9000 स्कूलों में ताला लटकाने के फैसले पर झामुमो ने राज्य सरकार को चेताया

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि रघुवर सरकार राज्य के मूलवासियों-आदिवासियों को समूल विनाश करने के लिए तत्पर हो उठी है। इसका प्रमाण है, वर्तमान राज्य सरकार द्वारा प्रारंभिक शिक्षा से संबंधित विद्यालयों के पुनर्गठन की प्रक्रियाओं को प्रारंभ करना।

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि रघुवर सरकार राज्य के मूलवासियों-आदिवासियों को समूल विनाश करने के लिए तत्पर हो उठी है। इसका प्रमाण है, वर्तमान राज्य सरकार द्वारा प्रारंभिक शिक्षा से संबंधित विद्यालयों के पुनर्गठन की प्रक्रियाओं को प्रारंभ करना। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज रांची में कहा कि देश की सर्वाधिक महत्वाकांक्षी परियोजना सर्व शिक्षा अभियान को ध्वस्त करने के उद्देश्य से ही राज्य के लगभग दस हजार प्राथमिक विद्यालयों का अस्तित्व समाप्त कर देने की योजना है, प्रत्येक गांव के प्राथमिक विद्यालयों को बंद कर पंचायत में मात्र एक प्राथमिक विद्यालय की स्थापना और संचालन, सरकार ने इस उद्देश्य से लिया है कि मूलवासियों-आदिवासियों को प्राथमिक शिक्षा से वंचित किया जाय एवं विषम भौगोलिक क्षेत्रफल के कारण ग्रामीण बच्चे नियमित स्कूल न जा पाये, पढ़ाई न कर पाये एवं ड्राप आउट करने को मजबूर हो।

सुप्रियो भट्टाचार्य का कहना था शिक्षा परियोजना के लागू होने से प्रत्येक गांवों में विद्यालयों की स्थापना हुई थी। जिससे शिक्षा के प्रति लोगों में अप्रत्याशित जागरुकता देखने को मिली, परिणाम यह हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों में शत प्रतिशत नामांकन एवं ठहराव सुनिश्चित हुआ। अपने गांव में विद्यालय होने से बच्चों एवं अभिभावकों को काफी सहुलियत हुई और बच्चे स्कूल जाने लगे। वर्तमान समय में जो विलय-पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही है, उससे ग्रामीण क्षेत्रों में एक नकारात्मक संदेश का संचार हुआ है। पचास-साठ साल पुराने विद्यालयों को भी विलय करने का कार्य भी किया जा रहा हैं, जिससे संबंधित गांवों के ग्रामीण आक्रोशित है। ग्रामीण अभिभावक एवं राज्य के शिक्षाविद्, सरकार के इस प्रयास से अत्यंत चिन्तित एवं आतंकित है।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य सरकार के इस कृत्य के कारण न केवल यहां के पढ़े-लिखे मूलवासी, आदिवासी, प्राथमिक शिक्षक, पारा शिक्षक अपनी रोजी-रोटी से हाथ धो बैंठेंगे, वहीं दूसरी ओर सबका साथ, सबका विकास का सरकारी मुखौटा भी उतर जायेगा। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि प्राथमिक विद्यालयों को बंद कर, संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था को संगठित रुप से एक विशेष सांप्रदायिक संगठन के हवाले कर, समाज में सांप्रदायिक सौहार्द्र को मिटाने एवं मूलवासी, आदिवासी को कई खंडों में विभक्त करने का कुत्सित प्रयास है। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने सरकार को सचेत किया कि वे इस कुकृत्य को अविलम्ब बंद करे, नहीं तो वे जनसामान्य के आक्रोश का सामना करने को तैयार रहे।

Krishna Bihari Mishra

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