रांची प्रेस क्लब में चल रहे रेस्टोरेंट में शाकाहारियों को मांसाहार दिया गया परोस, आपत्ति जताने, शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अभी तक रेस्टोरेंट संचालक पर नहीं की गई कोई कार्रवाई
शायद भारत में रांची प्रेस क्लब एकमात्र प्रेस क्लब है, जो हमेशा विवादों में रहता है। एक विवाद सुलझता नहीं कि दूसरा विवाद मुंह बाये आ खड़ा होता है। आश्चर्य यह भी है कि इन विवादों को कोई भी रांची प्रेस क्लब का पदाधिकारी ईमानदारी से नहीं सुलझाता, बल्कि विवादों को मैनेज करने में ज्यादा दिमाग लगाता है। अब देखिये न महिला पत्रकार के साथ रांची प्रेस क्लब में हुई बदतमीजी का मामला अभी सुलझा नहीं हैं। दूसरा मामला सामने आ गया। हालांकि ये मामला 19 अप्रैल का है।
बताया जाता है कि एक सामाजिक संगठन ने रांची प्रेस क्लब में गत् 19 अप्रैल को एक कार्यक्रम आयोजित किया था और अपने संगठन से जुड़े करीबी 70 लोगों के लिए रांची प्रेस क्लब में ही चल रहे 360 डिग्री एक्सप्रेस कैफे रेस्टोरेंट को वेज-थाली का प्रबंध करने का आदेश दिया था। जब उक्त संगठन से जुड़े लोग कार्यक्रम के समाप्ति के बाद भोजन करने बैठे, तो उसमें एक ने पाया कि उसकी थाली में पनीर की सब्जी में मुर्गे के मांस का एक टुकड़ा था।
बताया जाता है कि जिसकी थाली में पनीर की सब्जी में मुर्गें के मांस का टुकड़ा मिला, वो विशुद्ध शाकाहारी परिवार से आता है, उसके घर में लहसुन-प्याज तक का प्रयोग नहीं होता है। वह व्यक्ति यह देखकर स्वयं को माफ नहीं कर पाया और स्वयं से उसे घृणा होने लगी। लेकिन कैफे-रेस्टोरेंट चलानेवाले को उस पर दया नहीं आई।
अंत में, उक्त व्यक्ति (जिसकी थाली में मांस का एक टुकड़ा मिला था) ने रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष को इस संबंध में लिखित जानकारी दी और इस पर उचित कार्रवाई करने की मांग की। बताया जाता है कि आज पूरे एक सप्ताह होने को आये। अभी तक रेस्टोरेंट संचालक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इधर यह भी बताया जा रहा है कि आज रांची प्रेस क्लब में मैनेजिंग कमेटी की बैठक थी। जिसमें यह मुद्दा उठा।
जिस पर मैनेजिंग कमेटी का यह जवाब आया है – क्लब के रेस्टोरेंट में अनियमितता के बारे में मिली गंभीर शिकायत पर रेस्टोरेंट संचालक को नोटिस दिया गया था। उनकी ओर से प्राप्त जवाब असंतोषजनक है। इस पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए रेस्टोरेंट कमेटी को अधिकृत किया गया है। कोषाध्यक्ष कुबेर सिंह की अध्यक्षता वाली नवगठित रेस्टोरेंट कमेटी में निर्भय कुमार, राजन बॉबी, संतोष सिन्हा, अमित सिंह और विजय गोप शामिल किए गए हैं।
बताया जा रहा है कि जो लोग रेस्टोरेंट चला रहे हैं, वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं और उक्त राजनीतिक दल से सभी पत्रकारों का बहुत ही मधुर रिश्ता रहा है। जिसका फायदा रेस्टोरेंट संचालक और पत्रकार दोनों सहजीविता के आधार पर उठा रहे हैं। अब इससे किसी का धर्म व पथ भ्रष्ट होता हो तो उससे रांची प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और अन्य पत्रकारों को क्या मतलब? सुनने में तो यह भी आ रहा है कि बल्क में पानी लेने पर भी चार रुपये का पानी का बोतल दस रुपये में यहां थमाया जाता है और लोग मजबूरी में लेने को बाध्य होते हैं।
