गलतफहमियां न पाले राज्य सरकार, हठधर्मिता छोड़ कर विपक्ष का सम्मान करना सीखें

पिछले चार दिनों से विधानसभा नहीं चल रही, विपक्ष लगातार राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा, पर सरकार के कानों में जूं तक नही रेंग रही, उन्हें लगता है कि जनता ने इस राज्य का उनके नाम निबंधन करा दिया है, क्या झारखण्ड में अब सरकार ऐसे चलेगी, जनता को सोचना होगा और हमें लगता है कि जनता ने मन बना लिया है, जब भी चुनाव होंगे, जनता इनकी विदाई अवश्य करेगी,

पिछले चार दिनों से विधानसभा नहीं चल रही, विपक्ष लगातार राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा, पर सरकार के कानों में जूं तक नही रेंग रही, उन्हें लगता है कि जनता ने इस राज्य का उनके नाम निबंधन करा दिया है, क्या झारखण्ड में अब सरकार ऐसे चलेगी, जनता को सोचना होगा और हमें लगता है कि जनता ने मन बना लिया है, जब भी चुनाव होंगे, जनता इनकी विदाई अवश्य करेगी, क्योंकि अब राज्य सरकार के लक्षण ठीक नहीं दीख रहे। ये बयान है, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय का।

उन्होंने कहा कि रघुवर सरकार की हठधर्मिता के कारण राज्य की जनता को भारी नुकसान हो रहा है। विधानसभा का बजट सत्र बाधित है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को संरक्षण देने का काम प्रारंभ कर दिया है, जनहित के मुद्दे राज्य सरकार की प्राथमिक सूची से गायब है, ऐसा लग रहा है कि जनता ने इन्हें भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने के लिए ही इन्हें जनादेश दिया था।

उन्होने कहा कि जनता को मालूम है कि चारा घोटाले में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, बकोरिया में हुए फर्जी मुठभेड़ में डी के पांडेय, और एक अन्य मामले में एडीजी अनुराग गुप्ता फंसे हुए हैं, पर राज्य सरकार मानने को तैयार नहीं। आश्चर्य इस बात की भी है कि रघुवर सरकार में शामिल एक मंत्री भी मुख्य सचिव मामले पर पर सीएम से सवाल कर चुके हैं, पर सदन में प्रवेश करते ही वे राज्य सरकार के पक्ष में बयान देते है, यानी जनता की नजरों में कुछ और सरकार की नजरों में कुछ, क्या ऐसे लोगों से राज्य का भला होगा, जनता को जानना जरुरी है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष की जायज मांगों को नहीं मानना, जनता की आवाज को दबाने का प्रयास करना, सत्ता के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को त्याग देना, इससे स्पष्ट है कि रघुवर सरकार का अंत आ चुका है, जनता का इस सरकार से मोहभंग हो गया है, सारा विपक्ष एकजुट हैं और इसका असर झारखण्ड ही नहीं बल्कि पूरे देश में देखने को मिलेगा।

Krishna Bihari Mishra

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जिस अखबार में प्रमुखता से समाचार छपा, वही कर रहा उक्त समाचार का उल्लंघन

Sun Jan 21 , 2018
झारखण्ड सरकार ने औद्योगिक और अन्य स्थापनाओं में कार्यरत सभी कर्मचारियों के बैंक खाते में ही वेतन देना अनिवार्य कर दिया है। ऐसा नहीं करने पर छह माह की सजा और पांच सौ रुपये जुर्माना का भी प्रावधान है। राज्य के श्रम नियोजन विभाग ने इसकी अधिसूचना पिछले वर्ष फरवरी माह में जारी कर दी थी, पर राज्य में ऐसे कई संस्थान है, जहां आज भी नकद मासिक भुगतान जारी हैं।

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