अपनी बात

जब एक ही दिन, एक ही शहर से, समान रूप से निकलनेवाले विभिन्न अखबारों में छपनेवाले अंग्रेजी तारीखों में कोई फेरबदल नहीं होती, तो यहीं चीज हिन्दी तारीखों पर लागू क्यों नहीं होती?

जब एक ही दिन, एक ही शहर से, समान रूप से निकलनेवाले विभिन्न अखबारों में छपनेवाले अंग्रेजी तारीखों में कोई फेरबदल नहीं होती, एक समान तारीख दिखती है, तो यहीं चीज हिन्दी तारीखों पर लागू क्यों नहीं होती, क्यों एक अखबार (प्रभात खबर) द्वादशी तो दूसरा अखबार (हिन्दुस्तान) त्रयोदशी लिखकर आम जनता को भ्रमित करने की कोशिश करता है? आखिर भारत जैसे देश में जहां हिन्दी तिथि का एक अपनी ही मान्यता है, वहां इस प्रकार की गलतियां कर ये अखबार वाले क्या दिखाना चाहते हैं?

सच्चाई यही है कि हिन्दी तिथियों के मामले में एक साधारण विद्वान भी कह देगा कि जिस तिथि में सूर्योदय होगा, वहीं तिथि पूरे दिन मान्य होगी, चाहे वो तिथि सूर्योदय के बाद कुछ ही पल में क्यों न समाप्त हो जाये। आज भारतीय पंचाग के अनुसार द्वादशी तिथि सुबह दिन में 8 बजकर 31 मिनट तक थी। ऐसे में प्रभात खबर ने जो हिन्दी तिथि दी हैं। वो पूर्णतः सत्य हैं।

जबकि हिन्दुस्तान द्वारा प्रथम पृष्ठ पर अंकित हिन्दी तिथि पूर्णतः गलत है। हम तो कहेंगे कि हिन्दुस्तान अखबार स्वयं अपने यहां अंदर के पृष्ठों पर संक्षित पंचाग देता है। उसे उस पंचाग का भी अवलोकन करना चाहिए। अगर वो अवलोकन करता तो ऐसी गलतियां नहीं होती। लेकिन यहां होश किसे हैं?

किशोरगंज निवासी आचार्य मिथिलेश कुमार मिश्र विद्रोही24 की बातों से सहमत होते हुए कहते हैं कि जिस तिथि में सूर्योदय होगा। वहीं तिथि पूर्ण रुपेण ने पूरे दिन मान्य होगी। ऐसे में आज द्वादशी और कल त्रयोदशी होगी। इसलिए प्रभात खबर के प्रथम पृष्ठ पर दी गई हिन्दी तिथि पूर्णतः सही और हिन्दुस्तान द्वारा दी गई हिन्दी तिथि पूर्णतः गलत है।

वे आगे कहते हैं कि ऐसी गड़बड़ियां नहीं होनी चाहिए। अखबार के संपादकों को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ज्ञातव्य है कि हिन्दुस्तान अखबार द्वारा की गई यह गलती कोई पहली नहीं हैं। यह अखबार हमेशा भारतीय हिन्दी तिथियों को प्रथम पृष्ठ पर देने के क्रम में गड़बड़ियां करता रहा है।

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