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तो क्या भारत में रहनेवाले लोग बहुत तेजी से कृतघ्न होते जा रहे हैं?

19 नवम्बर। इसी दिन भारत में दो महान नारियों का जन्म हुआ था। पहली महान वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और दूसरी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी। एक ने अंग्रेजों के दांत खट्टे किये तो दूसरी ने पाकिस्तान को उसकी औकात बताते हुए उसके दो टुकड़े करते हुए एक नये देश बांगलादेश का जन्म कराया। यहीं नहीं भारत को हर क्षेत्र में मजबूत बनाया और अंत में दोनों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

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रांची प्रेस क्लब के कोर कमेटी में शामिल लोगों को धनबाद के पत्रकारों से सीखना चाहिए

धनबाद के पत्रकारों ने वो कार्य कर दिया, जिसकी परिकल्पना नहीं की जा सकती। जहां राजधानी रांची के पत्रकारों का समूह झकझूमर गाने में व्यस्त है, वहीं धनबाद के पत्रकारों ने मिलकर शानदार तरीके से सारी समस्याओं को दरकिनार कर, लोकतंत्र में विश्वास करते हुए, धनबाद प्रेस क्लब का निष्पक्ष चुनाव कराने का संकल्प लिया और इसे मूर्त देने में लग गये।

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साहित्य अकादमी पुरस्कार वापसी जानबूझकर किया गया नाटक था : अशोक वाजपेयी

वरीय साहित्यकार अशोक वाजपेयी बहुत अच्छा नाटक कर लेते हैं, हम सभी को उनके नाटकों से सीख लेना चाहिए कि कौन सा नाटक कब और कैसे करना चाहिए?  खासकर साहित्यकारों को तो जरुर सीख लेनी चाहिए कि वे नाटकों का कैसे सदुपयोग कर सकें। खुद अशोक वाजपेयी ने रांची में एक अखबार और टाटा कंपनी द्वारा आयोजित झारखण्ड लिटरेरी मीट में स्वीकार किया कि साहित्य अकादमी पुरस्कार वापसी जानबूझकर किया गया नाटक था।

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खबरें प्रभात खबर की, पढ़े दैनिक भास्कर में, सीपी-प्रदीप भिड़े, किया अपशब्दों का प्रयोग

कमाल है, कोई अखबार ये कैसे सोच लेता है कि उसके घर में घटना घटेगी और दूसरों को पता ही नहीं चलेगा। वह यह क्यों सोचता है?  कि इस इंटरनेट युग में समाचारों को कोई पचा लेगा, अच्छा तो ये रहता कि वह इस समाचार को भी उसी प्रकार से प्रमुखता देता और जनता को निर्णय करने का अधिकार देता कि कौन सहीं है और कौन गलत? पर जब अखबार खुद ही न्यायाधीश बन जाये, तो इसमें कौन क्या कर सकता है?

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आज ही के दिन दो साल पहले बलमदीना एक्का ने प्रभात खबर को धूल चटाया था

आज अमर शहीद परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की शहादत दिवस है। आज से दो साल पहले इनके शहादत दिवस पर रांची से प्रकाशित एक अखबार प्रभात खबर ने राजनीति करनी शुरु की थी, पर उसकी सारी राजनीति की हवा निकाल दी थी, परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना एक्का ने, जब उन्होंने प्रभात खबर द्वारा दी जा रही कथित शहीदी मिट्टी को लेने से इनकार कर दिया था।

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एक साल हो गये, CM बताएं कि झारखण्ड देश का पहला कैशलेस राज्य किस दिन बना?

याद करिये, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था, झारखण्ड को देश का पहला कैशलेस राज्य बनाना हैं, क्या मुख्यमंत्री रघुवर दास बता सकते है कि झारखण्ड देश का पहला कैशलेस राज्य कब और किस दिन बना? जनता जानना चाहती है। इन्हीं के एक मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा था कि कैशलेस योजना को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनका लक्ष्य है। क्या उन्होंने अपने लक्ष्य को पा लिया?  अगर लक्ष्य पा लिया तो वे दिन और तिथि बता दें, जनता जानना चाहती है।

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हेलिकॉप्टर नहीं मिलने के कारण जांच के लिए नहीं जानेवाली आराधना का विभाग बदला

हेलिकॉप्टर नहीं मिलने के कारण सीएम के आदेश का पालन नहीं करनेवाली आराधना पटनायक, सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को आज सचिव पेयजल एवं स्वच्छता विभाग झारखण्ड, रांची के पद पर योगदान करने का आदेश पारित कर दिया गया। आराधना पटनायक का स्थान अमरेन्द्र प्रताप सिंह लेंगे, उन्हें सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पद पर योगदान करने को कहा गया है।

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अगर सिस्टम फेल है, तो कैसे सुधरेगा सिस्टम? कौन सुधारेगा सिस्टम?

संतोषी भूख से मर जाती है। किसान आत्महत्या कर रहे है। युवा भी आत्महत्या कर रहे है। आत्महत्या करनेवालों में युवतियां और महिलाएं भी शामिल है। एक पिता अपने छोटे से बच्चे के शव को कंधे पर लेकर ढोता हुआ श्मशान घाट तक पहुंच जाता है। एक लड़की का दुष्कर्म कर हत्या कर दी जाती है, बेचारा पिता मुख्यमंत्री से संवेदना के दो शब्द सुनने की इच्छा रखता है, पर उसे सीएम की डांट मिलती है।

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चेहरा देखकर आता है CM का बयान, पूरे राज्य में सिस्टम फेल, जनता सरकार से नाराज

याद करिये 31 अक्टूबर। एक फरियादी ने गुमला की छात्रा के अपहरण का मामला मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में सीएम के समक्ष सीधी बात कार्यक्रम में उठाया था। मुख्यमंत्री इस मामले में इतने आग बबूला हो गये, कि उन्होंने सीधे गुमला के एसपी से पूछ दिया कि आपको किसने आइपीएस बना दिया?  यहीं नहीं सुबह उसे खरी-खोटी सुनाई और शाम होते-होते सजा भी सुना दिया और उसे गुमला एसपी से हटाकर सीआइडी का एसपी बना दिया।

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रांची में सड़क जाम के नाम पर दहशत फैलाने की कोशिश, जनाक्रोश फैलने की संभावना

नाच न जाने आंगन टेढ़ा। जी हां, ये लोकोक्ति आप बचपन से सुनते आये होंगे। शायद इस लोकोक्ति को जमीन पर उतारने का फैसला झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अक्षरशः ले लिया हैं। उन्हें, उनके उच्चाधिकारियों और रांची के एक-दो अखबारों ने अपने दिव्य ज्ञान से ऐसे माया-जाल में फंसा लिया हैं, जैसे लगता हो, कि वे मुख्यमंत्री के सबसे बड़े शुभचिन्तक हैं।

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