अपनी बात

ये दैनिक भास्कर वाले नशा करने के बाद पेज बनाने बैठते हैं क्या?

भाई ये सवाल है, पाठकों की ओर से। उनका सीधा सवाल है कि ये दैनिक भास्कर वाले नशा करने के बाद पेज बनाने बैठते हैं क्या? क्योंकि सामान्य गलतियां मानवीय भूलों में काउंट की जा सकती है, लेकिन कोई भयंकर गलतियां कर दें तो उसे क्या कहेंगे? आम तौर पर जितने भी अखबार छपते हैं, वे कई चक्रों से होकर गुजरते हैं, तब जाकर मशीन तक पहुंचती है।

और जब कई चक्रों से होकर गुजरने के बाद भी ये भयकंर भूलें अखबारों में बनी रह जाये तो क्या कहेंगे। आश्चर्य इस बात की है कि ये अखबारें अपनी इन भयंकर भूलों को लेकर दूसरे दिन क्षमा भी नहीं मांगते, जबकि गलतियां होने पर क्षमा मांगना, अपने पाठकों से की गई गलतियों के लिए क्षमा मांगना एक सामान्य सा प्रचलन है। ऐसे में तो यही माना जायेगा ये अखबारवाले मानते हैं कि वे गलतियां करेंगे और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

जरा देखिये, कल दैनिक भास्कर ने गलतियां क्या की। इस अखबार ने अपने प्रथम पृष्ठ की बैक वाली पृष्ठ पर मोदी 3.0 नाम से एक विशेष पेज दी। पेज का नाम था – एनडीए सरकार की नई कैबिनेट। इस पेज में साइड में तीसरे फोटो के नीचे एक कैप्शन लिखा था – एनडीए के सहयोगी दल जदयू के प्रमुख व बिहार सीएम नीतीश कुमार व टीडीपी प्रमुख चंद्र बाबू नायडू। जबकि तस्वीर थी एक अधेड़ व्यक्ति की जो जमीन पर लेटा था, अब वो मृत था या घायल था या नशे में पड़ा था, यह नहीं मालूम।

अब सवाल उठता है कि इस अखबार के संपादक, उप संपादक, पेज निर्माता, कम्प्यूटर ऑपरेटर सभी नशे में थे. उनका ध्यान नहीं था। एक पाठक को उस पर ध्यान आसानी से जा रही थी और इन लोगों में से किसी का ध्यान नहीं गया। दरअसल जब संस्थान प्रगति के शिखर को छू रहा होता हैं, उसी समय एक अहंकार भी किसी कोने में स्थान बना लेता है कि हम जो भी परोसेंगे तुम्हें ग्रहण करना पड़ेगा। 

अब ये नशा इतना महंगा रहता है कि उसकी किसी को परवाह नहीं रहती। ये वहीं लोग है। जो उछल -उछलकर कह रहे थे कि इस बार की उनकी जो एग्जिट पोल रही हैं, वो सही रही हैं। लेकिन इतनी बड़ी गलतियां कर दी, अखबारों में, वे अपनी गलतियों को कब उछल-उछलकर बतायेंगे कि हमने नेताओं की जगह पर उलटी-पुलटी तस्वीर छाप दी। ईमानदारी तो इसमें भी बरतनी चाहिए।

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