वाह भाई, गलती करें धनबाद SSP/SP व जिला प्रशासन और मुड़ी कटाएं धनबाद थाने का थानेदार

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कमाल है, इधर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आंखे क्या तरेरी। धनबाद पुलिस हरकत में आ गई। बिना देर किये धनबाद थाने के थानेदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। अब सवाल उठता है कि क्या धनबाद थाने का थानेदार खुद से तीन हजार लोगों पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था, या उपर से उसे आदेश दिया गया था, क्योंकि राजद्रोह की धारा बिना किसी के इशारे पर तो धनबाद थानेदार ने लगाया नहीं होगा, तो आखिर वह कौन आदमी था, वह कौन अधिकारी था, जिसके कहने पर धनबाद थानेदार ने 3000 लोगों पर राजद्रोह की धारा लगा दी।

ऐसे हम आपको बता दें कि पिछली रघुवर सरकार में जिस प्रकार इस राजद्रोह की धारा 124 ए का दुरुपयोग हुआ हैं, वैसा किसी धारा के साथ नहीं हुआ। अगर आप सरकार के समक्ष अपनी बात रखते हैं, आप राजद्रोही हो गये, आपके खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा ठोक दिया गया। अब आप थाने और कोर्ट का चक्कर काटते रहिये, अपना जीवन तबाह करते रहिये। सरकार बदली, लोगों को लगा कि अब उनके साथ न्याय होगा। हेमन्त सोरेन ने न्याय किया और लीजिये देखते ही देखते खूंटी में जिन-जिन लोगों पर राजद्रोह का मुकदमा चल रहा था,  हेमन्त सोरेन ने अपने पहले ही कैबिनेट में उन मुकदमों को वापस लेने की घोषणा कर दी।

इधर हेमन्त सोरेन ने इतना बड़ा फैसला लिया, पर धनबाद जिला प्रशासन और धनबाद के एसएसपी को इस बात की शायद जानकारी ही नही थी, तभी तो गत मंगलवार यानी 7 जनवरी 2020 को धनबाद में CAA के खिलाफ मुसलमानों द्वारा निकाले गये एक जुलूस में शामिल करीब 3000 लोगों पर राजद्रोह का मुकदमा ठोक दिया। हालांकि यह भी सत्य है कि इस जुलूस में आपत्तिजनक नारे लगाये गये थे, जिसे किसी भी रुप में समर्थन नहीं किया जा सकता, पर आप केवल इस आपत्तिजनक नारे पर जब राजद्रोह का मुकदमा ठोकते चले जायेंगे तो यह भी मान कर चलिये कि ऐसा देश में कोई भी व्यक्ति नहीं, जिस पर राजद्रोह का मुकदमा न चल जाये, क्योंकि वर्तमान में देशभक्तो की संख्या अब हमारे यहां अंगूलियों पर गिनने लायक हैं।

राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को जैसे ही इस बात की जानकारी मिली, वे एक्शन में आ गये। उन्होंने अपने फेसबुक साइट पर अपनी बातें रखी। उन्होंने कहा कि “ कानून जनता को डराने एवं उनकी आवाज दबाने के लिए नहीं बल्कि आम जनमानस में सुरक्षा का भाव उत्पन्न करने को होता है। मेरे नेतृत्व में चल रही सरकार में कानून जनता की आवाज को बुलंद करने का कार्य करेगी। धनबाद में 3000 लोगों पर लगाए गये राजद्रोह की धारा को अविलम्ब निरस्त करने के साथ-साथ दोषी अधिकारी के खिलाफ समुचित कार्रवाई  अनुशंसा कर दी गई है। साथ ही मैं झारखण्ड के सभी भाइयों-बहनों से अपील करना चाहुंगा कि राज्य आपका है,यहां के कानून-व्यवस्था का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।”

इधर सीएमओ हरकत में आया।  उधर धनबाद के सिटी एसपी की ओर से एक पत्र धनबाद के थानेदार संतोष कुमार को प्रेषित होता है। उससे इस संबंध में स्पष्टीकरण पूछा जाता है। इसकी एक प्रति एसएसपी धनबाद को भेजा जाता हैं , जो आम तौर पर किया जाता है। आखिर उस पत्र में लिखा क्या हैं, उसे देखिये…

“उपर्युक्त विषय के संबंध में सूचित करते हुए कहना है कि प्रशांत कुमार लायक, अंचल अधिकारी, धनबाद के द्वारा दिनांक 7 जनवरी 2020 को CAA/NRC/NRP  के विरुद्ध काफी संख्या में वासेपुर के लोगों द्वारा बिना सूचना के गया पुल से पूजा टॉकीज/सिटी सेन्टर/रणधीर वर्मा चौक तक जुलूस प्रदर्शन करने के संबंध में लिखित आवेदन के आधार पर सात नामजद एवं करीब 3000 अज्ञात के विरुद्ध धनबाद थाना में कांड संख्या 12/2020, दिनांक 7 जनवरी 2020, धारा – 143, 145, 149, 186, 188, 290, 291, 336, 153ए, 153बी, 124ए  भादवि दर्ज किया गया है।

उल्लेखनीय है कि आपके द्वारा इस कांड में धारा 124 ए का भी समावेश किया गया है, जबकि आवेदन के अवलोकन से धारा 124ए का कोई औचित्य प्रतीत नहीं हो रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि आपके द्वारा प्राथमिकी के आवेदन को गहराई से बिना अवलोकन के ही कांड पंजीकृत किया गया है। जो आपके घोर लापरवाही, मनमानेपन,स्वेच्छाचारिता एवं एक अयोग्य पुलिस पदाधिकारी होने का परिचायक है। अतः उक्त त्रुटि के लिए अपना स्पष्टीकरण तीन दिनों के अंदर समर्पित करना सुनिश्चित करें। ससमय स्पष्टीकरण समर्पित नहीं करने पर आपके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई प्रारम्भ कर दी जायेगी।”

अब सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के एक्शन में आने पर एक धनबाद थानेदार को उलटा टांगने का प्रबंध कर दिया गया और बाकी के पुलिस उच्चाधिकारी खुद को गंगाजल से पवित्र करने का इंतजाम कर लिया, क्या ये सही है? क्या इतने बड़े जुलूस से संबंधित कांड की प्राथमिकी दर्ज करने में धनबाद थानेदार ने अपने उच्चाधिकारियों से परामर्श नहीं लिया होगा कि इसमें कौन-कौन सी धारा लगाई जाये, ये कोई भी नहीं मानेगा? पर जब फंसने की बात आई तो फंस गये धनबाद थाने के थानेदार, और बाइज्जत बरी हो गये, धनबाद के एसपी, एसएसपी।

काश, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन धनबाद के एसएसपी से ये भी पूछते, कि हे महान एसएसपी आप ये बताओ कि धनबाद के कतरास थाने में यौन-शोषण की शिकार कमला को प्राथमिकी दर्ज करवाने में एक साल क्यों लग गये? और जब एक साल हो गये तो उसकी जांच कहां तक पहुंची, क्योंकि हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से इस जांच के बारे में उत्तर मांगे हैं, मैं क्या जवाब दूं? क्या हेमन्त जी, धनबाद के एसएसपी से यह सवाल करेंगे, मुझे लगता है कि जरुर पूछेंगे।

हम तो मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से यह भी चाहेंगे कि धनबाद के एसएसपी से यह भी पूछते कि आखिर वह लड़का जिसके खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगा दिया गया, कतरास पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच भी की, मामला झूठा भी पाया गया, उसके बावजूद उसे उलटा लटकाने के लिए किस विधायक के कहने पर कतरास पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली। आखिर धनबाद के एसएसपी/एसपी बाघमारा के भाजपा विधायक ढुलू महतो के प्रति इतनी कृपा क्यों लूटाते है कि उसके इशारे पर कहीं भी किसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो जाती है और जब ढुलू के खिलाफ प्राथमिकी या एक्शन लेने की बात होती हैं तो धनबाद के एसएसपी/एसपी के हाथ-पांव फूलने लगते हैं।

क्या हम समझे कि झारखण्ड में एक नया सूर्योदय हुआ है, और उस सूर्योदय का फायदा निरीह जनता को मिलेगा, या हम ये समझे कि एक पत्रकार जो सत्य लिखा, उसके खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज करा दी गई और जिस थानेदार ने उस पत्रकार के खिलाफ केस दर्ज कर उसके सम्मान के साथ खेलने की कोशिश की, उसे धनबाद में डीएसपी बनाकर रघुवर सरकार ने भेज दिया। यह प्रक्रिया अब भी चलती रहेगी। चलिए, हमें क्या? हम तो ईश्वर को जानते है, हमें उस पर ही विश्वास हैं, वो जो करेगा, अच्छा ही करेगा, मण्डूकोपनिषद् का वह मंत्र हमेशा हमें व निरीह जनता के विश्वास को मजबूती देता है। मंत्र है –सत्यमेव जयते। जो भारत का ध्येय वाक्य भी है।

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