CM के काफिले पर हमला मतलब राज्य में खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल, थाना प्रभारियों पर गाज, रांची के SSP व DC पर कोई कार्रवाई नहीं

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कोई भी कांड हो, ये नीचे के पुलिस अधिकारियों पर जो कार्रवाई करने का धंधा हमारे राज्य में चल पड़ा हैं, इसे जल्दी बंद कर दीजिये, नहीं तो आप किसी जिंदगी में अपने राज्य में बलात्कार या मुख्यमंत्री के काफिले पर हमले को नहीं रोक सकते। ये क्या मजाक हुई कि सुखदेवनगर और कोतवाली थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया और रांची के उपायुक्त और एसएसपी को सिर्फ कारण बताओ नोटिस? क्या सचमुच यहां की जनता मूर्ख है, अरे भाई मुख्यमंत्री के काफिले पर हमला हुआ है, ये कोई मजाक नहीं है, अभी तक तो आप सिर कटी लाश का उद्भेदन तक नहीं किये हैं, ये बताता है कि राज्य का खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल है।

मैं भी पत्रकार हूं और सीआइडी के लोग बैठकर कैसे जुगाड़ फिट करते हैं, हमें पता है और ये आज की घटना नहीं है, ये झारखण्ड निर्माण से पहले से चला आ रहा है। आप टॉप के पदों पर सुखदेव सिंह या एमवी राव को भी बैठा देंगे तो  भी यहां कुछ नहीं होगा, क्योंकि यहां सरसो में ही भूत समा गया है। आप किसी ईमानदार पदाधिकारी को ठीक ढंग से काम नहीं करने देंगे, पैरवी और पैसे पर बहाली या स्थानान्तरण करेंगे तो वाजिब है, जिन पर सुरक्षा और बेहतर समाज बनाने का जिम्मा है, वे वहीं करेंगे, जो उनको रास आयेगा, वे समाज के लिए भला नहीं करेंगे।

कमाल है, मुख्यमंत्री के काफिले की सुरक्षा का भार किस पर होता है? बस सुखदेवनगर थाना और कोतवाली थाना प्रभारियों पर या उसका प्रोटोकॉल भी होता है। शाम के समय जहां ये घटना घटी है, वहां तो ऐसे भी भीड़ लगी रहती है, और जिन लोगों ने सोच समझकर इन घटनाओं को अंजाम दिया, उन्होंने तो तैयारी बहुत पहले ही कर ली होगी, इसका मतलब है, उनकी हरकतों को खुफियां तंत्र को जानकारी ही नहीं थी, जब जानकारी ही नहीं थी, तो आप निबटेंगे कैसे?

कमाल तो यह भी है कि कॉरकेड में शामिल गाड़ी का पहला वाहन भीड़ तक कैसे पहुंच गया, क्या उसे दूर से भीड़ भी नहीं दिखाई दी थी, भीड़ में जायेंगे तो जो पहले से तैयारी कर रखी है, वो तो आपको निशाना बनायेंगे ही। रही बात जिस भीड़ को भाजपाई बताया जा रहा है, तो ये समझ लीजिये कि इस घटना से केवल भाजपाई ही नाराज नहीं है, झारखण्ड की  एक-एक जनता नाराज है और इसकी गूंज आपतक सुनाई देनी ही चाहिए।

आश्चर्य होता है कि जहां मुख्यमंत्री के काफिले तक सुरक्षित नहीं, वहां सिर कटी लाश बेटी के अपराध में शामिल अपराधियों का सुराग मिलेगा? इसकी संभावना हमें दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती, हालांकि झामुमो व भाजपा एक दूसरे को बदनाम करने में लगे हैं, पर विद्रोही24 का मानना है कि इसके लिए अगर कोई दोषी है तो वह है – झारखण्ड पुलिस और उसका खुफिया तंत्र। जो पूरी तरह फेल हैं और ये फेल आज नहीं हुआ, बल्कि इसकी कहानियों के इतिहास बहुत लंबे है। जो भाजपा के शासनकाल तक जाते है।

मैंने तो ईटीवी में कार्य करने के दौरान धनबाद में ही देखा था कि एक थाने की पुलिस ने वहां के एसएसपी पर घूस लेने का आरोप लगाया था, किसी ने उस न्यूज को नहीं चलाया, सभी अखबार व चैनल सेट कर लिये थे, मैंने डंके की चोट पर उसे चलाया। एसएसपी को तो कुछ नहीं हुआ, पर बेचारा वह पुलिस जिनका नाम गिरिजेश प्रसाद था, उसे पदमुक्त कर दिया गया। जिस एसएसपी पर दाग लगा था, उसके बयान मैं आज एक अखबार में आज देख रहा हूं। मैं तो आज भी कह रहा हूं कि, जिस दिन सत्ता में बैठे नेता पैरवी व रिश्वत भूल जायेंगे, पुलिस तंत्र खुद ब खुद संभल जायेगा, और फिर किसी अपराधी की हिम्मत नहीं होगी कि वह ओरमांझी जैसे जघन्य कांड को अंजाम दे दें, या कोई मुख्यमंत्री के काफिले पर हमले कर दें।

आज झामुमो ने प्रेस कांफ्रेस कर बाबू लाल मरांडी को खुब बुरा भला कहा है। झामुमो के नेता सुप्रियो भट्टाचार्य का कहना है कि जो सीसीटीवी फूटेज खंगाले जा रहे है, उसमें भाजपा के ही लोग दिखाई पड़ रहे हैं, अरे भाई तो आपको रोक कौन रहा है, पकड़िये उन्हें सजा दिलाइये, लेकिन ये बयान देने से क्या होगा?

अभी भाजपा के नेताओं के खिलाफ बयानबाजी का समय नहीं, बल्कि अपनी पुलिस तंत्र को बेहतर बनाने का समय है। जरा देखिये, आपके पुलिस की हरकत जिस पर एक पत्रकार ने अपने सोशल साइट पर टिप्पणी कर दी, ऐसा नही कि ये हरकतें केवल झारखण्ड में ही होती है, ये तो सब जगह की घटना है, पकड़ा गये तो पकड़ा गये, नहीं पकड़ाये तो संत बने हुए है, आखिर कौन है ऐसा पुलिसकर्मी जो ऐसी गंदी हरकतें करता है, सबूत नीचे हैं।

अंत में जो लोग आंदोलन के नाम पर कुकर्म कर रहे हैं, उन्हें मैं कह देता हूं कि आप अपने बच्चों को स्मार्ट फोन देंगे और उसमें 2जीबी डाटा मुफ्त प्रदान करायेंगे, फिर सोचेंगे कि हमारा परिवार/समाज सही दिशा में जाये, तो ये नहीं हो सकता, क्योंकि फिलहाल ये 2जीबी मुफ्त का नशा, आपके परिवार के बच्चों को संस्कारहीन बना रहा है, इसे समझने की कोशिश कीजिये, उसे हर लड़की अब मां-बहन नहीं दिखती, केवल वह उसे सेक्स की नजरों से देख रहा है, इसलिए वह कब कुकर्म कर बैठे, कोई कह नही सकता।

मैं ये नहीं कहता कि सारे के सारे बच्चे जो 2जीबी का उपयोग कर रहे हैं, वे सभी गलत है, पर ये भी सच्चाई है कि इनमें से ज्यादातर ऐसे लोगों की मानसिकता ये 2जीबी सिस्टम बिगाड़ रहा हैं, सरकार को चाहिए कि इस पर नियंत्रण करें, कानून लायें, नहीं तो समाज को बर्बाद होने से कोई रोक नहीं सकता। साथ ही गलतियां कोई भी करें, उसके किये की सजा तुरन्त मिले, छोटे कर्मचारियों की अपेक्षा बड़े पदाधिकारियों को भी उस प्रकार की सजा मिले, जो एक सबक हो, तो फिर देखिये, सारा तंत्र ही ठीक हो जायेगा, पर ऐसा कौन करेगा?

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