त्रिपुरा में भाजपा को मिली जीत में अर्जुन मुंडा की भी महत्वपूर्ण भूमिका

त्रिपुरा में भाजपा ने गजब ढाया है। 25 साल पुरानी वामपंथियों के लाल दुर्ग को भाजपा ने धूल-धूसरित कर दिया है। त्रिपुरा, नागालैंड में मिली शानदार जीत से भाजपा ने नार्थ-ईस्ट में अपनी पकड़ बहुत तेजी से मजबूत की है। इसके लिए, राजनीतिक पंडितों का समूह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को सारा श्रेय दे रहा है।

त्रिपुरा में भाजपा ने गजब ढाया है। 25 साल पुरानी वामपंथियों के लाल दुर्ग को भाजपा ने धूल-धूसरित कर दिया है। त्रिपुरा, नागालैंड में मिली शानदार जीत से भाजपा ने नार्थ-ईस्ट में अपनी पकड़ बहुत तेजी से मजबूत की है। इसके लिए, राजनीतिक पंडितों का समूह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को सारा श्रेय दे रहा है। कुछ लोग इसका श्रेय भाजपा के रणनीतिकार राम माधव को दे रहे हैं तो कुछ मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार बिप्लव कुमार देब को, पर शायद ही किसी को, अभी झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा याद आ रहे होंगे, जबकि त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के दौरान, अर्जुन मुंडा ने भी उन इलाकों का धुंआधार दौरा किया, जहां झारखण्डियों-आदिवासियों की बाहुल्यता थी। वहां जाकर अपनी भाषा में जैसे ही उन्होंने लोगों से बातचीत करना शुरु किया, उसका प्रभाव त्रिपुरा में दिखता चला गया।

फिलहाल अर्जुन मुंडा, इन सबसे बेखबर, रांची में बैठे हैं, तथा त्रिपुरा के चुनाव परिणाम से आह्लादित हैं, शायद उन्हें लग रहा है कि उनके द्वारा किया गया छोटा सा प्रयास रंग लाया, और जो पार्टी ने उन पर जिम्मेवारी सौंपी, उन जिम्मेवारियों को उन्होंने बेहतर ढंग से निभाया। ज्ञातव्य है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान भी अर्जुन मुंडा ने गुजरात के कई आदिवासी बहुल इलाकों में जाकर भाजपा का चुनाव प्रचार किया था। गुजरात हो या त्रिपुरा, भाजपा ने झारखण्ड से चुनाव प्रचार के लिए अर्जुन मुंडा पर ही ज्यादा विश्वास किया, जबकि मुख्यमंत्री रघुवर दास को पार्टी ने वो तवज्जों नहीं दी।

अर्जुन मुंडा ने स्वयं द्वारा किये गये कार्यों से अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर दी, पर झारखण्ड में रघुवर सरकार, उनके द्वारा बताये जा रहे दिशा-निर्देशों की अवहेलना करने से नहीं चूकती, फिर भी अर्जुन मुंडा आनेवाले भविष्य को लेकर सजग दीख रहे हैं, आज भी झारखण्ड में भाजपा कार्यकर्ताओं में अगर सर्वाधिक कोई लोकप्रिय नेता हैं तो वह हैं – अर्जुन मुंडा। भाजपा कार्यकर्ताओं का समूह तो आज भी कहता है कि रघुवर दास ने कभी कार्यकर्ताओं को इज्जत नहीं दी, जबकि अर्जुन मुंडा, मुख्यमंत्री रहे या न रहे, उन्होंने हमेशा कार्यकर्ताओं को तवज्जों दी, इज्जत दी। शायद यहीं कारण है कि जब वे त्रिपुरा चुनाव प्रचार के लिए गये, तो वहीं के भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी उन्हें हाथों-हाथ लिया और वे अपनी बातों से चुनाव प्रचार के दौरान सभी को अपना बनाने में सफल रहे, जिसका नतीजा सामने है।

Krishna Bihari Mishra

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