रांची प्रेस क्लब से जुड़ी महिला पत्रकारों को एक महिला पत्रकार के सम्मान के लिए लड़ना पड़ा महंगा, प्रेस क्लब ने शुरु किया नोटिस-नोटिस का खेल
विगत 23-24 अप्रैल की रात रांची प्रेस क्लब के एक कमरे में ठहरी महिला पत्रकार के साथ हुए दुर्व्यवहार मामले को लेकर, महिला पत्रकारों द्वारा रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष को पत्र लिखना और उसे न्याय दिलाने की मांग करना अब महिला पत्रकारों को महंगा पड़ रहा है। रांची प्रेस क्लब के पदाधिकारी इस मामले को समाप्त करने के बजाय नोटिस-नोटिस खेल रहे हैं। ये पदाधिकारी कभी महिला पत्रकार को, तो कभी दोषी पाये गये सदस्य को नोटिस भेज रहे हैं, जिससे मामला एक बार फिर गरम होता दिख रहा है।
आम तौर पर ऐसे मामले जितने जल्दी सुलझ जाये, उसी पर बुद्धिमानों का ध्यान रहता है। लेकिन यहां यह मामला सुलझने के बजाय और उलझता जा रहा है, जो पूरे पत्रकारिता समाज के लिए कलंक के तौर पर अब देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि जैसे ही 23-24 अप्रैल की रात वाली मामले को लेकर रांची प्रेस क्लब से जुड़ी महिलाओं द्वारा रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष को पत्र लिखा गया, तभी रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष व सचिव तथा अन्य पदाधिकारी हरकत में आये और त्वरित निर्णय लेते हुए 29 अप्रैल को तीन निर्णय लिये।
पहला निर्णय था कि संबंधित व्यक्ति तथा उनके पिता मनोज कुमार सिंह (जो क्लब के सदस्य हैं) द्वारा घटना के संबंध में लिखित माफीनामा प्रस्तुत किया गया है, जिसे अभिलेख में सुरक्षित रखा गया है। दूसरा निर्णय था कि संबंधित व्यक्ति को रांची प्रेस क्लब परिसर में प्रवेश से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है और तीसरा निर्णय था कि इस मामले में मैनेजिंग कमेटी के 15 में से 12 सदस्यों एवं पदाधिकारियों ( दो तिहाई बहुमत) के अनुसार संबंधित सदस्य मनोज कुमार सिंह (सदस्यता संख्या -0808/2018) को क्लब की सुविधाओं से एक वर्ष तक वंचित रखा जाएगा।
इन फैसलों को सार्वजनिक करने के क्रम में रांची प्रेस क्लब ने यह भी बताया था कि शिकायतकर्ता द्वारा भेजे गए मेल में उन्होंने क्लब द्वारा की गई कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया तथा त्वरित कार्रवाई के लिए आभार प्रकट किया। उनके अनुरोध पर लिखित माफीनामा की प्रति उपलब्ध करा दी गई है। शिकायतकर्ता ने घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज मेल पर मांगा था। यह फुटेज क्लब में सुरक्षित रखा गया है, जिसे आंतरिक प्रोटोकॉल एवं गोपनीयता के कारण मेल पर साझा नहीं किया जा सकता। हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर इसे विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत संबंधित जांच एजेंसी को उपलब्ध कराया जाएगा।
जब रांची प्रेस क्लब इन सारी बातों को सार्वजनिक कर रहा था तो इसी दौरान एक और बात उभर कर आई कि जिस पर आरोप है, वो शिकायत कर रही महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग कर रहा है, जिसे लेकर रांची प्रेस क्लब ने पुनः मनोज कुमार सिंह को एक नोटिस जारी कर दिया। इस प्रकरण पर महिला पत्रकारों की मांग थी कि मनोज कुमार सिंह की प्रेस क्लब की सदस्यता आजीवन रद्द कर दी जाये।
इसी बीच आज एक और घटना घट गई। जब क्लब फॉर इन्फारमेशन व्हाट्सएप ग्रुप में तथा रांची प्रेस क्लब के ऑफिसियल ग्रुप में इसी से संबंधित मामला फिर उजागर होने लगा। जो चर्चा में आ गया। रांची प्रेस क्लब ने ई-मेल के माध्यम से रांची प्रेस क्लब की एक्सक्यूटिव मेंम्बर प्रतिमा कुमारी को नोटिस भेजा। जिस नोटिस में कहा गया है कि रांची प्रेस क्लब के सदस्य मनोज कुमार सिंह द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई है कि क्लब से जुड़े एक विवाद एवं उससे संबंधित कार्रवाई के संबंध में आपने उनके पारिवारिक सदस्यों को दुर्भावनापूर्ण तरीके से सूचना दी। उनका कहना है कि इससे उनकी मानहानि हुई है। उक्त शिकायत के संदर्भ में आपसे अपेक्षा की जाती है कि एक सप्ताह के भीतर अपना लिखित पक्ष क्लब कार्यालय में प्रस्तुत करें।
आखिर मनोज कुमार सिंह ने प्रेस क्लब को शिकायत में क्या लिखा है?
मनोज कुमार सिंह ने अध्यक्ष व सचिव को लिखा है कि पिछले कुछ दिनों से प्रेस क्लब के कुछ लोग उसके खिलाफ लगातार घटिया राजनीतिक साजिश रच रहे है। हद तो इन्होंने तब कर दी जब उसके नए समधी और समधन के पास प्रतिमा सिंह और करबी दत्ता ने जाकर (उनके निवास पर) कहा है कि उसके बेटे ने कलकत्ता से आयी एक लड़की से बदतमीजी की है। जिसके एवज में प्रेस क्लब उसे और मनोज सिंह को आजीवन प्रतिबंधित कर दिया है। ये दोनों उसके परिवार के बीच दरार डालने की कोशिश की है।
ये दोनों ही नहीं, दो-तीन महिलाओं का फोन आया था कि वो यानी प्रतिमा हम सब को उनके खिलाफ भड़का रही है। आपलोगों को समझ नहीं आ रहा है कि ये एक राजनीतिक साजिश है। कहा जाता है कि एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदी कर देती है। यहां वही हो रहा है। मनोज कुमार सिंह का कहना था कि उसके बेटे ने दरवाजे को नोक किया था। वो रूम 23 तक उसके नाम बुक था। वो उसका पैसा भी एडवांस में पेड कर दिया था। उसके बेटे को पता नहीं था कि उक्त कमरा दूसरे को एलॉट कर दिया गया है।
वो तो अपने मामा के लड़के को कुत्ता देने गया था। जो उस रूम में ठहरे थे। उसे क्या पता कि उसके मामा के लड़का वो रात या शाम को निकल गये थे। बाद में जब उसे ऐहसास हुआ तो वो वह तुरन्त वहां से चला गया। ये उन लोगों को रूम उस दिन नहीं मिल सकता था। लेकिन शिशुपाल ने कहा कि आपके अशोक गोप और कमलेश मिश्रा के गेस्ट हैं, तो उसने पांच रूम खाली करवाया था और इतनी सी बात के लिए प्रतिष्ठा का हनन करना कहां तक सही है? मनोज कुमार सिंह ने रांची प्रेस क्लब से दोनों महिलाओं के लिए सजा तय करने की बात कही है? साथ ही पूछा है कि क्या इन्हें उसके नये रिश्तेदारों के पास जाना चाहिए था और अगर गया तो क्या मकसद था?
जब विद्रोही24 ने इस संबंध में रांची प्रेस क्लब से जुड़ी प्रतिमा से बात की तो उनका कहना था कि उनके ऊपर जो आरोप मनोज कुमार सिंह द्वारा लगाये गये हैं। वे सारे आरोप बेबुनियाद और निराधार है। वो तो उनके समधी और समधिन को जानती तक नहीं और न उनके दरवाजे पर गई। जब मनोज कुमार सिंह उन पर ये घिनौने आरोप लगा रहे हैं तो उनके पास कोई न कोई सबूत तो होगा ही। वे सबूत पेश करें।
इसी बीच रांची प्रेस क्लब से जुड़े कई सदस्यों ने विद्रोही24 को बताया कि दरअसल मामला यह भी है कि प्रतिमा रांची प्रेस क्लब की सदस्य ही नहीं, बल्कि वो रांची प्रेस क्लब की एकमात्र महिला एक्सक्यूटिव मेंबर भी है। वो महिलाओं की समस्याओं से संबंधित बातों को मुखरता से रखती है। जो रांची प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और अन्य बाहुबलियों को खटकता है। यहीं कारण है कि ये रांची प्रेस क्लब के अधिकारी प्रतिमा को सबक सिखाने के लिए बेकरार है।
इसी बीच क्लब फॉर इन्फॉरमेशन में इस मुद्दे को लेकर घमासान जारी है। कई लोग प्रतिमा और अन्य महिलाओं के खिलाफ वो चीजें लिख रहे हैं, जो लिखना ही नहीं चाहिए, क्योंकि ये बातें महिला और महिला के सम्मान से जुड़ी हैं। लेकिन रांची प्रेस क्लब में तो महिलाओं का क्या सम्मान है और प्रेस क्लब के अधिकारी किस महिला को क्या सम्मान देते हैं, वो तो रांची प्रेस क्लब के मैनेजिंग कमेटी द्वारा प्रतिमा को भेजा गया ई-मेल ही बता दे रहा है। मैनेजिंग कमेटी ने प्रतिमा को जो पत्र प्रेषित किया है।
उसमें प्रतिमा को रांची प्रेस क्लब के सदस्य के रूप में संबोधित किया गया है। जबकि प्रतिमा रांची प्रेस क्लब की निर्वाचित एक्सक्यूटिव मेंबर है। अब रांची प्रेस क्लब के मैनेजिंग कमेटी को एक्सक्यूटिव मेंबर लिखने में कौन सी इज्जत जा रही थी, ये तो रांची प्रेस क्लब के महान विद्वान ही बतायेंगे। कुल मिलाकर, कहा जा सकता है कि रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों को इस विवाद को समाप्त करने के बजाय शायद नोटिस-नोटिस खेलने में ज्यादा ही मजा आ रहा है।
कई पत्रकारों ने तो विद्रोही24 को यह भी बताया कि रांची प्रेस क्लब केवल उन्हीं शिकायतों को देखता या सुनता है, जो रांची प्रेस क्लब परिसर और सदस्यों से जुड़ा है, अगर सदस्यों के परिजनों से जुड़े विवादों या उनसे जुड़े मामलों का निपटारा रांची प्रेस क्लब करने लगे, तो रांची प्रेस क्लब का बंटाधार होना तय है।
