Author: Krishna Bihari Mishra

राजनीति

9000 स्कूलों में ताला लटकाने के फैसले पर झामुमो ने राज्य सरकार को चेताया

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि रघुवर सरकार राज्य के मूलवासियों-आदिवासियों को समूल विनाश करने के लिए तत्पर हो उठी है। इसका प्रमाण है, वर्तमान राज्य सरकार द्वारा प्रारंभिक शिक्षा से संबंधित विद्यालयों के पुनर्गठन की प्रक्रियाओं को प्रारंभ करना।

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राजनीति

‘इक्जाम पर चर्चा’ के बहाने 2019 साधने की तैयारी की नरेन्द्र मोदी ने

विपक्ष के नेताओं और सत्तापक्ष के नेताओं में सबसे बड़ा अन्तर यह हैं कि एक ओर जहां विपक्ष अभी भी आराम की मुद्रा में हैं। विलासिता संबंधी आवश्यकता की ओर ध्यान देने के लिए हर समय विदेश का दौर लगा रहा हैं, वहीं नरेन्द्र मोदी की चुनाव जीताओ टीम अभी से मिशन मोदी के बहाने 2019 को साधने में लग गई हैं। उसी की कड़ी है – ‘इक्जाम पर चर्चा’।

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अपनी बात

सरकार और शिक्षकों के किये पाप, गरीब बच्चे भुगतेंगे, 9000 स्कूलों में लटकेगा ताला

एक समय था, सरकार स्कूल खोलती थी और आज सरकार स्कूल खोलती नहीं, बंद कराती हैं, क्योंकि देश में काफी बदलाव आया हैं। सरकार ने अब नई योजना बनाई हैं, जितना जल्द हो सके, स्कूलों को बंद करो, जो स्कूल बंद हो रहे हैं, वहां काम कर रहे लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट करो और स्कूलों में ताला लटका दो। ये कार्यक्रम जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां बड़ी तेजी से किया जा रहा हैं।

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अपनी बात

काश मैं भी नीरव मोदी या विजय माल्या होता और इसका लाभ उठाता!

काश मैं भी नीरव मोदी या विजय माल्या होता, देश में ऐश करते हुए, अपने देश के लोगों को लूटता और फिर देश को चूना लगाकर विदेश में जाकर बसकर ऐश-मौज करता, पर क्या करुं, मेरे मां-बाप ने ऐसा करना नहीं सिखाया, इसमें मैं अपने मां-बाप को ही दोषी ठहराउंगा, आखिर उन्होंने ऐसा क्यों नहीं करना सिखाया? अगर सिखाया होता तो हम भी बम-बम हो गये होते।

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अपनी बात

एक ही वर्ष में CM रघुवर दास के ‘मोमेंटम झारखण्ड’ की हवा निकल गई

17 फरवरी 2017, मुख्यमंत्री रघुवर दास का मोमेंटम झारखण्ड का अंतिम दिन। मुख्यमंत्री आह्लादित है, मुख्यमंत्री के हां में हां मिलानेवाले एक मंत्री को छोड़कर सारे मंत्री, अधिकारियों का दल, कनफूंकवों का समूह गद्गद हैं, उसे लग रहा है कि उन्होंने ऐसा काम कर दिया हैं, जो आज तक किसी ने किया ही नहीं, अब झारखण्ड में बेकारी, पलायन, भूखमरी, अशिक्षा, स्वास्थ्य की समस्या खत्म हो जायेगी।

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धर्म

वैलेंटाइन पर भारी पड़ गया शिव और पार्वती का विशेष महापर्व महाशिवरात्रि

14 फरवरी को पूरा विश्व वैलेंटाइन डे मनाता है। इसे देखा-देखी कहिये या पश्चिमी देशों से चलनेवाली मार्डनाइज्ड एयर कह लीजिये, भारत के छोटे-बड़े शहरों को भी अपने जालों में ले लिया हैं। अब आज का युवा ही नहीं, अधेड़ों का समूह भी वैलेंटाइन में डूबकी लगाकर खुद को मार्डन समझने की कोशिश करता हैं। कुछ अखबार और चैनलवाले तो इस दिन का ऐसा इंतजार करते हैं कि जैसे लगता हो कि अगर ये दिन नहीं आये तो दूसरे दिन अखबार छपेंगे ही नहीं,

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अपनी बात

अहंकार में चूर CM ने भगवान शिव पर जलार्पण करने से किया इनकार

दुनिया में बहुत कम ही लोग हुए, जो सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने के बाद खुद को संभाल सकें, नहीं तो ज्यादातर लोग ऐसे निकले, जो सत्ता पाते ही, उसके मद में ऐसे चूर हुए, कि उन्हें सड़कों पर चलनेवाले सामान्य नागरिक कीड़े-मकोड़े की तरह नजर आने लगे और लगे हाथों ऐसे लोगों ने भगवान और उनके भक्तों का भी मजाक उड़ाना शुरु कर दिया।

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राजनीति

CM बताएं कि केन्द्र ने 50 हजार करोड़ में से कितना निवेश किया झारखण्ड में?

मोमेंटम झारखण्ड के एक साल पूरे होने जा रहे हैं, ऐसे में इस पर नजर दौड़ना जरुरी है, कि जिस मोमेंटम झारखण्ड के नाम पर, उसके प्रचार-प्रसार पर करोड़ों फूंक डाले गये, भारी-भरकम हाथी को कलरफूल बनाकर आकाश में उड़ाया गया था, वह हाथी उड़ा भी या धड़ाम से गिर गया। आखिर मोमेंटम झारखण्ड के दौरान सीएम रघुवर दास ने क्या कहा था? जरा ध्यान दीजिये…

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अपराध

अगर आप IAS, IPS या CM हैं तो कानून आपके हाथ में और जनता हैं तो…

कमाल हैं, झारखण्ड में अगर आप आईएएस है या आईपीएस है या मुख्यमंत्री है, तो आपको कानून तोड़ने का, कानून का उल्लंघन करने का पूरा अधिकार हैं, अगर आप सामान्य जनता है तो आप समझ लीजिये आपको कानून तोड़ने या कानून का उल्लंघन करने पर आपको जेल में इस प्रकार से सड़ा दिया जायेगा कि आपकी नानी-दादी याद आ जायेगी।

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अपनी बात

क्या झारखण्ड के CM 50 किलोमीटर की दूरी तय कर मैट्रिक परीक्षा देने गये थे?

क्या राज्य के मुख्यमंत्री या मानव संसाधन मंत्री या शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव या झारखण्ड एकेडमिक कौंसिल के उच्चाधिकारी मैट्रिक की परीक्षा देने के लिए पचास किलोमीटर की दूरी तय किये थे? या उनके बेटे-बेटियां या पोते-पोतियां या उनके रिश्तेदार पचास किलोमीटर की दूरी तय कर मैट्रिक की परीक्षा देने को तैयार हैं अगर नहीं तो फिर राजकीयकृत उच्च विद्यालय टाटीसिलवे के गरीब छात्र-छात्राओं पर इतना बड़ा जुल्म क्यों?

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