बधाई, जिसे जेल में होना चाहिए, उसे बेल मिला और बेल मिलने की खुशी में ढुलू समर्थकों ने जमकर बवाल काटा

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चार महीने की फरारी और अस्सी दिनों तक धनबाद जेल में बिताने के बाद बाघमारा का दबंग भाजपा विधायक ढुलू महतो जैसे ही 31 जुलाई को जेल से निकला। उसके स्वागत में भाजपा समर्थक, उसकी कृपा से जीवित पत्रकारों की टोलियां, तथाकथित टाइगर बंधुओं में उर्जा का नया संचार हो गया। उर्जा का संचार हो भी क्यों नहीं। झारखण्ड हाई कोर्ट ने उन्हें बेल जो दिया है। भले ही उन पर यौन शोषण के केस चलते रहेंगे, पर बेल मिलना क्या कम है?

धन्य है, भारत की कानून व्यवस्था, जो कब क्या बहाना लेकर, किस पर कृपा लूटा दें, कहा नहीं जा सकता। जैसे ही ढुलू महतो पर कृपा हुई, झारखण्ड के जेलों में यौन-शोषण के कई आरोपियों में आक्रोश भी पनप गया। वे मन ही मन घूटन महसूस करने लगे। कहने लगे कि भाई, अपराध तो अपराध होता है, काश उन पर भी इसी प्रकार कोई न्यायाधीश कृपा लूटा देता, तो वे भी हनुमान जी के चरणों में जाकर, सवा किलो शुद्ध घी के लड्डू चढ़ा देता।

अब जरा पन्द्रह दिन पहले की घटना सुनाता हूं। दिल्ली स्थित सर्वोच्च न्यायालय ने विकास दूबे एनकाउंटर मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि जिनके उपर इतने सारे मुकदमों हो, उन्हें बेल कैसे मिल जाता है? सर्वोच्च न्यायालय ने यह कहकर चिन्ता प्रकट की थी। अब सवाल उठता है कि सर्वोच्च न्यायालय की एक-एक बात, देश के सारे न्यायालयों के लिए एक सबक होती है, और उस सबक को ताखे पर रखकर ढुलू जैसे लोगों को, जिन पर 40 मुकदमें हैं, उन्हें बेल दे देना, समझ नहीं आया।

इधर ढुलू को बेल मिलने की खुशियां भाजपा प्रदेश कार्यालय तक पहुंच गई। दबंग बाघमारा विधायक ढुलू को बेल मिलने की खबर बाबू लाल मरांडी को जैसे ही मिली, उनका हृदय गदगद हो गया, वे प्रसन्नचित मुद्रा में दिखे, उनका प्यारा-दुलारा ढुलू जेल से बाहर आ गया। जिसको लेकर, वे खुद उसके घर जाकर प्रेस कांफ्रेस की थी, तथा 40 मुकदमों के आरोपी के पक्ष में बयान देकर, उसके हौसले बुलंद किये थे।

चलिए, ढुलू के जेल से निकलने के बाद क्या हुआ, अब हम आपको बता देते है? देश में लॉकडाउन है, झारखण्ड में भी लॉकडाउन को सख्ती से चलाने की बात कही जा रही है, पर ये क्या लॉकडाउन को ढुलू के समर्थक पालन करेंगे, वह भी तब जब उनके कृपालू ढुलू महतो जी जेल से बंधन मुक्त होकर लौट रहे हैं। ऐसे में, वे गाना नहीं गायेंगे, धमाके नहीं करेंगे, लड्डू नहीं बांटेंगे, जेल का ताला टूट गया, ढुलू टाइगर छूट गया, नहीं भजेंगे, ये कैसे हो सकता है?

जमकर धनबाद में ढुलू समर्थकों ने बवाल काटा, खुब पटाखे छोड़कर धमाके किये, लड्डू बांटे, पुलिस और पत्रकारों को भी लड्डू खिलाई, सोशल डिस्टेन्स का मजाक उड़ाया, प्रशासन को जेल से निकलने के बाद फिर चुनौती दी, और प्रशासन किंकर्तव्यविमूढ़ होकर देखता रहा।

यही नहीं, पूरे बाघमारा का दृश्य देखते बन रहा था, जो लोग ढुलू के जेल जाने से इतने दिनों तक चैन से बैठे थे, उन्हें समझ में आ गया कि अब उनकी चैन खत्म हो गई है। लोगों को कानून व्यवस्था पर भी कुछ ज्यादा भरोसा हो गया, सभी समझ गये, कि देश में नेताओं और पैसों की जितनी कदर हैं, उतनी किसी चीज की नहीं, चाहे उस नेता के उपर 40 मुकदमें ही क्यों न हो, चाहे वो किसी को झूठे मुकदमें में फंसाकर जीवन ही तबाह क्यों न कर देता हो।

यहीं नहीं जैसे लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में जेल में बंद रहने के बाद, जब जेल से निकलते थे, तो हाथी पर बैठकर रात के समय, पटना की सड़कों पर घुमा करते थे, ठीक यही हाल ढुलू समर्थकों ने ढुलू के जेल से निकलने के बाद कर डाली और बाकी कुछ बचा तो ढुलू ने प्रेस कांफ्रेस कर धनबाद के जेल अधीक्षक की संपत्ति की जांच कराने की मांग कर दी। हमें क्या जेल अधीक्षक की संपत्ति की जांच कराओ, और अपनी संपत्ति की भी जांच कराओ। जांच इस बात की भी कराओ की तुम अपने ही नेता नरेन्द्र मोदी की कितनी बात मानते हो, और अगर मानते हो तो तुम्हारा पीए शत्रुघ्न महतो कैसे है?

ढुलू का जेल से निकलना, और उसके समर्थन में जुलूस निकलना, नारेबाजी करना, पटाखे छोड़ धमाके करना, सामाजिक विद्रूपता के स्पष्ट उदाहरण है। जैसे-जैसे ये सामाजिक विद्रुपता बढ़ेगी। देश व समाज रसातल में जायेगा। यौन-शोषण की शिकार होनेवाली महिलाओं की संख्या बढ़ेगी और इसके लिए कोई जिम्मेवार होगा तो वे होंगे भाजपा के वे बड़े नेता दीपक प्रकाश, बाबू लाल मरांडी जैसे लोग, जो भाजपा व समाज को मिट्टी में मिलाने के लिए ढुलू जैसे लोगों के समर्थन में आगे आ गये और वे लोग भी जो ऐसे लोगों का समर्थन करते हैं, मनोबल बढ़ाते हैं, चाहे वे कोई भी हो।

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