दाल में कालाः जिन मुस्लिम संगठनों और चर्च को आदिवासियों की पूजा-पद्धति पसन्द नहीं, वे भी चल पड़े सरना धर्म को समर्थन देने
सबसे पहले देश में रहनेवाले जितने आदिवासी लोग है। पहले वे आदिवासियों के धर्म के मामले में एक राय बनाये। फिर वे अपनी मांगे रखे तो ठीक रहेगा। ऐसे भी यह राज्य का विषय भी नहीं है। इसे केन्द्र को देखना है। सरना धर्म को माननेवाले हर जगह नहीं मिलते, इसलिए इस पर मतैक्य होना असंभव है। अच्छा रहेगा कि जनजातीय लोगों के लिए खासकर धर्म के मामले में मतैक्य हो।
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