ये हैं देश का हाल, चार साल की बच्ची को दिल में छेद, एम्स ने दिया 2023 में ऑपरेशन का समय

जरा सोचिये, आप या आपके परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो, और उसकी बीमारी को ठीक करने के लिए ऑपरेशन की तुरंत आवश्यकता हो, और डाक्टर ऑपरेशन की तारीख पांच साल बाद की सुनिश्चित करें, तो आपको कैसा लगेगा? यह मैं इसलिए लिख रहा हूं कि ठीक इसी प्रकार का एक मामला दिल्ली एम्स में मिला है, जहां एक बच्ची के ऑपरेशन की तिथि 2023 में दे दी गई है।

जरा सोचिये, आप या आपके परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो, और उसकी बीमारी को ठीक करने के लिए ऑपरेशन की तुरंत आवश्यकता हो, और डाक्टर ऑपरेशन की तारीख पांच साल बाद की सुनिश्चित करें, तो आपको कैसा लगेगा? यह मैं इसलिए लिख रहा हूं कि ठीक इसी प्रकार का एक मामला दिल्ली एम्स में मिला है, जहां एक बच्ची के ऑपरेशन की तिथि 2023 में दे दी गई है।

एम्स का ये मामला, ये बताने के लिए काफी है कि देश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का क्या हाल है? आखिर कौन हैं, इसका दोषी? उत्तर स्पष्ट है कि हमारे देश की वे सरकारें जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल कर दिया, और इसके लिए वे सभी पार्टियां दोषी हैं, जिन्होंने इस देश पर राज किया और स्वास्थ्य सेवा को पुरी तरह नष्ट कर दिया। सच्चाई यह है कि देश में सरकारी अस्पतालों में इलाज करानेवालों को न तो बेहतर चिकित्सा उपलब्ध हो रही हैं और न ही दवाएं, ऐसे में बेचारे गरीब क्या करें, कहां जाये?

एम्स यानी अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान नई दिल्ली में एक चार साल की बच्ची को अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन के लिए लगभग पांच साल के बाद की तिथि यानी 2023 साल की एक तारीख मुकर्रर की है। तृषा नामक की यह बच्ची दिल की बीमारी से ग्रसित है, बताया जाता है कि उसके दिल में एक सुराख है, जब इस बच्ची को लेकर उसके परिवारवाले एम्स पहुंचे तब प्रशासन ने इसके आपरेशन के लिए 2023 में बुलाया है। अगर अस्पताल प्रशासन की बात करें तो वह बताता है कि उनकी मजबूरी है, इसमें उनका कोई दोष नहीं, क्योंकि मरीज ज्यादा होने के कारण वेटिंग लिस्ट पांच-पांच साल को पार कर रही हैं। यह कोई आज का मामला नहीं है, मरीजों की लंबी वेटिंग एम्स के लिए वर्षों से चुनौती बनी हुई है।

तृषा का पिता राम किशोर जब इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से पुछता है कि उसकी बच्ची इतनी गभीर बीमारी से ग्रसित है, और उसको जल्द ऑपरेशन नहीं हुआ तो उसकी बचने की उम्मीद नहीं, तब अस्पताल प्रशासन के लोग बोलते है कि उनके पास संसाधनों की संख्या सीमित है, और मरीज कई गुणा ज्यादा, तो वे कर ही क्या सकते हैं, बेचारा राम किशोर यह सुनते ही घबरा जाता है कि क्या करें और क्या न करें?

भोपाल निवासी रामकिशोर चौरसिया, पिछले ढाई सालों से दिल्ली के सरिता विहार में डेरा रखे हुए है। जब उनकी बच्ची तृषा को दिल की बीमारी का पता चला तो वे अस्पताल पहुंचे, तब डाक्टरों ने बच्ची के ऑपरेशन कराने की सलाह दी, साथ ही ऑपरेशन के लिए 55 हजार रुपये की फीस बताई, चूंकि एम्स में 6 सितम्बर 2023 से पहले का समय ऑपरेशन के लिए नहीं हैं, ऐसे में उसे अन्य स्थानों पर ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई।

कुछ लोग बताते है कि भारत की बढ़ती जनसंख्या, केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण पर काबू नहीं पाना तथा स्वास्थ्य सेवा पर सरकार का ध्यान नहीं देना, इस समस्या का मूल कारण है, अगर केन्द्र व राज्य सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान नहीं दिया, स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान नहीं दिया तो भारत की स्थिति भयावह होगी, ये केन्द्र व राज्य सरकार के साथ-साथ यहां की जनता को भी इस पर सोचना चाहिए, नहीं तो आनेवाली भयावह त्रासदी को झेलने के लिए तैयार रहिये, छोटी सी बच्ची तृषा के साथ एम्स की ये घटना, ये बताने के लिए काफी है कि आनेवाला समय कैसा है?

Krishna Bihari Mishra

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