संपूर्ण विपक्ष का राजभवन के समक्ष भूमि अधिग्रहण को लेकर ऐतिहासिक धरना

भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक के विरोध में संपूर्ण विपक्ष का राजभवन के समक्ष ऐतिहासिक धरना आज देखने को मिला। इस धरना से राजधानी रांची के कई इलाके अस्त-व्यस्त होते दिखाई दिये। पहली बार राजधानी रांची के राजभवन के समक्ष एकता के सूत्र में बंधकर सारे के सारे विपक्षी दलों के नेताओं ने राज्य सरकार को चेताया

भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक के विरोध में संपूर्ण विपक्ष का राजभवन के समक्ष ऐतिहासिक धरना आज देखने को मिला। इस धरना से राजधानी रांची के कई इलाके अस्त-व्यस्त होते दिखाई दिये। पहली बार राजधानी रांची के राजभवन के समक्ष एकता के सूत्र में बंधकर सारे के सारे विपक्षी दलों के नेताओं ने राज्य सरकार को चेताया कि भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पर आम जनता की भावनाओं को वह समझने का प्रयास करें, नहीं तो सत्ता से हटाने के लिए संपूर्ण विपक्षी दलों का यह संग्राम अनवरत जारी रहेगा।

इस राजभवन के समक्ष किये गये धरने में विभिन्न राजनीतिक दलों के सभी जिलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि राजधानी रांची के कई इलाकों में जिंदगी ससरती हुई नजर आई। इस धरने में नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन के साथ-साथ उनकी पूरी टीम नजर आई, जबकि मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेतृ वृंदा करात भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ राजभवन के समक्ष धरने पर आ धमकी। यहीं नहीं कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय, प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार, प्रवक्ता आलोक दूबे, महिला नेतृ आभा सिन्हा भी राजभवन के समक्ष दिखाई दिये। यहीं हाल भाकपा माले की ओर से भी था, भाकपा माले नेता विनोद कुमार सिंह भी अपनी टीम के साथ राजभवन के समक्ष दिखाई पड़ें।

झारखण्ड विकास मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी तथा अन्य दलों के भी कई नेता व कार्यकर्ता के साथ-साथ भारी संख्या में सामान्य जनता भी इस धरने में शिरकत करते देखी गई, जिसके कारण यह धरना महाधरना में परिवर्तित होता दिखाई दिया। भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक के खिलाफ संपूर्ण विपक्ष का ये महाधरना राज्य सरकार के लिए साफ संदेश है कि यहां का विपक्ष राज्य सरकार को इस मुद्दे पर छोड़ने नहीं जा रहा।

आज के महाधरने में शामिल सारे नेताओं का एक ही मकसद था कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को लेकर राज्य की जनता की भावनाओं को समझे, इसे तुरंत वापस ले, क्योंकि ये जनहित में नहीं है, इससे राज्य की जनता को नुकसान होना तय हैं, यहां के लोगों के जमीनों पर पूंजीपतियों का कब्जा हो जायेगा, और ये फिर दर-दर भटकने को मजबूर हो जायेंगे, सारे के सारे नेताओं ने कहा कि भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक से झारखण्ड के आदिवासियों-मूलवासियों का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा।

Krishna Bihari Mishra

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