MP संजय के समर्थकों व भाजपाइयों ने ट्रैफिक रुल्स तोड़ा, पर ट्रैफिक पुलिस ने उनसे जुर्माने नहीं वसूले

कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रांची में थे, उन्होंने नवनिर्मित झारखण्ड विधानसभा का उद्घाटन किया। रांची के भाजपा सांसद संजय सेठ भी इस दौरान अति उत्साहित दिखे और इसी उत्साह में उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मोदी की सभा में जाने के लिए बाइक की सवारी की। खुद संजय सेठ तो इस दौरान हेलमेट पहने दिखे, पर उनके ही बाइक पर बैठे एक शख्स ने हेलमेट पहनना जरुरी नहीं समझा, और संजय सेठ को ही चूना लगा दिया।

कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रांची में थे, उन्होंने नवनिर्मित झारखण्ड विधानसभा का उद्घाटन किया। रांची के भाजपा सांसद संजय सेठ भी इस दौरान अति उत्साहित दिखे और इसी उत्साह में उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मोदी की सभा में जाने के लिए बाइक की सवारी की। खुद संजय सेठ तो इस दौरान हेलमेट पहने दिखे, पर उनके ही बाइक पर बैठे एक शख्स ने हेलमेट पहनना जरुरी नहीं समझा, और संजय सेठ को ही चूना लगा दिया।

संजय सेठ आगे वाली सीट पर बैठकर, हेलमेट पहने बाइक चला रहे थे, और उनके पीछे बैठा शख्स आराम से हेलमेट उतारकर अपने हाथों में रख लिया, शायद उसे अपना चेहरा दिखाना ज्यादा जरुरी लग रहा था, यहीं नहीं संजय सेठ के साथ जो भी बाइक सवार, बाइक चला रहे थे, उनमें से ज्यादा लोग जो पीछे बैठे थे, उन्होंने हेलमेट नहीं पहनी थी, तथा कुछ ऐसे भी थे, जो आगे की सीट पर बैठने के बाद भी हेलमेट पहनना जरुरी नहीं समझा।

अब सवाल राज्य के परिवहन मंत्री सी पी सिंह से और राज्य के ट्रैफिक एसपी, ट्रैफिक डीएसपी तथा चालान काटनेवाले यातायात से जुड़े उन तमाम पुलिसकर्मियों से कि क्या कल चालान नहीं काटने का कोई विशेष दिन था? और अगर विशेष दिन नहीं था तो ये सारे लोग बताये कि संजय सेठ की बाइक पर सवार पीछे वाले शख्स का चालान किसने कब और कहां काटा? अथवा संजय सेठ के साथ बिना हेलमेट के चल रहे बाइक सवारों से किस कानून के तहत चालान नहीं काटा गया?

क्या ये घटना बताती नहीं कि राज्य में दो तरह के ट्रैफिक के कानून हैं, अगर जनता ट्रैफिक रुल्स तोड़े तो उसे जुर्माना भरने के लिए मजबूर करो और नेता जी तथा उनके समर्थक गड़बड़ करें तो आंख मूंद लो, यही दोहरापन तो ट्रैफिक आतंकवाद को जन्म देता हैं, तभी तो लोग आज डंके की चोट पर कहते है कि राज्य में ट्रैफिक आतंकवाद है, और सवालिया लहजे में ये परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस से जुड़े उन तमाम अधिकारियों से यह कहे बिना नहीं रुकते कि ये ट्रैफिक आतंकवाद ही तो हैं

  • जहां मध्यमवर्गीय परिवारों के लोगों को कानून पढ़ाया जा रहा हैं, और खुद भाजपा के लोग जैसे नितिन गडकरी और गणेश मिश्र जैसे लोग बिना हेलमेट के दुपहियेवाहन का प्रयोग करते हैं, पर उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता, जूर्माना नहीं लिया जाता, जबकि दूसरों से मनमाने दंड वसूले जा रहे हैं।
  • क्यों नहीं परिवहन विभाग एक नियत समय पर लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करता हैं, आखिर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए घूस/रिश्वत की परम्परा क्यों अब तक जारी हैं, आप कहेंगे कि ऐसा नहीं होता, पर जो भुक्तभोगी हैं, वो तो कहेंगे ही।
  • आखिर नये दुपहिये या चारपहिये वाहन के नाम पर लॉजिस्टिक चार्ज क्यों लिये जाते हैं, और वे पैसे किसके खाते में जाते हैं, क्या जनता मूर्ख है?
  • आपको किसने कह दिया कि ज्यादा जूर्माना हो जाने से दुर्घटना कम हो जायेगी, अरे जो तेज चलाते हैं, वे चलायेंगे ही, उन्हें आप या हम नहीं रोक सकते, ये एक प्रकार का अपराध है, जो अपराधी स्वभाव के हैं, वे करेंगे ही, लेकिन आम जनता इस प्रकार के अपराध नहीं करती, पर फिलहाल शिकार वहीं हो रही।
  • आप बता सकते है कि रांची में ही कहांकहां ट्रैफिक सिग्नल ठीक ढंग से काम कर रहा?
  • आप बता सकते है कि कितने आइएएस/आइपीएस या नेताओं से ट्रैफिक रुल्स अब तक फौलो कराये गये?
  • आप रांची में ही रहते हैं , क्या बता सकते है कि डीएसपी ट्रैफिक रंजीत लकड़ा का रांची से क्यों ट्रांसफर कराया गया?
  • कहा जाता है कि विदेशों में इससे भी ज्यादा कड़े कानून और जूर्माने का प्रावधान हैं, तो बंधु उसी प्रकार से जनता को वहां सुविधा भी दी गई है, क्या वो सुविधा यहां मिल पाई है?
  • आखिर आम जनता अपने गाड़ी का इंश्योरेंस खुद कराये और सरकारी गाड़ी का इंश्योरेंस क्यों नहीं, क्या सरकारी गाड़ियों से दुर्घटनाएं नहीं होती, उनसे दुर्घटना होने पर संबंधित व्यक्तियो को इंश्योरेंस कहां से मिलेगा?
  • आखिर सारे कागजात आम जनता अपनी गाड़ी का बना कर रखें और सरकारी गाड़ियां प्रदूषण तक की सर्टिफिकेट नहीं रखे, क्या सरकारी गाड़ियां प्रदूषण नहीं फैलाती?
  • आखिर केन्द्र सरकार द्वारा लाई गई यह ट्रैफिक आतंक पर गुजरात सरकार जहां भाजपा की ही सरकार हैं उसने बैन क्यों लगाया? वहां जूर्माने 90 प्रतिशत तक क्यों घटाये गये। महाराष्ट्र और कर्नाटक में गडकरी टैक्स क्यों नहीं लागू हैं, इसका मतलब है कि वहां की सरकारों को लगता है कि इसमें कुछ खामियां हैं।
  • क्या किसी परिवार का बच्चा बदमाशी करता हैं तो क्या मांबाप उसके मारपीट कर हाथपैर तोड़ देते हैं, या उसे उतना ही दंड देते हैं, जितना वह सह सकें, ऐसा तो नहीं कि गाड़ी की कीमत 25,000 रुपये हैं और उसे उसकी दुगनी कीमत वसूल ली जाये।

अतः हम जैसे लोग इसे ट्रैफिक आतंकवाद ही कहेंगे, ऐसे भी कल का मोदी आगमन का विजयूल साफ बता रहा है कि कितने भाजपाइयों ने ट्रैफिक रुल्स की अवहेलना की और ट्रैफिक पुलिस ने उन अवहेलना करनेवालों से कितनी राशि वसूली?

Krishna Bihari Mishra

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