भूमि अधिग्रहण के मु्द्दे पर सदन में ही हेमन्त ने लिया सीएम रघुवर दास को रडार पर

भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को लेकर मानसून सत्र के पहले दिन ही सत्तापक्ष और विपक्ष में तू-तू, मे-मे हो गई। विपक्ष किसी भी हाल में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को लेकर रघुवर सरकार को माफ करने के पक्ष में नहीं हैं। आज जैसे ही सदन में नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने अपनी बात रखनी चाही, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपनी सीट से उठकर, अध्यक्ष दिनेश उरांव से कहा कि भूमि अधिग्रहण पर चर्चा नहीं होनी चाहिए, फिर क्या था, हेमन्त सोरेन ने सीएम रघुवर दास को अपने निशाने पर लिया और स्पीकर से साफ कह दिया कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया, ऐसे में सीएम बिना अनुमति के ही कैसे बोल रहे हैं? यह सरासर गुंडागर्दी है, हालांकि बाद में गुंडागर्दी शब्द को स्पंज कर दिया गया।

हेमन्त सोरेन के इस बयान के बाद पूरे सदन में हंगामा बरपना तय था, इसलिए बाकी काम सत्तापक्ष के लोगों ने कर दिया, जमकर सत्तापक्ष के लोग हंगामा मचाने लगे, वे हेमन्त सोरेन से माफी मांगने की जिद कर रहे थे, जिस पर नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने सदन में ही कहा कि हंगामा करना ही हैं तो वे वेल में आ जाये, धरना दे दें। सदन कोई मुख्यमंत्री का जागीर नहीं हैं, कि जो मन में आये वे करते रहेंगे।

झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि दरअसल भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक जमीन लूट के लिए बना है, उनकी पार्टी सदन चलाना चाहती है, लेकिन इस बिल को कतई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। भूमि अधिग्रहण विधेयक संशोधन विधेयक को लेकर सत्तापक्ष की प्लानिंग और विपक्ष द्वारा किया जा रहा विरोध, बताने के लिए काफी है कि छः दिनों तक चलनेवाला यह मानसून सत्र भी हंगामें की भेंट चढ़ जायेगा, क्योंकि जब मुख्यमंत्री रघुवर दास ही भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष के नेताओं को बोलने नहीं देना चाहते, तो स्पष्ट है कि विपक्ष भी इससे कमतर जाने के मूड में नहीं हैं।

विपक्ष हर हाल में सत्तापक्ष को सदन के अंदर और सदन के बाहर दोनों जगहों पर जवाब देने को समुचित रुप से तैयार बैठा है, जिसकी झलक आज मानसून सत्र के पहले दिन ही देखने को मिल गई। अगर ये छः दिन का मानसून सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ जाता हैं, तो समझ लीजिये झारखण्ड विधानसभा सदन नहीं चलने देने का विश्वस्तरीय रिकार्ड बनाने की ओर अग्रसर हैं।