प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों का मंत्री सरयू राय से डीबीटी मामले में हुई तीखी बहस

नगड़ी में डीबीटी यानी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण में हो रही धांधली के खिलाफ एक प्रतिनिधिमंडल आज प्रोजेक्ट बिल्डिंग में खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय से मिला। प्रतिनिधिमंडल में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, झारखण्ड विकास मोर्चा, भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नगड़ी के ग्रामीणों का दल भी मौजूद था। मिली जानकारी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों का मंत्री सरयू राय से डीबीटी मामले में तीखी झड़प हो गई।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोग डीबीटी का विरोध कर रहे थे, पर मंत्री सरयू राय का कहना था कि चूंकि यह मामला केन्द्र से संबंधित है और इस पर कहीं से कोई आपत्ति दर्ज नही हुई, इसलिए इसे समाप्त करने का सवाल नहीं उठता। मंत्री सरयू राय के इस बयान के बाद ही प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों तथा मंत्री सरयू राय और उनके अधिकारियों के बीच जमकर बहस हुई।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों का कहना था कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये मिलनेवाले राशन तक पहुंच के लिए आधार को बायोमिट्रिक पहचान का अनिवार्य बनाया जाना, लाखों परिवारों को बाहर रखे जाने का औजार बन गया है। बायोमिट्रिक प्रमाण विफल होने तथा आधार कार्ड का सीलिंग के जरिये बड़ी संख्या में गरीब राशन-पानी से वंचित हो रहे हैं। राशन की आपूर्ति से इनकार किये जाने के चलते झारखण्ड में, और दूसरी जगह भूख से मौतें हुई हैं। खाद्य सुरक्षा कानूनों को झारखण्ड में ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों का कहना था कि आनेवाले समय में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) से गरीबों को राशन कार्ड दुभर हो जायेगा। झारखण्ड में रांची जिला के नगड़ी प्रखण्ड में पाइलट प्रोजेक्ट शुरु किया गया। इसके खिलाफ हजारों की संख्या में लाभुक आंदोलनरत हैं। यह उल्लेखनीय है कि डीलर अपने सगे-संबंधियों के नाम पर बहुत सा फर्जी काम अपने पास रखे हुए हैं और इसके माध्यम से जनवितरण प्रणाली का राशन बड़े पैमाने पर बाजार में बिक रहे हैं। यह एक बड़ा घपला है। सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए।