अपनी बात

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दुमका-बेरमो की जनता ने कहा उन्हें हेमन्त पसन्द हैं, भाजपा को किया दूर से प्रणाम, सत्तारुढ़ दल की बल्ले-बल्ले

झारखण्ड में विधानसभा की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में जिस प्रकार सत्तारुढ़ दल ने सफलता पाई है, उससे साफ जाहिर होता है कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के आगे या पीछे भाजपा में कोई ऐसा नेता नहीं, जो वर्तमान में हेमन्त सरकार को चुनौती दे दें। विद्रोही24.कॉम ने पूर्व में ही इस बात की संभावना जाहिर कर दी थी कि जिस प्रकार से भाजपा नेताओं का समूह विलो द बेल्ट झामुमो नेताओं पर प्रहार कर रहा हैं, वो साफ बता रहा है कि आखिर इस राज्य में कौन मजबूत है, सत्तारुढ़ दल या विपक्ष।

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वाह री सोच, भाजपावाले किसी पत्रकार को झूठे मुकदमे में फंसाकर उसके सम्मान के साथ खेल जाये तो ठीक और दूसरे दलवाले करें तो गलत

उधर अर्नव की गिरफ्तारी हुई और इधर भाजपा को बेचैनी की बीमारी हो गई। भाजपा अर्नव की गिरफ्तारी को आपातकाल से जोड़ रही है, तथा इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश भी कर रही है, जबकि जिन्हें थोड़ी सी भी राजनीतिक समझ है, वे जानते है कि ये नेता व राजनीतिक दल किसी के नहीं होते, बस वे मौके का लाभ उठाना जानते हैं, चाहे वो कोई भी राजनीतिक दल ही क्यों न हो?

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ये दृश्य आंखों को सुकून देनेवाला/विश्वास दिलानेवाला है कि भारत में किसी भी दल का शासन क्यों न हो, भारत की आत्मा कभी मर नहीं सकती

ये दृश्य आंखों को सुकून देनेवाला, साथ ही विश्वास दिलानेवाला है कि भारत में या भारत के किसी भी राज्य में किसी भी दल का शासन क्यों न हो, भारत की आत्मा कभी मर नहीं सकती, भारत कभी मर नहीं सकता, भारत की मिट्टी से जुड़ा धर्म कभी विलोपित नहीं हो सकता। उसके लिए कोई आसुरी शक्तियां कितनी भी जोड़ क्यों न लगा लें। वर्तमान समय में जब पूरा जनमानस कोरोना वायरस से भयभीत है,

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अपने विरोधियों के लिए चोट्टा व जनाजा निकालने की बात कहकर भाजपाइयों ने दोनों सीटें झामुमो गठबंधन को सौंप दी

अपने विरोधियों के लिए चोट्टा, आशिकी, जनाजा आदि भाषा का प्रयोग, क्या यह नहीं बताता कि भाजपा के बड़े नेताओं ने स्वीकार कर लिया कि उनके पास चुनाव लड़ने और जीतने को लेकर उनके पास भाषाओं का घोर अभाव है। पूर्व में भाजपा नेताओं की सभाओं में भीड़ इसलिए लगती थी कि उनके नेताओं में अपने विपक्षियों के लिए भी सम्मान हुआ करता था, कभी बिलो द बेल्ट वे वार नहीं किया करते थे, अगर उनके खिलाफ कोई विलो द बेल्ट वार भी करता तो वे मुस्कुराकर रह जाया करते थे, पर अब स्थितियां बिल्कुल बदल गई है।

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याद रखिये, पवित्र उद्देश्य से प्रारम्भ किया गया छोटा काम भी विशाल और महान बन जाता है

पवित्र उद्देश्य से प्रारंभ किया गया छोटा काम भी कैसे विशाल और महान बन जाता है, इसका उदाहरण है एसइ, एसइसी एंड इसीओ रेलवेज इम्पलाइज कोपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लि. कोलकाता। जिसकी स्थापना परमहंस योगानन्द के पिता श्री भगवती चरण घोष ने रेलकर्मियों की सुविधा के लिए अरबन बैंक के बतौर 1909 में की थी। सुखद आश्चर्य यह है कि आज की तारीख में इसकी कार्यशील पूंजी 1,757 करोड़ रुपये है।

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धिक्कार है, उन राजनीतिक दलों, चैनलों-अखबारों को जो लाशों में भी जाति व धर्म देख, अपना उल्लू सीधा करते हैं

 

कभी-कभी मैं सोचता हूं कि कुछ दिनों पहले जैसे कांग्रेस समर्थित शासित महाराष्ट्र में साधुओं की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई, और अब शत प्रतिशत कांग्रेस शासित राजस्थान में एक ब्राह्मण को जिन्दा जला दिया गया, इन दोनों जगहों पर अगर भाजपा का शासन होता और मरनेवालों में कोई दलित या अल्पसंख्यक होता तो क्या देश के अखबारों, चैनलों, पोर्टलों, कांग्रेसियों, वामदलों, जनसंगठनों, तथाकथित स्वयं को सेक्यूलर बतानेवाले लोग इसी तरह चुप्पी साधे रहते?  

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संपूर्ण क्रांति और जेपी को छोड़िये जी, हम इमरजेंसी में जेल गये, इसलिए पेंशन चाहिए

 

कल की ही तो बात है, पूरे देश में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती मनाई जा रही थी। उस लोकनायक की, जिन्होंने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया। जिन्होंने हर क्षेत्र में नई क्रांति कर, नई सोच के साथ समाज व देश निर्माण की कल्पना की थी, पर उनके मरते ही लोकनायक जयप्रकाश नारायण के चेलों ने क्या किया? सर्वप्रथम उनके आदर्शों का ही गला घोंटा दिया।

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राजस्थान में मंदिर माफी की जमीनों को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने के लिए कानून लाए गहलोत सरकार – ब्राह्मण महासभा

राजस्थान के सपोटरा में पुजारी बाबूलाल वैष्णव जी की निर्मम हत्या के बाद पूरे राजस्थान में मंदिर माफी की जमीनों को अतिक्रमणों से मुक्त करवाने हेतु सरकार को एक कानून लाने के लिये एक ठोस फैसला करने की आवश्यकता है। इसके लिये सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर मांग की है कि पूरे प्रदेश में लाखों बीघा जमीन जो कि मंदिर माफी की है, उन पर अतिक्रमणकारियों की नजर रहती है,जिस पर अवैध कॉलोनियां बसा दी जाती है।

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बधाई हेमन्त जी आपके इस ऐतिहासिक फैसले को, लॉटरी सिस्टम से पोस्टिंग किये गये 24 नवनियुक्त खेल अधिकारी

बधाई दीजिये, राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को, जिन्होंने वो काम किया, जिसे आज तक किसी मुख्यमंत्री ने नहीं किया। आम तौर पर जो आरोप लगता रहता है कि फलांने अधिकारी को फलांने जगह पैरवी या पैसे के बल पर मनचाहे जगह पोस्टिंग कर दी गई, ये किस्सा ही उन्होंने सदा के लिए समाप्त कर दिया, जब राज्य के सभी 24 जिलों में खेल पदाधिकारियों की नई नियुक्ति उन्होंने लॉटरी सिस्टम से कर दी।

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जब दैनिक भास्कर जानता है कि “दुष्कर्म किसी जाति, धर्म या मजहब की नहीं पूरी इंसानियत की समस्या है”, तो फिर इसे खुद पर अमल क्यों नहीं कर रहा?

 

जब ‘दैनिक भास्कर’ के ही राजस्थान के एक स्टेट एडिटर लक्ष्मी प्रसाद पंत यह स्वीकार करते हैं कि “दुष्कर्म किसी जाति, धर्म या मजहब की नहीं पूरी इंसानियत की समस्या है”, तो फिर ‘दैनिक भास्कर’ ही बताएं कि उसने हाथरस मामले में जातीय उन्माद को बढ़ावा देनेवाले हेडिंग्स का इस्तेमाल क्यों किया? जरा देखिये ‘दैनिक भास्कर’ ने क्या लिखा है – “जातिगत टकराव की ओर हाथरस, पीड़िता के घरवाले बोलेः ठाकुर-ब्राह्मण के गांव में डर कर जी रहे हैं, पर इंसाफ लेंगे”

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