भीड़तंत्र के खिलाफ रांची में बुद्धिजीवियों का प्रदर्शन

पूरे देश में भीड़तंत्र द्वारा किसी के भी जान ले लेने की घटना से पूरा देश उद्वेलित है। इन दिनों कश्मीर, उत्तर-प्रदेश, झारखण्ड, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, आदि अनेक प्रांतों में इस प्रकार की घटना तेजी से घटी है, जिससे आम आदमी डरा हुआ है कि कहीं कोई ऐसी ही घटना उसके साथ न हो जाये।

पूरे देश में भीड़तंत्र द्वारा किसी के भी जान ले लेने की घटना से पूरा देश उद्वेलित है। इन दिनों कश्मीर, उत्तर-प्रदेश, झारखण्ड, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, आदि अनेक प्रांतों में इस प्रकार की घटना तेजी से घटी है, जिससे आम आदमी डरा हुआ है कि कहीं कोई ऐसी ही घटना उसके साथ न हो जाये। हाल ही में झारखण्ड के सरायकेला, जमशेदपुर, जादूगोड़ा, रांची, रामगढ़ में इस प्रकार की घटना तेजी से बढ़ी है। इन घटनाओं के शिकार सभी समुदाय के लोग है, इसलिए इस प्रकार की घटना से सिर्फ एक ही समुदाय सिर्फ पीड़ित है, ऐसा कहना पूर्णतः गलत होगा। जहां जो मजबूत स्थिति में है, वह हमला कर रहा है और इसमें असामाजिक तत्वों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस प्रकार की घटना से एक बात तो स्पष्ट है कि पूरे देश में जहां-जहां इस प्रकार की घटना घट रही है, वहां कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं, क्योंकि कानून अपने हाथ में ले लेने की प्रवृत्ति बता रही है, कि लोगों का कानून पर से विश्वास उठ गया है और इसका फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे है, जिससे सामाजिक संरचना प्रभावित हो रही है।

राजभवन के समक्ष बुद्धिजीवियों ने संकल्प लिया

पूरे देश में इस प्रकार की घटना से दुखी, रांची के प्रबुद्ध नागरिकों ने राजभवन के समक्ष अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया और उन असामाजिक तत्वों को एक प्रकार से चेतावनी दी कि वे उनके इस कुचक्र को सफल नहीं होने देंगे और देश की जो सामाजिक संरचना है, उसे प्रभावित होने नहीं देंगे। आज के इस प्रदर्शन में गांधीवादी टाना भगतों ने भी भाग लिया। बड़ी संख्या में वामपंथी संगठनों से जुड़े नागरिकों तथा विभिन्न धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी और सभी से सामाजिक संरचना को मजबूत करने की अपील की।

सामाजिक ताना-बाना तोड़ने का प्रयास

सभी ने स्वीकार भी किया कि अपने देश के सामाजिक ताना-बाना को एक सोची समझी रणनीति के तहत तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ऐसे में समाज में रह रहे उन लोगों को जो शांति में विश्वास रखते है, अपनी ताकत को और मजबूत करने की जरुरत है, ताकि कोई असामाजिक तत्व अपने इरादे में शामिल न हो सके। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में हर तबका लगा रहा। लोगों ने राज्यपाल से मिलकर अपनी बातें भी रखी तथा अनुरोध किया कि राज्यपाल सरकार पर दबाव डाले, ताकि आगे आनेवाले समय में अब कोई ऐसी घटना न घटे, जो झारखण्ड पर दाग लगाने का काम करें। इस एकजुटता प्रदर्शन में शामिल लोगों ने शपथ भी ली कि वे अपने-अपने स्तर पर सामाजिक ढांचा को और मजबूत करने का कार्य करेंगे और किसी भी कीमत पर साम्प्रदायिक सद्भाव को टूटने नहीं देंगे।

Krishna Bihari Mishra

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जो लाशों में भी हिन्दू और मुसलमान ढूंढे, उसे आप क्या कहेंगे?

Fri Jul 7 , 2017
अब तो बुद्धिजीवी भी पूछते हैं कि लाश किसकी है? मुसलमान अगर दलित की है, तो प्रदर्शन में भाग लेंगे, क्योंकि इसका माइलेज मिलता है, अगर सामान्य हिन्दूओं की है, तो उस लाश से हमें क्या मतलब? उससे न तो माइलेज मिलता है और न ही मीडिया तवज्जों देती है

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