अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक व प्रिन्ट मीडिया CM रघुवर के साथ, पर जमशेदपुर की जनता सरयू के साथ

याद रखें, घमंड न किसी का रहा है और न रहेगा। यह भी याद रखें, जिसने भी कनफूंकवों को अपने माथे पर चढ़ाया हैं, उसकी ऐसी दुर्गति हुई हैं कि वो न घर का रहा है न घाट का। याद तो आपको यह भी रखना होगा कि दुनिया में किसी के बारे में अगर परसेप्शन बनानी हो, तो जब वह अपने जीवन के सर्वोच्च शिखर पर हो, और उसके बाद भी उसके पूर्व के रहन-सहन व बोल-चाल में कोई परिवर्तन नहीं हो,

याद रखें, घमंड न किसी का रहा है और न रहेगा। यह भी याद रखें, जिसने भी कनफूंकवों को अपने माथे पर चढ़ाया हैं, उसकी ऐसी दुर्गति हुई हैं कि वो न घर का रहा है न घाट का। याद तो आपको यह भी रखना होगा कि दुनिया में किसी के बारे में अगर परसेप्शन बनानी हो, तो जब वह अपने जीवन के सर्वोच्च शिखर पर हो, और उसके बाद भी उसके पूर्व के रहन-सहन व बोल-चाल में कोई परिवर्तन नहीं हो, तो समझ लीजिये वह सही में आदमी कहलाने का हकदार है, नहीं तो वो क्या कहलाने का हकदार हैं, वह खुद स्वयं से पूछे, इससे ज्यादा विशेषण या अलंकरण में क्या दूं?

आप चिल्लाते रहिये कि मैं जनता का हनुमान हूं, आप चिल्लाते रहिये कि आपने भ्रष्टाचार मुक्त झारखण्ड बना दिया, पर लोग जानते है कि आप ही के शासन काल में आप ही के साले ने मनीष दास के साथ क्या कर दिया? ये अलग बात है कि आपसे अत्यधिक प्रेम हैं या डर मैं नहीं जानता, कई अखबारों-चैनलों ने इस को न्यूज नही बनाया, पर उससे क्या? आप सच को कितना छिपायेंगे, भला कोई यह कहें कि मैं सूरज को ढक लूंगा, चंद्रमा को निगल जाउंगा, बादलों को मुट्ठी में कर लूंगा, जब चाहे पानी बरसा दूंगा तो लोगों को यह समझते देर नहीं लगेगा कि या तो वह साहित्यकार/कवि हैं या शत प्रतिशत पागल।

मुख्य मुकाबला CM रघुवर और सरयू के बीच, जनता ने ले लिया निर्णय, अब कोई इफ-बट नहीं, सबक सिखाने को जनता तैयार

और अब बात जमशेदपुर पूर्व की। आप जमशेदपुर पूर्व के किसी भी इलाके में चल जाइये, क्या बच्चा, क्या बुढ़ा, क्या औरत क्या मर्द, क्या युवा और क्या युवती, सभी के पसन्द सरयू राय बन चुके हैं, सरयू राय की लोकप्रियता का अंदाजा तो विद्रोही24.कॉम को उसी वक्त लग गया था, जब जमशेदपुर की जनता ने निर्णय कर लिया कि इस बार जमशेदपुर पूर्व से उसे विधायक के रुप में सरयू राय चाहिए, और केन्द्र में बैठी भाजपा सरकार ने जान-बूझकर सरयू राय को जमशेदपुर पश्चिम से टिकट देने से वंचित रखने का फैसला ले लिया, तभी विद्रोही24.कॉम ने पहली बार 13 नवम्बर को यह भविष्यवाणी कर डाली थी, भविष्यवाणी थी – जमशेदपुर पूर्व में रघुवर और सरयू के बीच महामुकाबला देखने के लिए अभी से तैयार हो जाइये।

और लीजिये आज आपके सामने सच्चाई है। जमशेदपुर पूर्व का मैदान सजधज कर तैयार है, उम्मीदवार कई है, पर सभी जानते है, कि यहां मुकाबला रघुवर और सरयू के बीच हैं, यहां मुकाबला कमल और सिलिंडर के बीच है, जनता, अधिकारी व एक निजी कंपनी में काम करनेवाले लोगों का समूह जो यहां दिन-रात इनके कारगुजारियों से परेशान थे, इस बार सबक सिखाने को बेकरार है, बस मतदान की तिथि का इंतजार है। 

मीडिया को रघुवर में नूर नजर आया, बेइमानी में छुपी ईमानदारी पर बट्टा न लगे, इसके लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही सभी मीडिया

पर इन सबसे अलग इलेक्ट्रानिक मीडिया हो या प्रिंट मीडिया, उनके यहां अभी भी रघुवर दास की जय-जय हो रही हैं, दिल्ली, पटना और रांची में बैठे इनके इलेक्ट्रानिक मीडिया के मठाधीश/शंकराचार्य आदि को आज भी रघुवर दास में नूर नजर आ रहा है, ये आज भी अपने चैनलों व अखबारों में बड़ी श्रद्धा के साथ सीएम रघुवर को तवज्जों दे रहे हैं, राजनीतिक पंडितों का कहना है कि उनको ऐसा करना भी चाहिए, क्योंकि उन्होंने इनकी सत्ता में खूब तरमाल खाया हैं, चुनाव की अधिसूचना जारी होने-होने तक रसमलाई चाभी हैं, तो फिर अगर ऐसा नहीं करेंगे तो लोगों का बेईमानी में छुपी ईमानदारी पर विश्वास सदा के लिए समाप्त हो जायेगा।

यहां जानबूझकर सरयू राय के प्रेस कांफ्रेस की खबर को समाचार से गायब कर दिया जाता है, जरा पूछिये प्रभात खबर और राज्य के मठाधीश चैनलों से कि जब 28 नवम्बर को सरयू राय ने सीएम रघुवर के साले पर नोटबंदी के दौरान की गई गड़बड़ी का मामला प्रेस कांफ्रेस के माध्यम से उठाया तो उसे क्यों नहीं अपने अखबार या चैनल में स्थान दिया? आखिर कौन ऐसी बात है कि रघुवर दास की खबरों के लिए आपके चैनल और पेज में बड़े-बड़े स्थान हैं, और सरयू राय के लिए स्थान ही नहीं, और अगर हैं भी तो उनकी बातों को आप ऐसे जगह घुसेड़ दे रहे हैं कि आप समाचार उनकी चलाये अथवा नहीं चलायें, अब उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा।

जमशेदपुर पूर्व की जनता भी जान गई है कि देश के अधिकांश चैनलों और अखबारों ने अपना जमीर, जमीर के सौदागरों के हाथों बेच दिया है, सरयू राय से जब इस संबंध में पिछले दिनों विद्रोही24.कॉम ने बातचीत की, तब उन्होंने कहा कि वे कर ही क्या सकते हैं, अपनी बात जनता और प्रेस के बीच रख रहे हैं, जनता स्वीकार कर रही हैं, पर प्रेस को हो सकता है कि उसकी कोई मजबूरी होगी, हम अपना काम कर रहे हैं, वे अपना कर रहे हैं, जनता को निर्णय करना हैं, वो कर चुकी हैं, बस इंतजार करिये वक्त का।

जनता के बीच में मीडिया के लोगों की पिट रही भद्द, जनता ने मीडिया से बनाई दूरियां

इधर जमशेदपुर पूर्व के जेमको,  जेमको की अन्य बस्तियां, सीतारामडेरा, बिरसा नगर, मोहरदा, मोराकाटी बस्ती, अर्जुन कॉलोनी, आसू कॉलोनी, दीपा कॉलोनी, प्रधान कॉलोनी, टीचर कॉलोनी, सृष्टि गार्डेन, विजया गार्डेन, बिरसानगर जोन 2, भुइयांडीह ग्वाला बस्ती, बाबूडीह लाल भट्ठा, एग्रिको ग्राउंड, बंगाली पाड़ा, जेहराटोली, बर्मामाइन्स, कंचन नगर, गोलमुरी, गोपाल मैदान, बारीडिह बस्ती, शक्ति नगर आदि इलाकों में जहां भी सरयू राय जा रहे हैं, लोग उनका दिल खोलकर स्वागत कर रहे हैं, वे भी लोगों के द्वारा मिल रहे जनसमर्थन से प्रसन्न है, सिक्ख समाज ने तो इनका दिल खोलकर स्वागत किया, दूसरे धर्मों के लोग भी सरयू राय को अपना नैतिक समर्थन दे रहे हैं, जिससे अब क्लियर पता चल गया है कि जमशेदपुर पूर्व का परिणाम क्या आनेवाला है?

इधर जनता को छोड़, ज्यादातर चैनल-अखबार के मठाधीश टाइप पत्रकार सीएम रघुवर से मिलकर स्वयं को धन्य कर रहे हैं, आप-बीती सुना रहे हैं, बीच-बीच में हंसी-ठिठोली भी हो रही हैं, पर इनमें से किसी की हिम्मत नहीं कि ये जनता के दिलों की आवाज, अपने अखबारों या चैनलों के माध्यम से पूरे देश को दिखा सकें, इनकी इन्हीं हरकतों से इनके प्रति लोगों की एक तरह से घृणा होती जा रही हैं, एक जमशेदपुर की तेज तर्रार पत्रकार कहती है कि अब तो पत्रकारिता हो कहां रही हैं, सभी ढो रहे हैं, कोई बूम ढो रहा हैं तो कोई ट्राइपोर्ड तो कोई एक ग्राम से भी कम का कलम, जिसकी जनता की नजरों में कोई औकात नहीं रह गई हैं। यहीं एक पत्रकार के लिए शर्म की बात है।

Krishna Bihari Mishra

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