‘लटकल त गइल बेटा’ के तर्ज पर चल रहा झारखण्ड में शासन, जनता दहशत में

आपने ट्रक या ट्रैक्टर के पीछे यह लिखा जरुर पढ़ा या देखा होगा – ‘लटकल त गइल बेटा’। ठीक इसी प्रकार से झारखण्ड में चल रहा है कि अगर ‘मुख्यमंत्री के खिलाफ आंदोलन कइल तो गइल….’ पूरे झारखण्ड में सरकार और सरकार के कारिंदों द्वारा ऐसी दहशत फैलाने की कोशिश की जा रही हैं, कि लोग सरकार के खिलाफ एक शब्द बोल ही न सकें, अगर कोई मुंह खोले तो उसके जुबान पर केवल रघुवर सरकार की जयकारे के ही शब्द हो।

आपने ट्रक या ट्रैक्टर के पीछे यह लिखा जरुर पढ़ा या देखा होगा लटकल गइल बेटा ठीक इसी प्रकार से झारखण्ड में चल रहा है कि अगर मुख्यमंत्री के खिलाफ आंदोलन कइल तो गइल…. पूरे झारखण्ड में सरकार और सरकार के कारिंदों द्वारा ऐसी दहशत फैलाने की कोशिश की जा रही हैं, कि लोग सरकार के खिलाफ एक शब्द बोल ही न सकें, अगर कोई मुंह खोले तो उसके जुबान पर केवल रघुवर सरकार की जयकारे के ही शब्द हो।

माहौल ऐसा कर दिया गया है कि जैसे यहां लोकतंत्र नहीं होकर राजतंत्र हो, जैसे राजतंत्र में राजा के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं होती, ठीक उसी प्रकार यहां सीएम रघुवर दास के खिलाफ किसी को बोलने या आंदोलन करने की इजाजत नहीं, अगर आप सीएम के खिलाफ बोले तो अंजाम भुगतने को तैयार रहे, सीएमओ आपको ऐसा कानून के लपेटे में लेगा कि आप जिंदगी भर याद रखेंगे। उदाहरण अनेक हैं। कई लोग तो सरकार के इस कारनामों से भूमिगत हो गये, तो कई जेल में, तो कई जेल जाने की तैयारी में लगे हैं।

आश्चर्य यह भी हैं कि सीएम खुद कानून तोड़ते हैं, वे बिना हेलमेट के स्कूटर चला देते हैं, अखबारों में उनके फोटो छपते हैं, चैनलों पर समाचार दिखाई देते हैं, पर किसी पुलिसकर्मी की हिम्मत नहीं होती कि, सीएम का चालान काट दें, लेकिन एक सामान्य आदमी ऐसा गलती करें तो देखिये पुलिसकर्मियों की ताकत। हाल ही में पुलिस महानिदेशक के गले में सांप लटका हुआ फोटो दिखाई पड़ा, जो खुब वायरल हुआ, पर पुलिस महानिदेशक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं, क्योंकि वे कानून के रक्षक हैं, और उन्हें शायद थोड़ा-बहुत कानून तोड़ने का अधिकार हैं, इसलिए उन्हें भी छूट हैं, जबकि ऐसा ही करने पर रांची में ही दो लोगों को जेल भेज दिया गया।

नया ताजा मामला धनबाद के निरसा का हैं, मुख्यमंत्री रघुवर दास वहां निरसा में अपने कार्यकर्ताओं को भाजपा के गुढ़ रहस्यों का स्वाद चखाने गये थे, जैसे ही कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को पता चला कि मुख्यमंत्री रघुवर दास निरसा जा रहे हैं, तो वे अपने कोडरमा के जिला कांग्रेस अध्यक्ष की हत्या से मर्माहत होकर, दुखी होकर सीएम को काला झंडा दिखा दिया, फिर क्या था? जनाब को बहुत गुस्सा आया, सीएमओ हरकत में आया और लीजिये देखते ही देखते सीएम को काला झंडा दिखानेवाले पर केस भी दर्ज हो गया और दो जेल भी चले गये, और जानते है, केस करनेवाला कौन है, सरकारी आदमी।

अब जनाब सीएम रघुवर दास से ही पूछा जाय कि जितनी जल्दी आपको काला झंडा दिखानेवाले को जेल के अंदर पहुंचा दिया गया, ठीक उसी प्रकार एक साल से भी अधिक हो गये, बूटी मोड़ में जिस लड़की का रेप कर, उसकी नृशंस  हत्या कर दी गई, उस कुकर्म के अपराधी किस बिल में छुपे हैं? उन्हें गिरफ्तार कब किया जायेगा?  इसका जवाब न तो सीएम रघुवर दास और न ही सरकार के किसी वरीय पदाधिकारी की डिक्शनरी में हैं। दो दिन पहले चलती ट्रेन में एक लड़की का रेप हो जाता हैं, उसके अपराधी कहां हैं, इसका जवाब भी सीएम और उनके वरीय पदाधिकारियों की डिक्शनरी में नहीं है।

ऐसे में सामान्य जनता, अगर ये कहें कि बाबू हम तो मरने और पीसने के लिए ही बने होते हैं। वे जहांपनांह हैं, उनका मेरा जैसे सामान्य आदमी से क्या मुकाबला? राजा हैं, राजा ही रहेंगे, जायेंगे तो तिरंगा लेकर जायेंगे और हमलोग तो रामनामी में ही काम चला लेंगे, हालांकि सबसे ज्यादा जयश्रीराम का नारा वे ही लगाते हैं।

Krishna Bihari Mishra

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