कल शाम तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करनेवाले लोग भाजपा सांसद पीएन सिंह के दबाव में झूके, जूते-चप्पल खाने व गाली-गलौज सुनने के बाद भी किये समझौते

अंततः धनबाद के भाजपा सांसद पशुपति नाथ सिंह के रिश्तेदार की जीत हो गई। भाजपा सांसद पशुपति नाथ सिंह ने जो ताना-बाना बुना था। वे उसमें कामयाब रहे। जिस मारवाड़ी समाज से जुड़े सुशील पोद्दार को उनके रिश्तेदारों ने जूते-चप्पल से पिटाई की थी। साथ ही पूरे मारवाड़ी समाज को गंदी-गंदी गालियों से विभूषित किया था। जिसका वीडियो जमकर वायरल भी हुआ। जिसको लेकर पूरा मारवाड़ी समाज उद्वेलित हो गया था, तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।

उन सारे मारवाड़ियों का जोश ठंडा पड़ गया और वे समझौते को लेकर इस प्रकार से तेजी दिखाई, कि उनकी इस तेजी को देख अन्य समुदाय भी मुस्कुराये बिना नहीं रह सकें। एक ने तो इनकी इस तेजी को देख, यह कहने से नहीं चूंके कि भला मारवाड़ी समुदाय कब से केस-मुकदमे के चक्कर में आने लगा, देखियेगा ये लोग खुद समझौते के डेस्क पर आयेंगे और कल वो दिखाई भी पड़ गया। धनबाद पुलिस को ज्यादा दौड़-धूप व दोषियों को पकड़ने के लिए अब इस मामले में ज्यादा कसरत करना भी नहीं पड़ेगा। बताया तो यह भी जा रहा है कि आज थाने में दर्ज प्राथमिकी वापस भी ले लिया जायेगा और कुछ दिनों के बाद न्यायालय में समझौते के लिए दोनों पक्ष आवेदन भी जमा कर देंगे।

बताया जा रहा है कि कल ही धनबाद के बैंक मोड़ स्थित पोद्दार रेजीडेंसी होटल में धनबाद के भाजपा सांसद पशुपति नाथ सिंह की अध्यक्षता में एक मीटिंग का आयोजन हुआ। जिसमें दोनों पक्ष शामिल हुए। एक पक्ष जिस पर आरोप था कि उसने मारवाड़ी समुदाय के सुशील पोद्दार की जूते-चप्पल से पिटाई की है तथा मारवाड़ी समुदाय के खिलाफ गंदी-गंदी गालियां दी, वो तो स्वयं भाजपा सांसद पशुपति नाथ सिंह का रिश्तेदार ही है।

जिसका नेतृत्व एक तरह से भाजपा सांसद ही कर रहे थे तो दूसरी ओर भुक्तभोगी था जो इनके जुल्म का शिकार हुआ था अर्थात् जिसकी जूते-चप्पल से पिटाई हुई थी। भाजपा सांसद पशुपति नाथ सिंह ने जूते-चप्पल से पिटाई करनेवाले अपराधी के परिवार के सदस्यों को माफी मांगने को कहा। परिवार ने मौके की नजाकत देखी और माफी मांग ली। लीजिये जिसने जूते-चप्पल खाये थे। उदारता दिखाई और माफ कर दिया।

दोनों पक्ष खुश हो गये। यानी जिनके परिवारवालों ने जूते-चप्पल खाये वे भी खुश और जिन्होंने जमकर जूते-चप्पल बरसाये, वे भी खुश। इसी बीच जिसने जूते-चप्पल की बरसात की थी। उसको सूचना दे दी गई कि मामला समाप्त हो गया। वो भी यह सुनकर गदगद हो गया कि धन्य हैं उसके परिवार के लोग जो उसकी इतना ख्याल रखते हैं।

इधर बताया जा रहा है कि जब तक सुलह समझौते नहीं हुआ था, धनबाद पुलिस इस मामले को लेकर सक्रिय थी। कल ही धनसार पुलिस ने आरोपियों के परिवार के एक सदस्य को थाने ले आई थी, जिसको लेकर उसके समर्थकों ने बवाल काटने की कोशिश की, जो स्थानीय पुलिस की सक्रियता से सुलझा लिया गया। इधर इस सुलह-समझौते को लेकर धनबाद में काफी चर्चाएं हैं।

लेकिन ये चर्चा ज्यादा हैं कि मारवाड़ियों पर हमेशा से ही जूल्म होते रहे हैं, और ये समुदाय कभी भी अपराधियों-असामाजिक तत्वों के खिलाफ लड़ने की कोशिश नहीं की, हां जब भी इन पर दबाव बना, ये अपराधियों व असामाजिक तत्वों के आगे घूटने टेकते आये, जैसा कि इस बार भी देखने को मिला। राजनीतिक पंडितों की मानें, अगर मारवाड़ी समुदाय इस बार घूटने नहीं टेकता तो कुछ ही दिनों के अंदर अपराध में लिप्त ये लोग जेल की सलाखों के अंदर होते, क्योंकि प्रशासनिक दबाव इन लोगों पर ज्यादा बना हुआ था। जिसकी भनक भाजपा सांसद पीएन सिंह को भी लग गई थी।