विहिप ने कहा कि अयोध्या से आये अभिसिंचित अक्षत को घर-घर बांटो और ये दोनों जनाब धोनी के साथ एक फोटो खिंचवाने के चक्कर में अक्षत लेकर स्टेडियम पहुंच गये, मतलब दोनों गजबे हैं

विश्व हिन्दू परिषद् का कहना है कि उनके कार्यकर्ता या सहयोगी अयोध्या से भेजे गये अभिसिंचित पीले अक्षत को घर-घर जाकर बांटे। इसकी पवित्रता बनाये रखे और लोगों से अयोध्या आकर भगवान श्रीराम के मंदिर का अवलोकन करने व भगवान श्रीराम का दर्शन करने आने का निमंत्रण दे, लेकिन रांची में क्या हो रहा है? विश्व हिन्दू परिषद् के सभी बड़े-छोटे नेता व कार्यकर्ता तथा उनके सहयोगी इस पवित्र कार्य को पूरा करने में तन्मयता से लगे रहे, जैसा विहिप का आदेश है, वैसा ही कर रहे हैं।

लेकिन जिन पर ज्यादा इसकी पवित्रता की रक्षा करने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने इस कार्य का भी स्वहित तथा स्वयं को प्रोजेक्ट करने में ज्यादा दिमाग लगा दिया। जिसको लेकर पूरे रांची में ऐसे लोग एक बार फिर चर्चा के विषय बने हुए हैं। आश्चर्य है कि ये गलतियां पर गलतियां करते जाते हैं, पर इन गलतियों के लिए इनके दिलों में पश्चाताप भी नहीं होता, क्योंकि ये जानते है कि नीचे से उपर इनके लोग बैठे हैं, कौन उन्हें भला दंडित करेगा?

जिस अक्षत को घर-घर बांटना था, उसे जेएससीए स्टेडियम लेकर ये पहुंच गये और महेन्द्र सिंह धौनी को स्टेडियम में उक्त पवित्र अक्षत और निमंत्रण पत्र देकर फोटो खिंचवाएं तथा इस घटना को पवित्र मानते हुए, बड़ी पवित्रता से इस निमंत्रण पत्र देते हुए फोटो को भाजपा झारखण्ड के पवित्र सोशल साइट पर चिपका दिया और उसकी विवरणी इस प्रकार दे दी। विवरणी थी –

‘आज प्रदेश महामंत्री (संगठन) श्री कर्मवीर सिंह जी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत कार्यवाह श्री धनजंय सिंह जी ने जेएससीए स्टेडियम में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान झारखण्ड की शान श्री महेन्द्र सिंह धोनी जी को अयोध्या में हो रहे राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।’

अब सवाल उठता है कि क्या विश्व हिन्दू परिषद् की रांची इकाई ने इन दोनों नेताओं को अधिकृत किया था क्या? कि ये दोनों महाशय जिस पवित्र अक्षत को घर-घर बांटना था, उसे जाकर स्टेडियम में बांट आये और अगर स्टेडियम में इन्हें बांटने का इन्हें अपने से इतना ही शौक था तो इन दोनों महाशयों ने और किन-किन स्टेडियम में जाकर, किन-किन खिलाड़ियों को जाकर ये पवित्र अक्षत भेंट किये? जिस विवरणी में इन्होंने महेन्द्र सिंह धोनी और अपने नाम के आगे ‘श्री’ और अंतिम में जी लगवाये हैं, क्या श्रीराममंदिर में ‘श्री’ लगाने में इनके लोगों के हाथ कांप रहे थे।

क्या महेन्द्र सिंह धोनी का घर इन्हें नहीं देखा हुआ था कि जो इन्होंने स्टेडियम में जाकर देने की इतनी व्यग्रता दिखा दी। क्या सामान्य जनों के लिए भी इतनी ही व्यग्रता इन दोनों महाशयों धनजंय और कर्मवीर के दिलों में रहती है? क्या श्रीराम मंदिर का आमंत्रण पत्र महेन्द्र सिंह धोनी के सामने कुछ भी नहीं? दरअसल ये दोनों महाशय हैं तो बड़े पोस्टों पर। दोनों संघ से जुड़े हुए हैं। संघ की ही एक इकाई है -विश्व हिन्दू परिषद्।

लेकिन जब आदमी बड़े पदों पर पहुंचता हैं तो बहुत कम ही लोग होते हैं, जो उसकी मर्यादाओं का सम्मान रखते हैं। ज्यादातर तो भूल ही जाते हैं और फिर इसकी आड़ में वो हर प्रकार की हरकतें करते हैं, जो इन्हें इजाजत नहीं देती। इन दोनों ने महेन्द्र सिंह धौनी के साथ सिर्फ एक फोटो खिंचवाने के चक्कर में अयोध्या से आये पवित्र अक्षत और विश्व हिन्दू परिषद् के श्रीराम मंदिर से संबंधित निमंत्रण पत्र की गरिमा नहीं रखी।

जब इस संबंध में विद्रोही24 ने विश्व हिन्दू परिषद् के बड़े नेताओं से संपर्क किया तो उनका कहना था कि निमंत्रण पत्र तो घर-घर ही बांटने का आदेश आया है, लेकिन ये दोनों कैसे और किसके आदेश पर स्टेडियम पहुंच गये। उन्हें नहीं पता। विद्रोही24 ने जब इस संबंध में संघ से जुड़े उस शख्स से बात करने की कोशिश की, जो स्टेडियम में उस वक्त मौजूद था तब उस व्यक्ति ने मोबाइल में रिंग होने के बावजूद संपर्क नहीं किया।

कुल मिलाकर, संघ के बहुत सारे स्वयंसेवक और भाजपा से जुड़े सम्मानित कार्यकर्ता इस घटना से दंग हैं और वे कहते हैं कि अब संघ और भाजपा बहुत बदल चुका है। अब पहले वाली अनुशासन और विनम्रता की आशा इनसे रखते हैं तो भूल जाइये। सभी अब अपने मन के मालिक है। जिसको जहां मन करता है। चला जाता है। कौन किसको अब बोलेगा और वो बात मानेगा। अभी तो कर्मवीर सिंह की ही तूती बोल रही है। चाहे भाजपा हो या संघ या वर्तमान में विहिप, सभी जगह उसी का राज है।