गृह सचिव को लिखा था।

इसी पत्र के आधार पर सरकार के अवर सचिव धनेश कुमार ने राज्य के महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, सभी उपायुक्तों, सभी वरीय पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को अपने लिखे पत्र में कहा है कि निदेशानुसार, उपर्युक्त विषयक विजय कुमार झा, जिला धनबाद, आवेदन दिनांक 06.11.2020  की छायाप्रति संलग्न करते हुए अनुरोध है कि इसके आलोक में नियमानुसार अग्रेतर कार्रवाई करने की कृपा की जाये, पर सच्चाई क्या है?

सर्वविदित है, सरकार किसी की भी हो, जिन्हें जो करना हैं, वहीं करेंगे, यानी कानून का राज स्थापित होने नहीं देंगे। चाहे भारत सरकार कितने भी कड़े कानून क्यों न बना डाले, अंत में वे वहीं करेंगे, जो उनके स्थानीय नेता उनसे करवाना चाहे। आश्चर्य इस बात की है कि शुरु-शुरु लगा था कि ऐसे लोगों पर हेमन्त सरकार शिकंजे कसेगी, पर यहां तो ऐसे लोगों को बचाने में ही सभी लोग लगे हैं, और जो इनके खिलाफ होता है यानी कानून का सम्मान कर रहा होता है, उसे ही विभिन्न धाराओं में उलटा लटकाने का प्रयास करते हैं।

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