नक्सलियों के खिलाफ गवाही देना महंगा पड़ रहा है एक पुलिस अधिकारी को़

झारखण्ड में एक पुलिस अधिकारी को एक नक्सली के खिलाफ गवाही देना महंगा पड़ रहा हैं, इसके लिए उसे उसी का पुलिस विभाग दंडित कर रहा है, पर उसे इसकी परवाह नहीं, वह खुलकर कह रहा है कि वह इस अन्याय के खिलाफ लड़ेगा।

झारखण्ड में एक पुलिस अधिकारी को एक नक्सली के खिलाफ गवाही देना महंगा पड़ रहा हैं, इसके लिए उसे उसी का पुलिस विभाग दंडित कर रहा है, पर उसे इसकी परवाह नहीं, वह खुलकर कह रहा है कि वह इस अन्याय के खिलाफ लड़ेगा तथा नक्सली नकुल यादव को उसके किये की सजा दिलवा कर रहेगा, क्योंकि जिस घटना को वह अंजाम दिया है, वह घटना उसके सामने घटी है, वह उस घटना में घायल हुआ है, उसके सामने कई उसके साथी जवानों ने दम तोड़ा है, वह प्रत्यक्षदर्शी है, ऐसे में वह अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता, आज उसे नकुल यादव के खिलाफ गवाही देने से रोका जा रहा है, जिसे वह मानने को तैयार नहीं, वह नौकरी में रहे या नहीं रहे पर वह इस अन्याय के खिलाफ डटा रहेगा।

याद करिये 3 मई 2011, लोहरदगा जिले का दरदरिया इलाका, जहां सिरीज बम विस्फोट में पुलिस और सीआरपीएफ के 11 जवानों की मौत हो गई थी। इसी सिरीज बम विस्फोट मामले में आरोपी नक्सली नकुल यादव जो पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुका है, उस नक्सली नकुल यादव के खिलाफ गवाही देने से तत्कालीन थाना प्रभारी पूर्णचंद्र देवगम को रोका जा रहा है, फिलहाल पूर्णचंद्र देवगम बोकारो पुलिस लाइन में पदस्थापित है। बोकारो पुलिस लाइन पदस्थापित होने के पूर्व वे महुआटांड़ थाना में थाना प्रभारी के पद पर पदस्थापित थे।

पूर्णचंद्र देवगम की माने तो, इसी 8 फरवरी को लोहरदगा कोर्ट में नक्सली नकुल यादव के खिलाफ उनकी गवाही थी, पर नक्सली नकुल यादव के खिलाफ गवाही देने से एक पुलिस अधिकारी द्वारा उन्हें रोका गया। पूर्णचंद्र देवगम की माने तो जब वे गवाही देने के लिए निकले, तब उन्हें पहले थाने में बरगलाया गया और कहा गया कि उनकी गवाही आज नहीं है, लेकिन जब वे कोर्ट गये तो पता चला कि उनकी आज ही गवाही है।

कोर्ट परिसर में ही एक जमादार असर्फी बेहरिया ने उन्हें लोहरदगा के एएसपी अभियान विवेक ओझा से बात कराया। विवेक ओझा ने पूर्णचंद्र देवगम को गवाही देने से मना किया और उन्हें बताया कि नक्सली नकुल यादव ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत आत्मसमर्पण किया है, इसलिए सरकार चाहती है कि नक्सली नकुल यादव को सजा नहीं मिले, लेकिन पूर्णचंद्र देवगम ने उनकी एक बात नहीं मानी और गवाही दे दी।

पूर्णचंद्र देवगम की बात माने तो वह साफ कहते है कि वह कैसे भूल जाये कि उसके आंखों के सामने उसके साथियों को नक्सलियों ने मार डाला। वह कैसे भूल जाये कि उसके सामने उसके साथियों ने दम तोड़े, वह कैसे भूल जाये कि इस घटना में उसके आंखों को नुकसान पहुंचा, ऐसे में वे गवाही देता रहेंगे और नकुल को उसके अंजाम तक पहुंचा कर दम लेंगे, चाहे इसके लिए कुछ भी क्यों न सहना पड़े।

Krishna Bihari Mishra

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