चीन ने भारतीयों को लौटाया और हम चीनियों की आरती उतारने में लगे हैं

एक ओर भारत-चीन सीमा पर डोका ला में चीन ने अपनी गिद्ध दृष्टि रखकर, उसे अपना इलाका मानकर कब्जा जमाने को आतुर है, वहां अवैध निर्माण करा रहा है, उसकी सरकारी एजेंसियां ग्लोबल टाइम्स भारत के खिलाफ अनाप-शनाप बक रहा है, भारत को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है।

एक ओर भारत-चीन सीमा पर डोका ला में चीन ने अपनी गिद्ध दृष्टि रखकर, उसे अपना इलाका मानकर कब्जा जमाने को आतुर है, वहां अवैध निर्माण करा रहा है, उसकी सरकारी एजेंसियां ग्लोबल टाइम्स भारत के खिलाफ अनाप-शनाप बक रहा है, भारत को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है। यहीं नहीं, चीन की सरकार ने कैलाश-मानसरोवर पर निकले हमारे तीर्थयात्रियों को नाथु-ला के पास ही रोक दिया और तीर्थयात्रा पर निकले यात्री बिना कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पूरे किये ही घर लौट आये है। हमारे सैनिक विपरीत परिस्थितियों में चीन से लोहा ले रहे है, साथ ही चीन को अवैध निर्माण करने से रोक रखा है, और हमारे देश के अंदर क्या हो रहा है?

चीन के इस घटियास्तर की हरकतों का भारतीयों पर कोई प्रभाव नहीं

चीन के इस घटियास्तर की हरकतों का कोई प्रभाव भारतीयों पर नहीं है। वे आराम से चीन को आर्थिक महाशक्ति बनाने में बड़े ही प्रेम से लगे है, आज भी भारतीय घरों में चीनी सामान उसी प्रकार से आ रहे है, जैसे पूर्व की भांति आ रहे है, जबकि चीन में भारतीयों और भारतीय सामग्रियों की क्या इज्जत है? उसका सबसे सुंदर उदाहरण है – चीन द्वारा भारतीय तीर्थयात्रियों को नाथु ला के पास रोकना और कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर रोक लगा देना।

चीन ने भारतीयों को रोका और झारखण्ड के सीएम चीनियों का स्वागत कर रहे हैं

पर जरा यहां देखिये, भारत में झारखण्ड के मुख्यमंत्री चीनी प्रतिनिधिमंडल के साथ अपने कार्यालय में निवेश संबंधी वार्ता कर रहे है, यानी जो देश हमारी संप्रभुता को चुनौती दे रहा है, उससे अपने कल्याण की कामना कर रहे है झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास। इससे बड़ी विडम्बना कुछ हो ही नहीं सकता। शायद यहीं कारण है कि चीन जानता है कि भारत उसके आगे किसी भी मामले में टिक नहीं सकता, क्योंकि भारतीय और भारतीय नेताओं की देशभक्ति को वह अच्छी तरह जानता है। वह जानता है कि भारतीय चीनी सामग्रियों को न खरीदने का कसम भी खायेंगे और इसे खरीदेंगे भी। वह जानता है कि इस देश का नागरिक, अपने ही देश के साथ गद्दारी करता है। वह जानता है कि उसे मजबूत करने में भारत और भारतीयों का ही हाथ है। वह यह भी जानता है कि वह भारत से ही आर्थिक रुप से समृद्ध हुआ और भारत को ही नेस्तानबूद करने के लिए हर प्रकार की हरकत करता है, जैसे पाकिस्तान के आतंकी समूहों को कश्मीर मुद्दे पर खुलकर मदद करना, जिसे सारी दुनिया वैश्विक आतंकवाद से जोड़ती है, उसे वह खुलकर मदद करता है, पर भारतीयों और भारतीय नेताओं को इससे कोई मतलब नहीं।

1962 की घटना के बाद भी भारत ने सीख नहीं ली

1962 की चीन की गुस्ताखियों के बाद भी भारत नहीं संभला। जिस भू-भाग को चीन ने हमसे छीन लिया, उसे हमने प्राप्त करने की संसद में कसमें खाई थी, पर उसे आज तक नहीं ले पाये, पचास वर्ष बीत गये। दूसरी ओर चीन स्वयं को मजबूत करता चला गया, पर हमारे देश के नेता अपनी पत्नी और बेटे को मजबूत करने में ज्यादा समय व्यतीत करते गये। लालू प्रसाद, मुलायम सिंह यादव, पी चिंदम्बर, सोनिया गांधी, फारुख अबद्ल्ला ये सब प्रमाण है।

भारत में एक वर्ग ऐसा भी जो इस देश से नफरत करता है

इस देश में एक ऐसी भी पार्टी है, जो रहती है भारत में पर उसकी नीतियां रुस और चीन से संचालित होती है, जिसे वामपंथी भी कहते है, इनका मूल उद्देश्य भारत को रक्षा के क्षेत्र में कमजोर करना ताकि भारत कभी चीन के सामने खड़ा ही नहीं हो सके, इसके एक नहीं कई प्रमाण है, पर क्या किया जाये, भारत देश ही ऐसा है। यहां तो देशभक्ति केवल पाकिस्तान के सामने नजर आती है, यहां तो देशभक्ति केवल क्रिकेट में झंडे लहराने का नाम है, यहां तो एक ऐसा भी वर्ग है जब से चीन ने डोका-ला में अपनी टेढ़ी नजर की है, बस नरेन्द्र मोदी को गरियाना शुरु कर दिया है, वह मन ही मन खुश है, चीन ने भारत पर हमले की धमकी दी है, अब नरेन्द्र मोदी को पता चलेगा, क्या घटिया सोच है इनकी। स्थिति ऐसी है कि ये नरेन्द्र मोदी को नीचा दिखाने के लिए चीन की तरफ से भी लड़ने को तैयार हो जायेंगे, ये हमारा देश है। क्या करियेगा, इसका तो इतिहास है। एक अच्छा गद्दार भारत में ही देखने को मिलता है। मुहम्मद गोरी को मदद करनेवाला जयचंद, बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए पत्र लिखनेवाला राणा सांगा किसी दूसरे देश का नहीं, भारत का ही था। ऐसे में चीन के साथ आसन्न संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ही कुछ करना पडेगा, क्योंकि इस देश में एक बार फिर गद्दारों ने अपनी भूमिका तय कर ली है, इसलिए नरेन्द्र मोदी जी, याद रखेंगे आप। आपको दो नहीं, तीन-तीन लड़ाइयां लड़नी पडेगी। एक चीन, दूसरा पाकिस्तान और तीसरा देश के अंदर छुपे गद्दार।

Krishna Bihari Mishra

Next Post

भीड़तंत्र के खिलाफ रांची में बुद्धिजीवियों का प्रदर्शन

Thu Jul 6 , 2017
पूरे देश में भीड़तंत्र द्वारा किसी के भी जान ले लेने की घटना से पूरा देश उद्वेलित है। इन दिनों कश्मीर, उत्तर-प्रदेश, झारखण्ड, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, आदि अनेक प्रांतों में इस प्रकार की घटना तेजी से घटी है, जिससे आम आदमी डरा हुआ है कि कहीं कोई ऐसी ही घटना उसके साथ न हो जाये।

Breaking News