अजय को भेजा गया था कांग्रेस को मजबूत करने के लिए, पर उसने JVM को स्थापित कर दिया – फुरकान

डा. अजय कुमार को झारखण्ड भेजा गया था, राज्य में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए, पर इस व्यक्ति ने कांग्रेस को मजबूत तो नहीं ही किया, ठीक इसके उलट झारखण्ड विकास मोर्चा को राज्य में स्थापित अवश्य करा दिया, ये वक्तव्य है कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी का, जो विद्रोही24.कॉम से बातचीत के क्रम में बोल रहे थे।

डा. अजय कुमार को झारखण्ड भेजा गया था, राज्य में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए, पर इस व्यक्ति ने कांग्रेस को मजबूत तो नहीं ही किया, ठीक इसके उलट झारखण्ड विकास मोर्चा को राज्य में स्थापित अवश्य करा दिया, ये वक्तव्य है कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी का, जो विद्रोही24.कॉम से बातचीत के क्रम में बोल रहे थे।

फुरकान अंसारी का कहना था कि उनका जीना-मरना कांग्रेस में हैं, वे इस पार्टी के खिलाफ कैसे जा सकते हैं, पार्टी जो भी उन्हें कहेंगी, उसका वे अक्षरशः पालन करेंगे, पार्टी के खिलाफ जाने का तो सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. अजय कुमार ने झारखण्ड प्रभारी आरपीएन सिंह तक को डार्क में रखा, उनसे भी गलत करवा दिया और राज्य की सही वस्तुस्थिति की जानकारी उन्हें नहीं होने दी।

फुरकान अंसारी ने झारखण्ड प्रभारी आरपीएन सिंह को सारी बातें बताई है कि कांग्रेस कैसे इस राज्य में कमजोर हो गई। उनका कहना था कि जिस गोड्डा में कांग्रेस का झंडा 1952 से लहरा रहा था, आज दुर्भाग्य है कि वहां अब झाविमो का झंडा लहरायेगा, जबकि झाविमो का वहां कोई अस्तित्व ही नहीं। उन्होंने कहा कि हमने आरपीएन सिंह को साफ कह दिया कि राज्य में अजय कुमार ने ठीक नहीं किया है।

ये पहली बार कांग्रेस के इतिहास में होगा, कि गोड्डा में कांग्रेस का प्रत्याशी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अरे फुरकान अंसारी से अगर दुश्मनी थी, तो वे फुरकान अंसारी को टिकट नहीं देते, किसी अन्य को टिकट दे देते, तब भी हमें कोई परेशानी नहीं होती, दिक्कत नहीं होती, मैं समझता कि चलो आखिर कांग्रेस का ही कोई बंदा चुनाव जीतेगा, पर यहां तो कांग्रेस ही साफ हो गई। उन्होंने कहा कि फुरकान को अपनी चिन्ता कभी नहीं रही, पर कांग्रेस पार्टी की चिन्ता अवश्य रही।

उन्होंने कहा कि आज राज्य की जो स्थिति हैं, इस घटना से सारा अल्पसंख्यक समाज दुखी है, वे आज हमसे कह रहे है कि भाजपा तो मुस्लिमों को टिकट नहीं देती, और अब तो कांग्रेस भी मुस्लिमों के टिकट काट रही हैं तो हम कांग्रेस के साथ क्यों जायें? वे उनसे कह रहे हैं कि यह जो हो रहा हैं, ठीक नहीं हो रहा, मुस्लिमों के कई बड़े नेताओं ने उन्हें यह भी कहा कि आप हमेशा कांग्रेस की तारीफदारी करते रहे हैं, आइन्दा कभी कांग्रेस की तारीफदारी उनके सामने ना करेंगे।

यह सवाल पर कि महागठबंधन के कई नेता, यहां तक कि कांग्रेस के भी बड़े नेता अल्पसंख्यक समुदाय के एक व्यक्ति को राज्यसभा में भेजने की बात कह रहे हैं और उसमें आपका ही नाम आ रहा हैं, इस पर फुरकान अंसारी का कहना था कि राज्यसभा का चुनाव झारखण्ड में कैसे होता हैं? क्या आपको नहीं पता? मैं किसान का बेटा कहां से इतना करोड़ों रुपये लाऊंगा, मैं कितनी बार विधायक बना, सांसद भी बना और आज तक नोट नहीं बटोर सका, राज्यसभा में जाने के लिए उतने नोट कहां से लाऊंगा?

मेरे पिता जब जीवित थे, तो कहा करते थे कि किसान खाता है, खिलाता है, तुम किसान से नेता बनने जा रहे हो, कभी दो नंबर का काम नहीं करना, अब आप ही बताओ, मैं कहां से इतने रुपये लाऊंगा कि राज्यसभा चला जाउं। जो पेंशन मिलता है, तो उससे मैं अपना खुराक और परिवार चला रहा हूं, कहां से राज्यसभा जाने के लिए करोड़ों का बंडल लाऊंगा, कोई बताएं हमें?

फुरकान अंसारी ने विद्रोही 24.कॉम से बातचीत में यह भी कहा कि डा. अजय कुमार का ये कहना कि बाबू लाल मरांडी आदिवासियों के कद्दावर नेता हैं तो डा. अजय कुमार, उन्हें आदिवासियों के लिए सुरक्षित सीट से क्यों नहीं उम्मीदवारी तय कर दें रहे हैं, उन्हें कोडरमा से क्यों चुनाव लड़वाया जा रहा है? कोडरमा और गोड्डा तो शुरु से ही कांग्रेस का रहा है, अब झाविमो को दे दिया गया, आखिर ये कौन सी राजनीति या रणनीति हैं, जहां हम खुद ही कमजोर होकर, दुसरी ऐसी पार्टी को मजबूत कर रहें, जिसका कोई जनाधार ही नहीं।

फुरकान अंसारी, हालांकि नाराज अल्पसंख्यकों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं पर नाराज अल्पसंख्यक मान ही जायेंगे, ऐसा देखने को मिल नहीं रहा, हो सकता है कि कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ जाये, क्योंकि हाल ही में रांची में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग इस मुद्दे पर जुटे थे, जिनमें इस बात को लेकर गुस्सा था कि राज्य में पहली बार लोकसभा का चुनाव हो रहा हैं, जिसमें एनडीए और महागठबंधन दोनों ओर से एक भी मुस्लिम कैंडिडेट नहीं हैं, अगर ये जनाक्रोश, वोट के आक्रोश में बदला तो नुकसान, किसका होगा, समझा जा सकता है।

Krishna Bihari Mishra

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