नौ भारतीय भाषाओं में योगदा सत्संग ऑनलाइन ध्यान की होगी शुरुआत, YSS अध्यक्ष स्वामी चिदानंद करेंगे शुभारंभ 

योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाइएसएस) द्वारा ऑनलाइन सामूहिक ध्यान का आयोजन रविवार से किया जाएगा। यह ध्यान अंग्रेज़ी के अलावा हिंदी, बंगला, ओड़िया, गुजराती, मलयालम, कन्नड़, तेलुगू, तमिल और मराठी में भी संचालित किया जाएगा। कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण योगदा आश्रम और ध्यान केंद्रों के बंद रहने के कारण साधकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन सामूहिक ध्यान और प्रार्थना की व्यवस्था की गई है।

योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाइएसएस) द्वारा ऑनलाइन सामूहिक ध्यान का आयोजन रविवार से किया जाएगा। यह ध्यान अंग्रेज़ी के अलावा हिंदी, बंगला, ओड़िया, गुजराती, मलयालम, कन्नड़, तेलुगू, तमिल और मराठी में भी संचालित किया जाएगा। कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण योगदा आश्रम और ध्यान केंद्रों के बंद रहने के कारण साधकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन सामूहिक ध्यान और प्रार्थना की व्यवस्था की गई है।

मार्च 2020 से ऑनलाइन सामूहिक ध्यान योगदा सत्संग द्वारा अंग्रेज़ी में किया जा रहा है। इन ध्यान-सत्रों की बढ़ती लोकप्रियता और इन में भाग लेनेवाले श्रद्धालुओं और साधकों की निरंतर बढ़ती संख्या को देखते हुए योगदा संन्यासियों के संचालन में भारतीय भाषाओं में ऑनलाइन सामूहिक ध्यान की विशेष व्यवस्था की जा रही है।

रविवार की सुबह 7.30 बजे इसका शुभारंभ वाइएसएस/एसआरएफ के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद गिरि द्वारा किया जाएगा। तीन घंटे के इस उद्घाटन सत्र के आरंभिक एक घंटे तक स्वामी चिदानंद का मार्गदर्शन प्राप्त होगा, जबकि शेष दो घंटे तक इसका संचालन योगदा के संन्यासी करेंगे। योगदा सत्संग की एक विज्ञप्ति के अनुसार ऑनलाइन सामूहिक ध्यान के अलावा श्रद्धालुओं के लिए विशेष तौर पर तैयार किए गए आध्यात्मिक साधना शिविर (रिट्रीट) और विशेष कार्यक्रम भी ऑनलाइन प्रारूप में आयोजित किए जाएँगे।

जैसा कि वाइएसएस/एसआरएफ के संस्थापक श्री श्री परमहंस योगानंद ने कहा था और सभी योग साधक जानते भी हैं, सामूहिक ध्यान में भाग लेनेवाले हर सदस्य की आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने की गति अत्यंत तीव्र होती है। समूह में ध्यान करने से हर सदस्य की अदृश्य सकारात्मक तरंगें परस्पर एक-दूसरे को तरंगायित करती हुईं चुम्बकीय गुण पैदा करती हैं। इस कारण से कोविड़-19 महामारी से संतप्त आज के संसार में इन ऑनलाइन ध्यान-सत्रों का एक विशेष महत्व है, और जिन साधकों ने इसे अपनाया है वे इसे बखूबी समझते हैं।

Krishna Bihari Mishra

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