सत्तापक्ष व विपक्ष के नेताओं को राजभवन के ‘एट होम’ में शामिल होने का समय था, पर बोड़ेया के पीड़ित परिवार को ढांढ़स बंधाने का समय नहीं था
अरे मरनेवालों की संख्या कितना भी रहे, पर मरनेवाला का परिवार तो पंडित ही था न, अगर दलित-आदिवासी या पिछड़ा
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