रघुवर सरकार को बचाने के लिए हद कर दी हैं रांची के इस अखबार ने

तेल लगाना भी कोई मजाक बात नहीं, खासकर सरकार और सरकार में शामिल मंत्रियों तथा भ्रष्ट अधिकारियों का और वह भी उस समय, जब एक तरफ भ्रष्ट अधिकारियों और सरकार के खिलाफ पूरा विपक्ष और सत्तापक्ष के ही ज्यादातर विधायक खड़े हो। वह भी समान मुद्दों को लेकर, जिन मुद्दों को विपक्ष बार-बार उठाता रहा है, साथ ही सदन से लेकर सड़क तक सरकार को घेर रखा है।

तेल लगाना भी कोई मजाक बात नहीं, खासकर सरकार और सरकार में शामिल मंत्रियों तथा भ्रष्ट अधिकारियों का और वह भी उस समय, जब एक तरफ भ्रष्ट अधिकारियों और सरकार के खिलाफ पूरा विपक्ष और सत्तापक्ष के ही ज्यादातर विधायक खड़े हो। वह भी समान मुद्दों को लेकर, जिन मुद्दों को विपक्ष बार-बार उठाता रहा है, साथ ही सदन से लेकर सड़क तक सरकार को घेर रखा है। यहीं नहीं जब सत्तारुढ़ दल के ही एक टॉप के नेता सीएम को बार-बार उनकी गलतियों को लेकर पत्र के द्वारा ध्यानाकर्षण करा रहे हो, उन्हें घेर रहे हो, ऐसे में जब सरकार का सम्मान तक खतरे में हो, जब रांची से लेकर दिल्ली तक राज्य सरकार की तबियत के बारे में रिपोर्ट यह जा रही हो कि झारखण्ड में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, ऐसे में एक अखबार द्वारा रघुवरभक्ति में लीन हो जाना, सरकार को बचाने के लिए निकल पड़ना, तथा विधायकों की रायशुमारी कराकर सीएम और सरकार को मजबूत करने की कला, कोई सामान्य बात नहीं। ठेठ हिन्दी में इसी को सरकार को तेल लगाना कहते है, और इस तेल लगाने में समाचार लिखनेवाला, समाचार लिखवानेवाला, समाचार को प्रकाशित करने की अनुमति देनेवाला तीनों समान रुप से सरकार तथा उनके मातहतों द्वारा पुरस्कृत होते हैं।

जो अखबारों की दुनिया में हैं और वे तेल लगाने की कला नहीं जानते या जो पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए हमारा विशेष अनुरोध है कि वे आज का कहीं से भी दैनिक जागरण उठा लें और उस पर सरसरी निगाहें डाले, आपको तेल लगाने की कला का अंदाजा तथा तेल कैसे लगाया जाता है? उसका प्रशिक्षण आपको बिना किसी शुल्क के प्राप्त हो जायेगा, अतिरिक्त दिमाग लगाना नहीं पड़ेगा, हो सके तो कल का भी दैनिक जागरण कहीं मिल जाये तो उसे भी देखे, क्योंकि फिर आपको तेल लगाने की कला सीखने में और आसानी हो जायेगी, क्योंकि कल इसी अखबार ने सरयू राय के मुख से यह निकलवा दिया कि ‘मेरी तीनों इच्छाएं पुरी, सरकार से अब कोई शिकवा नहीं’ और आज विधायकों का हृदय व मस्तिष्क को विशेष पैमाने से मापकर छाप दिया कि ‘87 प्रतिशत भाजपा विधायकों को सरकार से शिकवा नहीं’ जबकि अन्य अखबारों में आज भी यहीं खबर है कि राज्य में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। स्थितियां धीरे-धीरे रघुवर दास सरकार के विपरीत होती चली जा रही।

अब सवाल उठता है कि सरकार रहे या जाये, पत्रकारों को इससे क्या मतलब? अखबारों को इससे क्या मतलब? हमें जनहित में समाचार प्रकाशित करनी है, या सरकार हित में अथवा भ्रष्ट अधिकारियों के हित में?

राज्य में जिस प्रकार की पत्रकारिता चल रही है, उससे स्पष्ट है कि यहां पत्रकारिता नहीं, बल्कि तेल लगाओ अभियान चल रहा है, जो जितना तेल लगायेगा, वो खुद को उतना ही फायदा पहुंचायेगा कि प्रवृत्ति कहीं झारखण्ड को पूरी तरह नष्ट न कर दें, इसलिए जो पत्रकार तेल लगाने की कला में पारंगत नहीं होना चाहते, उन पर कुछ ऐसे हालातों में ज्यादा जिम्मेवारियां बन जाती है, आप सभी सत्य को जनता के सामने रखे, क्योंकि इस राज्य की मिट्टी से उपजी अन्न को ग्रहण कर रहे हैं तो आपकी जिम्मेवारी बनती है कि इस मिट्टी से कम से कम दगा न करें और शत प्रतिशत शुद्ध पत्रकारिता कर, इस राज्य का भला करें।

Krishna Bihari Mishra

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