फंसे सरसंघचालक तो बचाने के लिए कूदे वैद्य, राहुल ने कहा प्रत्येक भारतीय का अपमान

 

मुजफ्फपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत अपने बयान से फंसते नजर आये। उन्होंने कल मुजफ्फरपुर के जिला स्कूल मैदान में स्वयंसेवकों के बौद्धिक प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए कहा था कि जरुरत पड़ी तो जितना सैनिक फौज छह महीने में तैयार करेगी, उतना हम तीन दिनों में तैयार कर दें। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान इजाजत दें, तो हमारे संघ सैनिक सीमा पर जाने को तैयार है, यह शक्ति संघ के अनुशासन से ही आ पायी है।

उन्होंने कल यह भी कहा था जब चीन से हमारा युद्ध हुआ, तो सिक्किम सीमा क्षेत्र में तेजपुर की पुलिस चीन के डर से भाग खड़ी हुई, उस समय संघ के स्वयंसेवक सीमा पर मिलिट्री फोर्स के आने तक डटे रहे व लोगों का ढांढ़स बंधाया था।

मोहन भागवत के इस बयान ने पूरे देश में भूचाल ला दिया हैं, कई राजनीतिज्ञों ने इस बयान की कड़ी आलोचना की, मोहन भागवत के इस बयान की चौतरफा आलोचना होता देख, संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने अपने बयान में कहा कि मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों की तुलना सेना से नहीं की थी, उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर जनता के सामने पेश किया गया। सच्चाई यह है कि मोहन भागवत ने यह कहा था कि परिस्थिति आने पर संविधान द्वारा मान्य होने पर भारतीय सेना को सामान्य समाज तैयार करने के लिए छह महीने का समय लगेगा, तो संघ के स्वयंसेवकों को भारतीय सेना तीन दिन में तैयार कर सकेगी, इसका कारण संघ के स्वयंसेवकों को अनुशासन में रहने का अभ्यास हैं।

इधर सरसंघचालक के इस बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मोहन भागवत का सेना के प्रति दिया गया यह बयान प्रत्येक भारतीय का अपमान हैं,  राहुल गांधी ने अपने ट्विवटर के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि यह उन सारे लोगों का अपमान है, जिन्होंने हमारे देश के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी।