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दूसरों को उपदेश देनेवाले CM रघुवर ने चाइनीज लाइट, तो नीतीश कुमार ने मिट्टी के दिये जला मनाई दिवाली

दिवाली सब के लिए खास होता है। अमीरों के लिए भी गरीबों के लिए। यह चरित्र को भी उजागर करता है। दिवाली बताता है कि किसके मन में खोट और किसके मन में प्रेम छुपा है। इस बार की दिवाली ने भी नेताओं के अंदर बैठे डबल कैरेक्टर को उजागर कर दिया। दिवाली के दिन मिट्टी के दिये जलाइये, अपने कुम्हार भाइयों के प्रति अनुराग दिखाइये,

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CM रघुवर ने आज शराब की दुकानें खुलवा रखी हैं, शराब पीये-पिलायें और दिवाली की मस्ती में डूब जाये

दिवाली के दिन सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों को लेकर एक आदेश क्या जारी किया? हमारी झारखण्ड की रघुवर सरकार भी उस आदेश का पालन कराने में जुट गई। यहां भी प्रशासन ने विज्ञापन के माध्यम तथा समाचारों के माध्यम से लोगों को चेता दिया कि अगर आपने दिये गये समय के पूर्व या बाद में पटाखे फोड़े तो आप पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना का केस चल सकता है।

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युवाओं ने कृषि मंत्री रणधीर को दी भद्दी-भद्दी गालियां, की हाथापाई, अपमानित कर मंच से उतारा

भाजपाइयों के लिए स्थिति ठीक नहीं है, उनके लक्षण ठीक दिखाई नहीं पड़ रहे, उनके विधायक अब अपमानित भी होने लगे हैं, उनके साथ अब हाथापाई भी हो रही हैं, गाली- गलौज तो सामान्य बात हो गई है, मुर्दाबाद के नारे भी लग रहे हैं, यहां तक अपमानित करते हुए उन्हें मंच से भी नीचे उतारा जा रहा हैं, इन मंत्रियों के साथ गये सुरक्षाकर्मी भी हालात को देखकर सिहर जा रहे हैं,

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अरे गोविन्द पहलवान ‘शत् शत् नमन’ के योग्य नहीं हैं, ‘अच्छा हुआ मर गया ससुरा’ बोलने के लायक है

सत्तर वर्षीय गोविन्द पहलवान की मौत की खबर जैसे ही राघोपुर के लोगों के कानों तक पहुंची, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। गोविन्द पहलवान के आतंक से त्रस्त ग्रामीणों को लगा कि जैसे उन्हें बरसो पुरानी मन की मुराद मिल गई हो। गोविन्द पहलवान के मरने की खुशी में सभी ने अपने-अपने कुलदेवता की विशेष पूजा की, गांव के प्रधान देवता को भी लोगों ने चुपके से मिठाइयां चढ़ा दी,

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मीडिया, व्यापारियों तथा कथित पंडितों के चक्कर में लालची बने भारतीय, धनतेरस के महत्व को भूला बैठे

अगर हम बाजार में बिक रही वस्तुओं में आनन्द को ढूंढने लगूं, पढ़-लिखकर अखबारों के विज्ञापन में आनन्द को ढूंढता रहूं तो मेरे पढ़ने का क्या मतलब? तब तो मैं उन मूर्खों से भी खत्म हूं, क्योंकि पढ़ने का अर्थ होता है, स्वयं को प्रकाशित करना, न कि किसी के द्वारा बनाये जा रहे, बेवकूफी का शिकार हो जाना। क्या तुमने नहीं पढ़ा… असतो मा सदगमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय. मृत्योर्माअमृतं गमय।

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देखियेगा, दिवाली में मिट्टी के दिये का रट लगानेवाले लोग ही सर्वाधिक चाइनीज लाइट का उपयोग करेंगे

इन दिनों, हमेशा की तरह, फेसबुक, व्हाट्सएप ग्रुप, अखबारों एवं चैनलों, विभिन्न पोर्टलों, नेताओं के जुबानों, आइएएस एवं आइपीएस की पत्नियों द्वारा लगनेवाले मेलों में एक ही बात की खुब चर्चा है, मिट्टी के दिये जलाइये, इस बार दिवाली सिर्फ और सिर्फ मिट्टी के दियों से, गरीबों द्वारा लगाये जानेवालों खोमचों एवं ठेलों, फुटपाथों पर लगनेवाले दुकानों पर बिकनेवाले इन मिट्टी के दियों से दिवाली मनाइये।

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वो जलते दीये, वो घरौंदा बनाने के लिए बचपन की इंजीनियरिंग, अब तो बस दिवाली की यादें ही शेष…

बात 1976-77 की है, उस वक्त हमारी उम्र नौ-दस साल की रही होगी। दिवाली की आहट आते ही हम भाई-बहन घरौंदा बनाने के अभियान में जुट जाते। स्कूल जाने के क्रम में कुशवाहा पंचायत भवन के बगल में एक किसान परिवार के यहा बना घरौंदा बराबर हमें आकर्षित करता, हम भी सोचते कि क्यों न हम भी ऐसा घरौंदा बनाये, जो सालों भर रहे, पर ऐसा कभी संभव नहीं हुआ, जिन घरौंदों को बनाने के लिए हम भाई-बहन पूरी एड़ी-चोटी एक कर देते,

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धिक्कार उस पिता को, जिसका बेटा ये कहे कि पिता उसकी बात नहीं मान रहा तो हम पिता की बात क्यों माने?

‘जब उनके पिता उनकी बात नहीं मान रहे तो वह उनकी बात क्यों माने’, हां भाई, बात में दम तो हैं, जब बाप बेटा का बात नहीं माना, तो ये आज्ञाकारी बेटा बाप की बात क्यों माने? ये डॉयलॉग है बिहार के एक समय तेज तर्रार नेता रहे और वर्तमान में चारा घोटाला में सजा काट रहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के सुयोग्य बड़े बेटे तेज प्रताप का, जब जनाब रांची से पटना के लिए निकल रहे थे।

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तेज प्रताप प्रकरण पर लालू प्रसाद का परिवार ‘घर फूटे गवांर लूटे’ लोकोक्ति का शिकार

फिलहाल पूरे देश में जो प्रमुख राजनीतिक दल हैं, वे आसन्न लोकसभा चुनाव को लेकर, अभी से ही जोर-आजमाइश में लगे हैं, अपने प्रतिद्वंदियों को पटकनी देने के लिए नाना प्रकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए राजनीतिक पैतरें ढूंढ रहे हैं, इधर स्वयं बिहार में भाजपा और जदयू ने अपनी सारी वैचारिक मतभेदों को भूलाकर, बिहार में लालू प्रसाद की पार्टी राजद के खिलाफ सशक्त मोर्चाबंदी कर दी हैं,

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अगर आप सोच रहे हैं कि नवम्बर-दिसम्बर में ठंड उतना नहीं पडे़गा तो आप गलत है, क्योंकि नक्षत्र…

जब हमें पिछले दिनों अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में विभिन्न समाचार माध्यमों से जानकारी मिली कि ‘नवंबर और दिसंबर इस बार तपेंगे। दिसंबर में तेज ठंड नहीं पड़ेगी। अक्टूबर और नवंबर में दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा बना रहेगा। कड़ाके की सर्दी जनवरी में ही पड़ेगी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अलनीनो के असर के कारण ऐसा होगा। इसका असर सर्दी के मौसम की तिमाही पर अक्टूबर से दिसंबर तक पड़ेगा’। तो मेरे कान खड़े हो गये।

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