Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

अगर आप इवेंट मैनेजमेंट नहीं जानते तो ‘राहुल’ और इवेंट मैनेजमेंट जानते हैं तो ‘नरेन्द्र मोदी’

दरअसल भारत एक अनोखा देश है, यहां के लोग यह नहीं देखते कि उसका नेता या उसका प्रिय पत्रकार करते क्या हैं? वे तो सिर्फ यह देखते है कि वो कहता/लिखता क्या है? अगर वह बहुत अच्छा बोलता/कहता/लिखता है, तो बहुत बढ़िया है, चाहे वह हमारा गर्दन ही क्यों न उतार लें या चाहे वह देश की अर्थव्यवस्था या देश को ही गिरवी क्यों न रख दें।

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अपनी बात

दूसरों को उपदेश देनेवाले CM रघुवर ने चाइनीज लाइट, तो नीतीश कुमार ने मिट्टी के दिये जला मनाई दिवाली

दिवाली सब के लिए खास होता है। अमीरों के लिए भी गरीबों के लिए। यह चरित्र को भी उजागर करता है। दिवाली बताता है कि किसके मन में खोट और किसके मन में प्रेम छुपा है। इस बार की दिवाली ने भी नेताओं के अंदर बैठे डबल कैरेक्टर को उजागर कर दिया। दिवाली के दिन मिट्टी के दिये जलाइये, अपने कुम्हार भाइयों के प्रति अनुराग दिखाइये,

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राजनीति

कोर्ट के रहमोकरम पर जीनेवाला, आदतन अपराधी ढुलू महतो कैरेक्टर सर्टिफिकेट बांटना बंद करें

सीएम रघुवर दास का कृपापात्र बाघमारा का विधायक ढुलू महतो, अपने क्रियाकलापों से पूरे बाघमारा ही नहीं पूरे धनबाद को तबाह कर रखा है, पूरे देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा रहा है, उसके खिलाफ जो भी कोई खड़ा होता है, या उसका विरोध करता है, वह सत्ता के बल पर उसके सम्मान से खेलने में तनिक गुरेज नहीं करता, वह अपने विरोधियों के लिए शैतान – राक्षस आदि शब्दों का प्रयोग करता है।

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अपनी बात

CM रघुवर ने आज शराब की दुकानें खुलवा रखी हैं, शराब पीये-पिलायें और दिवाली की मस्ती में डूब जाये

दिवाली के दिन सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों को लेकर एक आदेश क्या जारी किया? हमारी झारखण्ड की रघुवर सरकार भी उस आदेश का पालन कराने में जुट गई। यहां भी प्रशासन ने विज्ञापन के माध्यम तथा समाचारों के माध्यम से लोगों को चेता दिया कि अगर आपने दिये गये समय के पूर्व या बाद में पटाखे फोड़े तो आप पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना का केस चल सकता है।

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अपनी बात

युवाओं ने कृषि मंत्री रणधीर को दी भद्दी-भद्दी गालियां, की हाथापाई, अपमानित कर मंच से उतारा

भाजपाइयों के लिए स्थिति ठीक नहीं है, उनके लक्षण ठीक दिखाई नहीं पड़ रहे, उनके विधायक अब अपमानित भी होने लगे हैं, उनके साथ अब हाथापाई भी हो रही हैं, गाली- गलौज तो सामान्य बात हो गई है, मुर्दाबाद के नारे भी लग रहे हैं, यहां तक अपमानित करते हुए उन्हें मंच से भी नीचे उतारा जा रहा हैं, इन मंत्रियों के साथ गये सुरक्षाकर्मी भी हालात को देखकर सिहर जा रहे हैं,

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राजनीति

अगर भाजपा ने नये सिरे से ध्यान नहीं दिया तो 2019 में झारखण्ड से भाजपा को गायब ही समझिये

लोहरदगा का भंडरा हो, या सिसई का इलाका, नेतरहाट हो या बिशुनपुर। पिछले दिनों झारखण्ड संघर्ष यात्रा के दौरान नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन की सभा में उमड़ी भीड़ कुछ कहती है। इस भीड़ को समझने की भी जरुरत है, जिस भीड़ को लाने के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास के इशारों पर कार्य कर रहे विभिन्न जिलों के उपायुक्त और उनकी टीम एड़ी-चोटी एक कर देती है, सरकारी योजनाओं का लाभ ले रही युवतियों पर दबाव डालती है,

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राजनीति

सरयू राय महाधिवक्ता की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न उठाएं तो सही और कांग्रेस सवाल करें तो गलत कैसे?

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राजेश ठाकुर ने महाधिवक्ता एवं प्रवक्ता से सवाल करते हुए पूछा है कि महाधिवक्ता सरकार के लिए और प्रवक्ता भाजपा के लिए काम कर रहे हैं या किसी निजी कंपनी के लिए काम कर रहे हैं, यह उन्हें स्पष्ट करना चाहिए। चूंकि सरकार के महाधिवक्ता के रूप में अजीत कुमार का अखबार में बयान आना यह दर्शाता है कि इस मामले में उनकी संलिप्तता है।

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अपनी बात

अरे गोविन्द पहलवान ‘शत् शत् नमन’ के योग्य नहीं हैं, ‘अच्छा हुआ मर गया ससुरा’ बोलने के लायक है

सत्तर वर्षीय गोविन्द पहलवान की मौत की खबर जैसे ही राघोपुर के लोगों के कानों तक पहुंची, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। गोविन्द पहलवान के आतंक से त्रस्त ग्रामीणों को लगा कि जैसे उन्हें बरसो पुरानी मन की मुराद मिल गई हो। गोविन्द पहलवान के मरने की खुशी में सभी ने अपने-अपने कुलदेवता की विशेष पूजा की, गांव के प्रधान देवता को भी लोगों ने चुपके से मिठाइयां चढ़ा दी,

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अपराध

बकोरिया कांड में शामिल लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में CBI को ज्यादा दिमाग लगाना नहीं पड़ेगा

चूंकि झारखण्ड उच्च न्यायालय ने बकोरिया कांड की सीबीआई जांच के आदेश दे दिये हैं, तो हमें नहीं लगता कि सीबीआई को इस जांच रिपोर्ट को झारखण्ड उच्च न्यायालय को सौंपने में ज्यादा समय लगेगा, क्योंकि मामला पूर्णतः आइने की तरह साफ हैं और इसके लिए बधाई देनी होगी, राज्य के उन पुलिस पदाधिकारियों को, जिन्होंने तरह-तरह के प्रलोभन मिलने एवं नाना प्रकार के दबावों के बावजूद अपनी नैतिकता को बचाये रखा,

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अपनी बात

मीडिया, व्यापारियों तथा कथित पंडितों के चक्कर में लालची बने भारतीय, धनतेरस के महत्व को भूला बैठे

अगर हम बाजार में बिक रही वस्तुओं में आनन्द को ढूंढने लगूं, पढ़-लिखकर अखबारों के विज्ञापन में आनन्द को ढूंढता रहूं तो मेरे पढ़ने का क्या मतलब? तब तो मैं उन मूर्खों से भी खत्म हूं, क्योंकि पढ़ने का अर्थ होता है, स्वयं को प्रकाशित करना, न कि किसी के द्वारा बनाये जा रहे, बेवकूफी का शिकार हो जाना। क्या तुमने नहीं पढ़ा… असतो मा सदगमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय. मृत्योर्माअमृतं गमय।

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