झूठ न बोले, CM बताएं कि इजरायल के कौन से शहर या मुहल्ले में यहां के किसान तरक्की कर रहे हैं

भाई, अपने झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास, आखिर झूठ बोलना कब बंद करेंगे? ये हाथी उड़ाने के चक्कर में ये क्यों भूल जाते है कि झारखण्ड में रहनेवाले सभी लोग मूर्ख नहीं हैं, नहीं तो, वे बताएं कि इजरायल के कौन से शहर, के कौन से मुहल्ले में, झारखण्ड के किसान रहकर, उन्नत कृषि तकनीक सीखकर तरक्की कर रहे हैं,

भाई, अपने झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास, आखिर झूठ बोलना कब बंद करेंगे? ये हाथी उड़ाने के चक्कर में ये क्यों भूल जाते है कि झारखण्ड में रहनेवाले सभी लोग मूर्ख नहीं हैं, नहीं तो, वे बताएं कि इजरायल के कौन से शहर, के कौन से मुहल्ले में, झारखण्ड के किसान रहकर, उन्नत कृषि तकनीक सीखकर तरक्की कर रहे हैं, क्योंकि आज उन्हीं के द्वारा, उन्हीं के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने राज्य के करीब-करीब सारे प्रतिष्ठित अखबारों में एक फुल पेज का रंग-बिरंगा विज्ञापन छापा है।

जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हंसता-खिलखिलाता चेहरा के साथ-साथ, मुख्यमंत्री रघुवर दास का भी छाती फुला हुआ चेहरा दिखाई पड़ रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दावा किया है कि “हमारा प्रयास, इजरायल में उन्नत कृषि तकनीक सीखकर तरक्की कर रहे हैं हमारे किसान”

अब आप स्वयं बताइये, कि कोई भी व्यक्ति इन शब्दों/वाक्यों को पढ़ेगा तो क्या समझेगा, जैसे इन शब्दों/वाक्यों को फिर से पढ़िये “हमारा प्रयास, इजरायल में उन्नत कृषि तकनीक सीखकर तरक्की कर रहे हैं हमारे किसान” सच्चाई यहीं है कि सभी यहीं समझेंगे कि उन्नत कृषि तकनीक सीखकर, झारखण्ड के किसान इजरायल में बसकर दिनानुदिन तरक्की कर रहे हैं, पर सच्चाई क्या है?

सच्चाई तो यह है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास व एक-दो आइएएस के कृपापात्र लोगों का समूह इजरायल गया और वहां से कुछ तकनीक सीखकर, यहां अपना जीविकोपार्जन के लिए उस तकनीक का इस्तेमाल करेगा, इससे ज्यादा कुछ नहीं, पर खुद को बेहतर से भी बेहतर बनाने के चक्कर में सीएम रघुवर का इमेज बनानेवाले दोयम दर्जे के समूहों ने मुख्यमंत्री रघुवर दास का ऐसा मक्खन लगाया कि झारखण्ड के किसानों को इजरायल में ही जाकर बसा दिया।

शायद उसे मालूम हो गया होगा कि मुख्यमंत्री जब ऐसा देखेंगे तो ऐसे विज्ञापन निर्माताओं को अपने गले से लगा लेंगे, पारितोषिक देंगे, ऐसा हो भी सकता है, क्योंकि ये सब देखकर हमें आश्चर्य भी नहीं होता, क्योंकि जो जानकार होता है, वहीं जानकार को सम्मान देता है, जो हाथी उड़ाने के चक्कर में महेन्द्र सिंह धौनी को दबाने का प्रयास करने का हिमाकत कर दें, उससे आप ज्यादा की उम्मीद नहीं कर सकते।

जो पत्रकार सीएमओ देखते है, उन्हें पता होगा कि राजबाला वर्मा युग में, मोमेंटम झारखण्ड की योजना बन रही थी, तब महेन्द्र सिंह धौनी को इसका ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया, जब चौक-चौराहों पर महेन्द्र सिंह धौनी रंगबिरंगे हाथी को उड़ाते दिखे और किसी कनफूंकवे ने मुख्यमंत्री रघुवर दास का ये कहकर कान फूंक दिया कि अरे आप तो मार्केट के विज्ञापन में है ही नहीं।

तभी उस वक्त के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के प्रधान सचिव को मुख्यमंत्री रघुवर दास भला-बुरा कहने से नहीं चूके और शायद उसी दिन मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एवं तत्कालीन सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के प्रधान सचिव ने संकल्प लिया कि ऐसे मुख्यमंत्री के साथ कार्य करना उनका संभव नहीं और अंत-अंत तक उन्होंने झारखण्ड से विदा लेने में ही भलाई समझी, आज वे बिहार में कई जिम्मेदारियों का निर्वहण कर, अपनी कार्यकुशलता एवं कार्यदक्षता का वे लोहा मनवा रहे है।

पर झारखण्ड में तो कनफूंकवों की ही बम-बम है, तभी तो आज कनफूंकवों की कृपा से झारखण्ड के किसान इजरायल में बस गये, और कोई इस मूर्खता पर सवाल भी नहीं उठा रहा, लीजिये एक बार फिर पढ़िये और आनन्द लीजिये, कि झारखण्ड के किसान इजरायल में हैं, “हमारा प्रयास, इजरायल में उन्नत कृषि तकनीक सीखकर तरक्की कर रहे हैं हमारे किसान” वाह रे आइपीआरडी वाह, वाह रे मुख्यमंत्री, आप भी न, गजबे ढा रहे हैं।

कमाल है, जिसे ‘में’ व ‘से’ का प्रयोग कहां करना चाहिए, पता तक नहीं, वे राज्य सरकार और मुख्यमंत्री का इमेज बना रहे हैं, ये कमाल आपको सिर्फ और सिर्फ झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के शासनकाल में ही देखने को मिलेगा और किसी के शासनकाल में ऐसा संभव भी नहीं।

Krishna Bihari Mishra

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