भूख से मरो परवाह नहीं, पर मोमेंटम झारखण्ड के तहत तकिये के खोल का कारखाना खोलेंगे जरुर

तकिया के खोल बनाने, कुर्सी-टेबल बनाने, पापड़-दनौड़ी-तिलौड़ी बनाने, चावल-दाल बनाने, सरसो तेल बनाने, वाटर पार्क में मजे लेने, पानी पिलाने, चारपहिये वाहन की बॉडी बनाने आदि का बहुत बड़ा-बड़ा कारखाना जल्द ही जमशेदपुर में दिखेगा। ये सब काम करने के लिए 74 कंपनियां जमशेदपुर पहुंच गई है, उसका हमारे माननीय मुख्यमंत्री रघुवर दास ने खुब ढोल पीटकर उद्घाटन किया है

तकिया के खोल बनाने, कुर्सी-टेबल बनाने, पापड़-दनौड़ी-तिलौड़ी बनाने, चावल-दाल बनाने, सरसो तेल बनाने, वाटर पार्क में मजे लेने, पानी पिलाने, चारपहिये वाहन की बॉडी बनाने आदि का बहुत बड़ा-बड़ा कारखाना जल्द ही जमशेदपुर में दिखेगा। ये सब काम करने के लिए 74 कंपनियां जमशेदपुर पहुंच गई है, उसका हमारे माननीय मुख्यमंत्री रघुवर दास ने खुब ढोल पीटकर उद्घाटन किया है, इस उद्घाटन में केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी आई है, एक अखबार ने बताया है कि उद्घाटन के दौरान वो तो रघुराग में इतनी व्यस्त हो गई कि वो अपने 20 मिनट की भाषण में अपने प्रिय नेता, प्रिय भाई नरेन्द्र मोदी को भूल गई, उन्होंने भाषण के दौरान 29 बार रघुवर दास का नाम लिया और मात्र 11 बार नरेन्द्र मोदी का लिया, भाई विकास हो तो ऐसा।

अपने भाषण में स्मृति ईरानी ने कहा कि दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनी मार्क्स एंड स्पेसर्स ने राज्य की तकिया का खोल, कंबल और कपड़ा आदि खरीदने की इच्छा जताई है। लीजिये अंग्रेजी कंपनी का नाम सुनने में, कि वो तकिया का खोल खरीदने की इच्छा जताई है, कितना अच्छा लगता है, सुनने में, पर जरा इन्हें ये भी बताइये कि कल चतरा के सिमरिया प्रखंड के पुरनाडीह गांव में तीन दिन से भूखी बुंदिया देवी भोजन नहीं मिलने के कारण भूख से बिलबिलाकर दम तोड़ दी, जिसे राज्य के दो प्रमुख अखबारों ने (प्रभात खबर को छोड़कर) प्रमुख स्थान दिया है।

पूरे देश में झारखण्ड ही एक ऐसा राज्य है, जहां पापड़-दनौड़ी-तिलौड़ी, तकिया बनाने, कुर्सी-टेबल बनाने, चावल-दाल की मिल, सरसो तेल की मिल खोलने के लिए मोमेंटम झारखण्ड का आयोजन होता है। हमें याद हैं कि जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने वाइब्रेट गुजरात कराया था, और उस कार्यक्रम में व्यवसाय जगत के देश-विदेश की प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया था, हम आपको बता दें कि गुजरात उस कार्यक्रम का हकदार भी था।

दूसरे की मांग लाल देखकर, आप अपनी मांग लाल करने की परंपरा से उपर उठिये।

एक कहावत है कि हम दूसरे का मांग लाल देखकर अपनी मांग लाल नहीं कर लेंगे, गुजरात की अपनी अर्थव्यवस्था है और हमारी अलग। हम अभी आधारभूत सरंचनाओं को ही ठीक नहीं कर पाये है, आज भी हम अपने हिस्से का पचास प्रतिशत अन्न ही उत्पादन कर पाते है, हमारे यहां आज भी किसान सिर्फ सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण आत्महत्या कर लेते हैं, पर आज तक इस राज्य सरकार ने बेहतर सिंचाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यहीं नहीं तीन वर्ष होने जा रहे है, केवल योजना बनाओ अभियान और सरकार आपके द्वार का ढिंढोरा पीटा पर सच्चाई यह है कि आप किसी भी गांव में चले जाइये, लोग रोते नजर आयेंगे, न बिजली हैं, न पानी है, न सड़क है, न शिक्षा है, न स्वास्थ्य सुविधा हैं, ऐसे में मोमेंटम झारखण्ड कराकर आप किसे उल्लू बना रहे हैं? खुद को  या जनता को?

आप अपनी भाषा सुधारिये, मुख्यमंत्री रघुवर दास जी।

रहीम की एक पंक्ति हैं –

बोली एक अमोल है, जो कोई बोले जानि।

हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।।

आप इस का अर्थ जानते है, हर कार्यक्रम में आप अपने विरोधियों को देख लेने की जो बात करते है, वो आपका अहंकार है, सच्चाई स्वीकार करिये, करोड़ों फूंकने के बाद आपको ये बोलने की जरुरत पड़ रही हैं, कि आप एक मजदूर के बेटे है, अभी तक आप जन-नेता नहीं बने है, मुख्यमंत्री बनना तो मजबूरी थी, क्योंकि स्थिति ही ऐसी हो गई थी कि आपको मुख्यमंत्री बनना था, ये सारा श्रेय उस वक्त के समय को जाता हैं, न कि आपकी क्षमता को। यहां कौन उद्यमियों को डराने जा रहा है, कि आप उसे जेल भेजेंगे। अरे वो तो जिन कंपनियों का आप उद्घाटन कर रहे थे, वे भी हंस रहे थे कि ये कैसा मुख्यमंत्री हैं, जो तकिया के खोल की फैकट्री खोलने को अपना उपलब्धि गिना रहा हैं। कनफूंकवे तो मस्त है, क्योंकि जब तक आप मुख्यमंत्री है, उनकी मस्ती चल रही है, वे तो कहेंगे ही, क्या बात है?  पर सच्चाई क्या है? कभी यहीं गोपाल मैदान आपको बताया होगा, जहां आप कल भारी सुरक्षा के बीच इस कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे।

CM की बातों पर जनता को विश्वास नहीं

आप बेवजह का ताल ठोकते रहिये, हमने ये किया, हमने वो किया, पर एक साल क्या? आपको पांच साल भी दे दिया जाये, आप कुछ नहीं कर पायेंगे। नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने ठीक ही कहा है कि जब वे सत्ता में आयेंगे तो मोमेंटम झारखण्ड की सारी गतिविधियों को सीबीआई से जांच करायेंगे, जनता भी चाहती हैं कि मोमेंटम झारखण्ड की सीबीआई जांच हो, क्योंकि रघुवर दास की सरकार विधानसभा में मोमेंटम झारखण्ड पर हुए खर्च 26 करोड़ बताती है और उद्योग विभाग से जब कोई सूचना के अधिकार के तहत जवाब मांगता है तो विभाग 57 करोड़ से भी ज्यादा का खर्च बता देता है, अब सरकार ही बताये कि कौन झूठ बोल रहा है? और किसे झूठ बोलकर उल्लू बना रहा हैं?

रघुवर स्तुति गाने में प्रभात खबर शीर्ष पर

जैसा कि सर्वविदित है कि पिछले 13-14 अगस्त को प्रभात खबर ने अपना जन्मोत्सव मनाया था, जिस पर अपने मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके कनफूंकवों ने दिल खोलकर रुपये लुटाये थे, ये रुपये लूटाने का ही कमाल था, कि रुपये से दबे उक्त प्रभात खबर ने एक मंत्री द्वारा अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज का किया गया अपमान को पचा गया, इस समाचार को अपने अखबार में स्थान ही नहीं दिया और चूंकि प्रभात खबर ने सरकार से संकल्प किया था कि 19 अगस्त को जो सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम जमशेदपुर में आयोजित होगा, उसका वो प्रमुखता से गुणगान करेगा, रघुराग सुनायेगा, उसने आज इस संकल्प को पूरा किया। इस अखबार ने अपने पहले पृष्ठ के आधे भाग को रघुवर दास के चरण कमलों में रखकर अपने पत्रकारिता को शीर्ष पर पहुंचा दिया है, जबकि रघुराग सुनाने में दैनिक भास्कर दूसरे स्थान पर, हिन्दुस्तान तीसरे स्थान पर और दैनिक जागरण चौथे स्थान पर रहा।

Krishna Bihari Mishra

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लोकप्रियता में झारखण्ड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू मुख्यमंत्री रघुवर दास से बहुत आगे

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झारखण्ड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने लोकप्रियता में राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को बुरी तरह पछाड़ दिया है। आश्चर्य इस बात की है कि जहां मुख्यमंत्री रघुवर दास अपनी ब्रांडिंग के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहे हैं, वहीं झारखण्ड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के पास ऐसा करने को कुछ भी नही हैं, पर इसके बावजूद वह अपनी सादगी और कर्तव्यनिष्ठता के कारण एवं जनोपयोगी फैसले लेने की वजह से पूरे झारखण्ड में विख्यात हो चुकी है।

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