अगर आपने रघुवर सरकार के खिलाफ आंदोलन किया, तो जेल जाने के लिए तैयार रहिये

झारखण्ड की रघुवर सरकार या उनके मंत्रियों के खिलाफ एक शब्द भी बोला या आंदोलन किया तो समझ लीजिये आपका कैरियर खराब करने के लिए, आपको जेल की सलाखों के अंदर डालने के लिए राज्य सरकार और उनके मातहत काम करनेवाले पुलिस अधिकारियों की टीम के कोपभाजन बने बिना आप नहीं रह पायेंगे। ये पुलिसवाले, अपने ही पुलिसकर्मियों से खुद ही आपके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायेंगे और आपका जीना दूभर कर देंगे।

झारखण्ड की रघुवर सरकार या उनके मंत्रियों के खिलाफ एक शब्द भी बोला या आंदोलन किया तो समझ लीजिये आपका कैरियर खराब करने के लिए, आपको जेल की सलाखों के अंदर डालने के लिए राज्य सरकार और उनके मातहत काम करनेवाले पुलिस अधिकारियों की टीम के कोपभाजन बने बिना आप नहीं रह पायेंगे। ये पुलिसवाले, अपने ही पुलिसकर्मियों से खुद ही आपके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायेंगे और आपका जीना दूभर कर देंगे।

एक सामान्य व्यक्ति भी जानता है कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा लोकतंत्रात्मक ढंग से अपनी बातों को रखने का अधिकार है, पर उन अधिकारों का दमन करना,  आंदोलनकारियों पर जुल्म करना आजकल भाजपाइयों का सबसे बड़ा काम बन गया है। आजकल ये यही कर रहे हैं, जिससे समाज का हर तबका परेशान और हैरान है। ताजा मामला है – लालपुर थाने में मंत्री के घर हंगामे के आरोप में दो आंदोलनकारियों पर केस दर्ज  करने का।

कुछ दिन पहले ही जल संसाधन व पेयजल मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी के आवास का कुछ आंदोलनकारियों ने घेराव किया था। इसी घेराव को लेकर आंदोलनकारी अजय चौधरी और संतोष महतो के खिलाफ हवलदार सोमरा टोप्पो ने प्राथमिकी दर्ज करा दी। प्राथमिकी मे कहा गया है कि पांच फरवरी को मंत्री के आवास में दर्जनों युवक जबरन घुस गये, और नारेबाजी करने लगे। मना करने पर गाली-गलौज करने लगे, मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी को भी अपशब्द कहे। उपद्रव करनेवालों को बताया गया  कि मंत्री राज्य से बाहर है, लेकिन वे कुछ भी सुनने को तैयार नही थे। प्रदर्शन की आड़ में ये युवक आवास पर हमला करने की तैयारी में थे। हंगामा करनेवाले आरक्षण अधिकार मोर्चा के सदस्य थे। इधर लालपुर थाने ने अपनी ओर से पूरी तैयारी कर ली है, यानी अब आंदोलन मत करिये, नहीं तो आपको महंगा पड़ेगा, सरकार के खिलाफ कुछ मत बोलिये, जो भी सरकार कर रही है, बस आप सहते जाइये, नहीं तो समझ लीजिये, क्या होगा…

इधर इस पूरे मामले पर सेंट्रल लाइब्रेरी में आदिवासी मूलवासी संगठनों एवं छात्र संगठनों की संयुक्त बैठक हुई, बैठक में पुलिस द्वारा झूठे केस किये जाने की कड़ी भर्त्सना की गई। युवा छात्र नेता वेद प्रकाश यादव का कहना था कि पुलिस यह सोच रही है कि झूठा केस कर के छात्रों का अहित कर देंगे तो वे नौकरी से बर्खास्त होने तथा जेल जाने को तैयार रहे, क्योंकि यहां अधिकतर छात्र अधिवक्ता तथा कानून के जानकार- विद्यार्थी है।

आदिवासी छात्र संघ के केन्द्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव ने कहा कि मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी, झारखण्ड हित को दरकिनार कर बदले की राजनीति कर रहे है। छात्र नेताओं पर झूठा केस करने से उनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता का पता सभी नौजवानों को लग गया है और यह सरकार और उनके मंत्री युवाओं का कोपभाजन बनने को तैयार रहे। मनोज यादव ने छात्रों पर पुलिस द्वारा लगाये गये आरोपों की तीखी आलोचना की तथा सफेद झूठ करार दिया।

Krishna Bihari Mishra

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