पहले सन्मार्ग प्रबंधन के दबाव में आकर हुए विवश, अब जब नवल सिंह को मिली सफलता तब बदले मिजाज

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सन्मार्ग में कार्य करनेवाले वे संवाददाता व छायाकार, जो सन्मार्ग प्रबंधन के आगे कभी विवश हुए थे, अब उन्हें भी मिलेगा भविष्य निधि तथा अन्य मदों का लाभ, क्योंकि क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त विकास आनन्द ने उन सभी पर कृपा दृष्टि बरसा दी है। विद्रोही24 के पास ऐसे दस्तावेज है, जो बताने के लिए काफी है, कि जब सन्मार्ग प्रबंधन ने आंदोलन कर रहे अपने कर्मियों को निष्कासन का डंडा दिखाया।

साथ ही तत्कालीन प्रधान सम्पादक बैजनाथ मिश्र पर भी इतना दबाव डाल दिया कि उनके पास चुप्पी साधने के अलावे दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा, जिसके कारण ये सारे कर्मी सीधे प्रबंधन के आगे नतमस्तक हो गये और एक लिखित आवेदन जिसे धन्यवाद ज्ञापन का उनलोगों ने नाम दिया, प्रबंधन को सौंप दिया। ये पत्र एक सितम्बर 2017 को इन सब ने लिखे थे, जिसमें लिखा था –

“सेवा में, निदेशक सह संपादक, सन्मार्ग, हिन्दी दैनिक, रांची। विषय – हमारी मांगे पूर्ण होने पर धन्यवाद ज्ञापन। महाशय, अपार हर्ष के साथ कहना है कि हमारे पत्र दिनांक 10.01.2017, 02.03.2017, 30.03.2017 एवं 08.06.2017 के आलोक में हमारी मांगों को प्रबंधन की ओर से स्वीकृति दे दी गई है एवं पीएफ, इएसआइ के भी अंशदान 2015 से ही दी जाने लगी है। प्रबंधन के वित्तीय स्थिति एवं सर्कुलेशन को ध्यान में रखते हुए हमारे वेतन में की गई बढ़ोत्तरी से भी हम सभी कर्मचारियों में खुशी की लहर है, जिसके लिए हम सभी कर्मचारीगण सहृदय धन्यवाद देते हैं।

अब हमारी मांगे पूरी हो चुकी है। हमें प्रबंधन से कोई शिकायत शेष नहीं रह गई है। सधन्यवाद। विश्वासभाजन। मनोज कुमार, अमित सिंह, विनोद पाठक, आशीष कुमार, चंदन चौधरी, आदिल रशीद, मुन्ना कामदा, हेमन्त सूत्रधार।” यह पत्र अपने पक्ष को मजबूती प्रदान करने के लिए सन्मार्ग प्रबंधन ने उप-श्रमायुक्त रांची के यहां पांच सितम्बर 2017 को प्रस्तुत किया था, मालूम हो कि इसके पूर्व वरीय संवाददाता नवल किशोर सिंह ने उप-श्रमायुक्त के यहां 05 अगस्त 2017 को सन्मार्ग प्रबंधन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर शिकायतवाद दर्ज कराया था, जिसे गलत साबित करने के लिए प्रबंधन ने उप-श्रमायुक्त के यहां उक्त दस्तावेज प्रस्तुत किया था।

बताया जाता है कि जैसे ही भविष्य निधि आयुक्त ने 21 कर्मियों के पक्ष में आर्डर जारी किया है, इन 21 कर्मियों की खुशियां देखते बन रही है, वहीं दूसरी तरफ यहीं काम कर रहे अन्य कर्मियों में ये निराशा घर कर रही है कि आखिर उनके साथ ऐसा अन्याय क्यों? यह लाभ पाने के तो वे भी अधिकारी हैं।

1 Comment
  1. Uday mishra says

    बहुत बढ़िया

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