‘बीजेपी का कौन सा नेता खेत जोतकर खा रहा है, सब तो लूटकर खा रहे हैं’

ये भाजपा वाले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद पर कितना भी जुल्म क्यों न कर लें,  कितना भी तोहमत क्यों न लगा लें, कितना भी जांच एजेंसियां क्यों न लगा लें, उन्हें जीवन भर जेल में ही क्यों न सड़ा दें, उसके बाद भी वे लालू प्रसाद की लोकप्रियता तथा इमेज को प्रभावित नहीं कर सकते, न बिगाड़ सकते हैं, लालू, लालू हैं और वे नरेन्द्र मोदी से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं, ये अलग बात है कि उनकी हंसी-ठिठोली में की गई महत्वपूर्ण बात को लोग हंसी में उड़ा देते हैं।

ये भाजपा वाले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद पर कितना भी जुल्म क्यों कर लेंकितना भी तोहमत क्यों लगा लें, कितना भी जांच एजेंसियां क्यों लगा लें, उन्हें जीवन भर जेल में ही क्यों सड़ा दें, उसके बाद भी वे लालू प्रसाद की लोकप्रियता तथा इमेज को प्रभावित नहीं कर सकते, न बिगाड़ सकते हैं, लालू, लालू हैं और वे नरेन्द्र मोदी से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं, ये अलग बात है कि उनकी हंसी-ठिठोली में की गई महत्वपूर्ण बात को लोग हंसी में उड़ा देते हैं।

कल की ही बात हैं, लालू प्रसाद ने बहुत ही अच्छी बात कह दी और उनके इस बात में भी दम हैं और भाजपाइयों की हिम्मत भी नहीं कि उनकी आंखों में आंख डालकर, इस मुद्दे पर उनसे बात भी कर सकें। आखिर क्या कहा था लालू प्रसाद ने? लालू प्रसाद का बयान था – ‘बीजेपी का कौन सा नेता खेत जोतकर खा रहा है, सब तो लूटकर खा रहे हैं’। लालू प्रसाद के इस बयान का कई लोगों ने स्वागत किया हैं।

अब भाजपा न तो पं. दीन दयाल उपाध्याय और न ही डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सिद्धांतों पर ही चल रही हैं, ये विशुद्ध ले और दे संस्कृति का पालन करते हुए देश को किस स्तर तक पहुंचा दी है, वह किसी से छुपा नहीं हैं। भाजपा में ही जो लोग ईमानदार और देश हित की बात करते हैं, उन्हें हाशिये पर कर दिया गया हैं, और जो जी-हुजूरी, नित्य प्रतिदिन चरणोदक धारण करने तथा लेन-देन में चालाक हैं, उन्हें जल्द ही पार्टी का सिरमौर बना दिया जा रहा हैं, उन्हें अच्छे पद दिये जा रहे हैं, स्थिति तो ऐसी है कि जो जिंदगी में कभी कुदाल नहीं पकड़ा, वह किसान प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बना दिया जाता हैं और जिसने कभी जिंदगी में ठीक से पढ़ाई नहीं की वह शिक्षा विभाग का मंत्रालय संभालने लगता हैं, यानी अंधेर नगरी है भाई, फिर भी ‘मोदी-मोदी’ ठीक तोते की तरह ‘मीठू-मीठू’ चिल्लाने की आदत नें पूरे देश व राज्य का कबाड़ा बना दिया है।

नीरव मोदी और विजय माल्या प्रकरण ने तो भाजपा को जनता के सामने पूरी तरह नंगा कर दिया है। भाजपावाले हर बात में हर बुराई और भ्रष्टाचार के लिए  कांग्रेस को ही दोषी ठहराने का जो तरीका अपना लिया है, ये तरीका ही भाजपावालों को महंगा पड़ेगा, ये समझते हैं कि जनता मूर्ख हैं, पर जनता मूर्ख  हैं या जिम्मेदार नागरिक, वह तो राजस्थान, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़ और कर्णाटक के विधानसभा चुनाव परिणाम से ही पता लग जायेगा।

लालू प्रसाद का यह कहना कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि न खायेंगे और न खाने देंगे तो फिर 11 हजार करोड़ रुपये का घोटाला कहां से हो गया? यह पैसा कहां गायब हो गया? रक्षा सौदा में भी घोटाला हो रहा है? उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी को भी घेरा और कहा कि राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में सुशील मोदी ने जितना फूहड़ व्यवहार किया हैं, उससे बिहार और देश का मान नीचे गिरा है, इनलोगों ने अपने चरित्र तक को गिरा दिया है, संसदीय समितियां आती-जाती हैं, घूमती हैं, वहां पर उनके बारे में उलटा-पुलटा बोला गया, जो निन्दनीय हैं, उन्हें तो इस्तीफा दे देना चाहिए, वे जिस मामले में कोर्ट में आ रहे हैं, उसमें अभी ट्रायल चल रहा हैं, यह कोई अंतिम कोर्ट नहीं हैं, इसके बाद हाईकोर्ट है, सुप्रीम कोर्ट है।

Krishna Bihari Mishra

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