धन्य रांची का रिम्स कॉटेज धाम। जहां लालू करते विश्राम।।

भाई जय हो लालू भगवान की। माई समीकरण के जन्मदाता की। सामाजिक न्याय के मसीहा की। स्वपरिवार के लिए अपने पार्टी तक को दांव पर लगा देनेवाले की। चाहे जो हो जाये पर, बीजेपी और मोदी को उनके औकात दिखानेवाले की। चाहे पार्टी का जनाधार मिट्टी में ही क्यों न मिल जाये, फिर भी सर्वणों का मरते दम तक विरोध करनेवाले की। महागठबंधन बनाकर, मोदी के अश्वमेध घोड़े को रोकने के लिए सब कुछ दांव पर लगानेवाले की।

भाई जय हो लालू भगवान की। माई समीकरण के जन्मदाता की। सामाजिक न्याय के मसीहा की। स्वपरिवार के लिए अपने पार्टी तक को दांव पर लगा देनेवाले की। चाहे जो हो जाये पर, बीजेपी और मोदी को उनके औकात दिखानेवाले की। चाहे पार्टी का जनाधार मिट्टी में ही क्यों न मिल जाये, फिर भी सर्वणों का मरते दम तक विरोध करनेवाले की। महागठबंधन बनाकर, मोदी के अश्वमेध घोड़े को रोकने के लिए सब कुछ दांव पर लगानेवाले की।

जब सीट कम हो जाये और सत्ता हाथ से निकलनेलगे, तो सीधे बिहार को बांट कर झारखण्ड निर्माण करानेवाले इस महापुरुष की। अपने बातों से संसद से लेकर, सड़कों तक सब का मनोरंजन करनेवाले की। फिलहाल चारा घोटाले में सजा मिलने के बाद रांची के रिम्स कॉटेज में विश्राम कर रहे, अद्भुत इस महान नेता की तथा रिम्स कॉटेज को पवित्र कर, रिम्स कॉटेज को ही राजद का राष्ट्रीय कार्यालय छद्म रुप से संचालित करनेवाले महामानव लालू भगवान की।

भाई कुछ ही दिन पहले की तो बात है कि मकर संक्रांति का दिन था, कई लालू भक्तों ने दही-चुड़ा खाया ही नहीं और न मनाया, क्योंकि उनके लालू भगवान ही जेल में हैं तो क्या दही और क्या चुड़ा, कुछ लोग अपने इस युग के लालू भगवान के लिए रिम्स कॉटेज पहुंच गये दही चुड़ा लेकर, शायद लालू भगवान उनके दही-चुड़ा ग्रहण कर लें तो उनका जीवन धन्य।

सचमुच लालू जी को क्या फर्क पड़ता है और क्या फर्क पड़ता है, उनके भक्तों को, भक्त और भगवान जब दोनों को, एक दूसरे से कोई गिला-शिकवा नहीं तो दूसरे कुछ भी सोचे क्या फर्क पड़ता है। न्यायालय भले ही उन्हें दोषी करार दे, पर लालू के भक्तों में आज भी लालू उसी कदर विद्यमान है, जिस कदर 1990 के दौरान में लालू विद्यमान थे, उससे तनिक कम भक्ति नहीं हुई, बल्कि भक्ति और मजबूत हुई है, लोग बेकार ही मोदी के समर्थकों को भक्त कहकर बुलाते है, असली भक्त तो लालू के समर्थक है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लालू भगवान को छोड़े नहीं। आज भी उनका लालू चालीसा उनके भक्तों को कंठस्थ याद है।

आज भी लालू प्रसाद का जादू, उसी तरह सर चढ़ कर बोल रहा है, महागठबंधन का जादू भी सर चढ़कर बोल रहा है, कांग्रेस के डा. अजय कुमार हो या सुबोधकांत सहाय, वे जानते है कि लालू प्रसाद क्या है चीज है, इसलिए ये दोनों भी समय-समय पर रिम्स कॉटेज धाम में जाकर लालू दर्शन कर लते हैं, तथा अपने लिए आशीर्वाद ग्रहण कर लेते हैं, यहीं नहीं शरद यादव तो अपनी सीट सुरक्षित तथा लोकसभा में उन्हें फिर इंट्री मिल जाये, इसके लिए कई बार आकर रिम्स कॉटेज धाम में जाकर लालूदर्शन कर स्वयं को कृतार्थ कर चुके है।

क्योंकि उन्हें पता है कि नीतीश से विरोध करने के बाद, अगर उन्हें कोई लोकसभा में भेज सकता है तो वह लालू प्रसाद ही है, ऐसे भी उन्होंने लालू भक्ति के कारण ही तो नीतीश को चुनौती दी थी, इसलिए लालू भगवान के प्रसाद तो उन्हें मिलने ही है। यही नहीं और भी बहुत सारे विभिन्न दलों के नेता हैं, जैसे झाविमो के बाबू लाल मरांडी हो या झामुमो के नेता हेमन्त सोरेन, वे समय-समय पर लालू प्रसाद से मिलकर, उनसे आशीर्वाद ग्रहण कर महागठबंधन के शरीर में जीवन संचार का मंत्र ग्रहण कर चुके हैं, और रही बात छुटभैये नेताओं की तो उनकी औकात क्या कि लालू प्रसाद के खिलाफ एक शब्द भी बोल सके, अकेले लालू रांची के रिम्स कॉटेज धाम में विराजकर अच्छे-अच्छों का राजनीति का भूत उतार दे रहे हैं।

ऐसे भी उन्हें लगता है कि लालू का रिम्स कॉटेज धाम, इस बार लालटेनवालों के लिए लक्की होने जा रहा है, क्योंकि बिहार में लालू भक्ति चरम पर हैं, माई समीकरण के लोग अकुला रहे हैं, उन्हें लग रहा है कि उनके लालू को जानबूझकर सड़ाने का प्रबंध दिल्ली से पटना भाया रांची हो रहा है, इसलिए महागठबंधन को बिहार में मजबूत करने के लिए, अंदर ही अंदर खूब लहर पैदा किया जा रहा है, ताकि लालू भगवान का सारा कष्ट दूर हो जाये।

इधर देखने को यह भी आ रहा है कि जब से लालू भगवान रांची होटवार जेल से रांची कॉटेज धाम में आये हैं, उनका इलाज करनेवाले डाक्टर और उनकी सेवा में लगे नर्स और अन्य सेवक भी धन्य-धन्य हो उठे हैं, कोई सेल्फी तो किसी का ऐसे भी फोटो अखबारों व चैनलों-पोर्टलों में चमक जा रहा हैं, तो वह स्वयं को कृतार्थ समझ ले रहा है, कई लोग तो रिम्स कॉटेज का कई दिनों से परिक्रमा कर रहे हैं, ठीक चौरासी परिक्रमा की तरह, की कही लालू भगवान की कृपा से वे भी लालटेन पकड़कर, कही संसद या विधानसभा न पहुंच जाये।

क्योंकि लालू-लीला पढ़ने के दौरान कई लोगों ने देखा है कि लालू भगवान ने कई ऐसे लोगों पर कृपा कर दी, जो सांसद बनने के लायक नहीं थे, लोक सभा और राज्य सभा में भेज दिया, ये अलग बात है कि ऐसे लोग अब दूसरे दलों में जाकर लालू भगवान को ही आंख दिखा रहे हैं, पर 2019 बता रहा है कि लालू भगवान की एक बार फिर जोरदार इंट्री हो रही है, उनके लालटेन में घी तो नहीं, किरासन तेल भरने का जिम्मा, माई समीकरण ने उठा लिया है, अगर थोड़ी कृपा और किसी की हो गई तो लीजिये, बिहार में लालू ही लालू और लालेटन ही लालटेन और ये सब कृपा रांची के रिम्स कॉटेज धाम में लालू भगवान के विराजने पर ही हो रही है।

क्योंकि यहीं पर रहकर लालू भगवान ने ऐसी रचना रच डाली कि तालाब में पानी रहने के बाद भी कमल सूख रहा है, तीर भोथर हो गया और लालटेन में किरासन भर-भर कर लोग आज ही से गांव-गांव में जलाना शुरु कर दिया है, ताकि याद रहे, कि उनके भगवान रांची के रिम्स कॉटेज धाम में विराज रहे हैं, और उन्हें परम आनन्द की प्राप्ति दिलानी हैं तो बस लालटेन 2019 में सभी जगह जला देना है, महागठबंधन को जीता देना है, ताकि सब का भूत भाग जाये। जय हो लालू भगवान की, जय हो रांची के रिम्स कॉटेज धाम की।

Krishna Bihari Mishra

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