क्या बिना इन्वारमेन्ट क्लियरेंस के निर्मित झारखण्ड विधानसभा भवन का उद्घाटन PM मोदी करेंगे?

सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद् डा. आर. के. सिंह द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली में लगाये गये गुहार कि झारखण्ड में भवन निर्माण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इन्वारमेंटल इम्पैक्ट एसेसमेंट नोटिफिकेशन 2006 की अवहेलना हो रही है, उस पर दो सितम्बर 2019 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक आदेश जारी किया है। आदेश में एमओआइएफ और क्लाइमेंट एक्सचेंज भुवनेश्वर को एक कमेटी बनाकर इस संबंध में जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है,

सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद् डा. आर. के. सिंह द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली में लगाये गये गुहार कि झारखण्ड में भवन निर्माण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इन्वारमेंटल इम्पैक्ट एसेसमेंट नोटिफिकेशन 2006 की अवहेलना हो रही है, उस पर दो सितम्बर 2019 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक आदेश जारी किया है। आदेश में एमओआइएफ और क्लाइमेंट एक्सचेंज भुवनेश्वर को एक कमेटी बनाकर इस संबंध में जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है, साथ ही झारखण्ड की स्टेट लेवल इनवारमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट ऑथोरिटी के नोडल एजेंसी को सहयोग करने को कहा है।

अदालत का कहना है कि आर के सिंह द्वारा सूचित किया गया है कि झारखण्ड के रांची, जमशेदपुर, बोकारो और देवघर में बिना इनवार्मेंटल क्लियरेंस के ही कई भवनों का निर्माण कर दिया गया तथा कुछ की जारी है। आर के सिंह का कहना है कि झारखण्ड हाई कोर्ट भवन, झारखण्ड विधानसभा, पीएंडएम, हाईटेक सिटी सेन्टर मॉल जमेशदपुर, विजय गार्डेन होम्स और आस्था ट्विन सिटी भी इसमें शामिल है।

अदालत का कहना है कि आर के सिंह द्वारा सूचना मिली है कि आरटीआइ एप्लीकेशन के द्वारा पता चला है कि मात्र 20 लोगों ने इन्वारमेंट क्लीयरेंस के लिए आवेदन संबंधित विभाग को दिया है, जबकि इआइए नोटिफिकेशन के अनुसार 20,000 स्क्वायर मीटर से अधिक के निर्माण में इन्वारमेंटल क्लियरेंस लेना जरुरी है। आवेदक का कहना है कि ऐसा नहीं होने से हवा की गुणवत्ता, भूगर्भ जल स्तर, भूमि की उर्वरा शक्ति पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अदालत के इस आदेश के बाद सबंधित विभागों की कमेटी दिल्ली स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, प्रिंसिपल बेंच को क्या रिपोर्ट प्रस्तुत करती है, फिलहाल सभी का ध्यान उसी ओर है, हालांकि इस आदेश से राज्य में चल रहे भवन निर्माण की योजनाओं में भवन निर्माण विभाग के अधिकारी किस प्रकार पर्यावरण के प्रति कोताही बरत रहे हैं, उसका पता चल जाता है।

और अब सवाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से, उस प्रधानमंत्री से जिन्हें यूनाइटेड नेशन की ओर से 2018 में चैंपियन ऑफ दि अर्थ का पुरस्कार मिलाहाल ही में पर्यावरण को लेकर वे डिस्कवरी चैनल के माध्यम से पूरे विश्व में छाये रहेकार्यक्रम था मैन वर्सेज वाइल्ड। ऐसे भी उनके भाषण में पर्यावरण खुब छाया रहता है। अब सुनने में रहा है कि वे 12 सितम्बर को झारखण्ड विधानसभा भवन का उद्घाटन करने रहे हैं।

क्या वे और राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास राज्य की जनता को बता सकते है कि 1. 6 लाख स्क्वायर मीटर में लगभग 370 करोड़ की लागत से बने, वह भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच से आदेश आने के बाद 4 सितम्बर यानी आज इन्वारमेन्ट क्लियरेंस झारखण्ड विधानसभा भवन को कैसे मिल गया? इसका मतलब क्या है? क्या वे झारखण्ड की जनता को यह भी बतायेंगे कि इन्वारमेंन्ट क्लियरेंस कब मिलता है, निर्माण के पहले या निर्माण के बाद या उद्घाटन की तिथि की उद्घोषणा के बाद।

ऐसे प्रधानमंत्री जी, आप जब भी आइये और इसका उद्घाटन करिये, लेकिन जनता को तो पता चल ही चुका कि आप के द्वारा राज्य को दिया गया मुख्यमंत्री रघुवर दास किस प्रकार कानून का मजाक बना रहा है, और अपने हिसाब से जब चाहे, तब उसे स्वीकार या अस्वीकार करता है, नहीं तो झारखण्ड विधानसभा भवन एक मिसाल कायम करती, जिस दिन आप इसका उद्घाटन करेंगे, एक कलंक इसके साथ रहेगा कि इस विधानसभा भवन का निर्माण बिना इन्वारमेंट क्लियरेंस के ही संपन्न हुआ, और उसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था।

Krishna Bihari Mishra

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